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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने स्‍कूलों में आयोजित किए जा रहे सूर्य नमस्‍कार कार्यक्रम पर जताया विरोध

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने स्‍कूलों में आयोजित किए जा रहे सूर्य नमस्‍कार कार्यक्रम पर जताया विरोध

नई दिल्‍ली, 04 जनवरी। सरकार ने स्‍वतंत्रता दिवस की 75 वीं वर्षगांठ पर 1 से 7 जनवरी तक स्‍कूलों में सूर्य नमस्‍कार कार्यक्रम करवाने का आदेश दिया है। वहीं मंगलवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सरकार के इस आदेश पर आपत्ति जताई है। सरकार के इस निर्देश पर विरोध जताते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा सूर्य नमस्‍कार सूर्य पूजा का एक रूप है और इस्‍लाम इसकी इजाजत नहीं देता है।

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बता दें स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ पर 1 जनवरी से 7 जनवरी के बीच स्कूलों में 'सूर्य नमस्कार' कार्यक्रम आयोजित करने के सरकार के निर्देश दिया गया है। जिस पर बोर्ड ने विरोध जताया है। बोर्ड ने एक आदेश जारी भी किया है और उसमें कहा है सरकार सूर्य नमस्‍कार के प्रस्‍तावित कार्यक्रम से बचे और मुस्लिम छात्र-छात्राएं ऐसे कार्यक्रमों में सम्मिलित न हों। ये आदेश ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव हजरत मौलाना खालिद सैफुल्‍लाह रहमानी ने जारी किया है।

उन्‍होंने अपने बयान में कहा भारत एक धर्मनिरपेक्ष, बहु-धार्मिक और बहु-सांस्‍कृतिक देश है, इन्‍हीं सिद्धान्‍तों के आधार पर हमारे संविधान में लिखा गया है , स्‍कूल के पाठ्यचार्या और अपाठचर्याओं में भी इसका ध्‍यान रखने का निर्देश दिया है।इसमें लिखा गया संविधान हमें इसकी अनुमति नहीं देता है कि सरकारी शिक्षण संस्‍थानों में सिकी धर्म विशेष की शिक्षा दी जाएं या किसी विशेष समूह की मान्‍यताओं के आधार पर आयोजित किया जाए, लेकिन ये बहुत ही दुर्भाग्‍यपूर्ण है कि वर्तमान सरकार इस सिद्धांत से भटक रही है, जैसा कि तथ्‍य से स्‍वष्‍ठ है कि भारत सरकार के आधीन सचिव शिक्षा मंत्रालय ने 75वें स्‍वतंत्रता दिवस के अवसर पर 30 राज्‍यों में सूर्य नमस्‍कार की एक परियोजना चलाने का निर्णय किया है, जिसमें 30 हजार स्‍कूलों को पहले चरण में शामिल किया गया है।

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    1 जनवरी 2022 से 7 जनवरी 2022 तक के लिए यह कार्यक्रम प्रस्‍तावित है और 26 जनवरी 2022 को सूर्य नमस्‍कार पर संगीता कार्यक्रम की भी योजना है, आंध्रप्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को केंद्र सरकार की ओर से निर्देश दिया गया है कि निश्चित रूप से ये असंवैधानिक कृत्‍य है और ये देशप्रेम का झूठा प्रचार है।
    सूर्यनमस्‍कार सूर्य की पूजा का एक रूप है इस्‍लाम, और देश के अल्‍पसंख्‍य ना तो सूर्य देवता को मानते है औक्‍र ना ही उसी उपासना कोसही मातने हैं इसलिए सरकार का ये क‍र्तव्‍य है कि वो ऐसे निर्देश को वापस ले और देश के धर्मनिपेक्ष मूल्‍यों का सम्मान करें।

    बोर्ड ने कहा हां अगर सरकार चाहे तो देश प्रेम की भावना को उभारने के लिए राष्‍ट्रगान पढवाए, यदिन सरकार देश से प्रेम का हक अदा करना चाहती है तो उसे चाहिए कि वो देश की वास्‍तविक समस्‍याओं पर ध्‍यान दे, देश की बढ़ती बेरोजगारी, मंहगाई, आपसी नफरत का औपचारिक प्रचार, देश सीमाओं की रक्षा करने में विफलता, सरकार की ओर से सार्वजनिक संपत्ति की निंरतर बिक्री, ये देश के वास्‍तविक मुद्दे हैं जिन पर सरकार को ध्‍यान देने की आवश्‍यकता है।

    इसके साथ ही मौलना रहमानी ने कहा मुस्लिम बच्‍चेों के लिए सूर्य नमस्‍कार जैसे कार्यक्रमों में शामिल होने की बिलकुल की अनुमति नहीं है और इससे बचना आवश्‍यक है।

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