Allahabad High Court: 'ब्रेस्ट पकड़ना, पैजामा खोलना', हाईकोर्ट के इस फैसले पर SC ने क्या कहा?
Allahabad High Court: नाबालिग लड़की के साथ रेप की कोशिश से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिए एक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए बुधवार, 26 मार्च को इस पर रोक लगा दी है।
इस फैसले पर उच्चतम न्यायालय की दो सदस्यीय बेंच ने इस पर अपना फैसला सुनाया। इस बेंच में जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह का नाम शामिल है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक
आज सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के रेप के फैसले पर रोक लगाते हुए कहा कि यह असंवेदनशील है। न्यायमूर्ति बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि, "यह एक गंभीर मामला है और फैसला सुनाने वाले न्यायाधीश की ओर से पूरी तरह असंवेदनशीलता है। हमें यह कहते हुए दुख हो रहा है कि यह फैसले सुनाने वाले की ओर से पूरी तरह असंवेदनशीलता को दर्शाता है।"
Allahabad High Court Judgment: क्या है पूरा मामला?
बता दें कि, 17 मार्च 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान कहा था, 'सिर्फ पीड़ित के ब्रेस्ट को पकड़ना और पजामे के नाड़े को तोड़ने से आरोपी के खिलाफ रेप की कोशिश का मामला नहीं बन जाता।"
ये विवादित फैसला जज जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने 11 साल की लड़की के साथ हुई इस घटना के तथ्यों को रिकॉर्ड करने के बाद सुनाया था। उन्होंने कहा था कि इन आरोप के चलते महिला की गरिमा पर आघात का मामला तो बनता है लेकिन इसे रेप के प्रयास का अपराध नहीं मान सकते हैं।
इलाहाबाद उच्चतम न्यायालय के इस विवादित फैसले का देश भर में भारी विरोध हुआ था और लोग इस फैसले पर SC से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की थी।
Allahabad High Court News: पहले खारिज कर दी थी याचिका
बता दें कि, इससे पहले नाबालिग लड़की के साथ रेप की कोशिश से जुड़े फैसले पर दायर की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। दायर याचिका में न्यायाधीश के फैसले के उस विवादित हिस्से को हटाने की मांग की गई है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि 'इस केस में पीड़ित के ब्रेस्ट को पकड़ना,और पजामे के नाड़े को तोड़ने के आरोप के चलते ही आरोपी के खिलाफ रेप की कोशिश का मामला नहीं बन जाता है।'












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