क्या अखिलेश यादव ने कांग्रेस को दिल से नहीं किया है माफ? यूपी में PDA को लेकर दिया बड़ा संकेत
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया (इंडियन नेशलन डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस) ब्लॉक की दो प्रमुख पार्टियों कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच यूपी में तलखी पूरी तरह से खत्म होती नजर नहीं आ रही है।
दोनों दलों के नेताओं के बीच शुरू हुई जुबानी जंग के बाद सपा सुप्रीमो ने रविवार को एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट किया है, जिससे लगता है कि यह विवाद उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों की राजनीतिक को लेकर नया मोड़ ले सकता है।

पीडीए के बहाने अखिलेश क्या संकेत दे रहे हैं?
इस पोस्ट में समाजवादी पार्टी प्रमुख ने पार्टी के एक कार्यकर्ता की तस्वीर शेयर की है, जिसमें पार्टी के चुनाव चिन्ह वाले रंगों में एक संदेश लिखा हुआ है, जिसमें 2024 के लोकसभा चुनावों में पीडीए को जिताने की बात की गई है।
इस बार इलेक्शन को पीडीए जिताएगा- सपा
हिंदी में लिखा यह संदेश कुछ इस तरह से है, 'मिशन 2024...समाजवादी पार्टी जिंदाबाद...नेताजी (पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव) अमर रहें...अखिलेश यादव जिंदाबाद...इस बार इलेक्शन को पीडीए जिताएगा.....गरीबों को इंसाफ अखिलेश यादव दिलाएंगे....'
'होगा 24 का चुनाव, पीडीए का इंकलाब'
इस फोटो को शेयर करते हुए अखिलेश ने कैप्शन में लिखा है, 'होगा 24 का चुनाव, पीडीए का इंकलाब'। गौरतलब है कि एमपी विधानसभा चुनावों में दोनों दलों के बीच सीटों का तालमेल नहीं हो पाने की वजह से एक-दूसरे की ओर से काफी नाराजगी भरी टिप्पणियां की जा चुकी हैं। सपा प्रमुख ने यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय को 'चिरकुट' तक कह दिया था तो उधर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने उनके लिए 'अखिलेश-वखिलेश' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर चुके हैं। इसपर अखिलेश ने भी उनके नाम में कमल (भाजपा का चुनाव निशान) को लेकर तंज कसा था।
लेकिन, शनिवार को कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता की इस मामले को ठंडा करने के लिए उनसे मुलाकात की बात सामने आई थी। जिसके बाद अखिलेश ने मीडिया से कहा था, '....अगर वो कुछ कह रहे हैं, तो उनकी बात माननी पड़ेगी....' लेकिन, फिर लगातार पीडीए की वकालत करने से लग रहा है कि गठबंधन की 'राजनीति' अभी खत्म नहीं हुई है।
पीडीए क्या है?
पीडीए का मतलब है- पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक। समाजवादी पार्टी 2022 के विधानसभा चुनावों में हार के बाद से इसी समीकरण के दम पर राज्य में सत्ता पाने की उम्मीद लगाए बैठी है। लेकिन, इसी बीच करीब 28 बीजेपी-विरोधी दलों के गठबंधन इंडिया में सपा और कांग्रेस भी साथ आई है। ऐसे में फिर से भाजपा के मुकाबले में इंडिया की जगह पीडीए को सामने लाना, विपक्षी दलों के गठबंधन के लिए अच्छा संकेत नहीं लग रहा है। खासकर तब जब कांग्रेस और सपा के बड़े नेताओं के बीच सार्वजनिक तौर पर 'तू-तू, मैं-मैं' जैसी स्थिति पैदा हो चुकी है।
कांग्रेस के साथ पैदा हुए नए मतभेदों के बीच पीडीए की बात अखिलेश यादव की ओर से लगातार दूसरे दिन सामने आई है। शनिवार को भी उन्होंने यूपी की शाहजहांपुर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भी यह मुद्दा छेड़ा था।
एएनआई के मुताबिक तब यूपी के पूर्व सीएम ने कहा था कि पीडीए 'पहले' बना था 'और इंडिया एलाएंस का गठन बाद में हुआ।' उन्होंने कहा था कि हालांकि विपक्षी गठबंधन बना हुआ है, सपा की 'रणनीति पीडीए की है।' इससे पहले सपा प्रमुख कांग्रेस पर धोखा देने तक का आरोप लगा चुके हैं।
दरअसल समाजवादी पार्टी का दावा रहा है कि कांग्रेस ने एमपी में उसे 6 सीटें देने पर विचार करने का वादा किया था। लेकिन, बाद में वह इससे मुकर गई। इसके बाद सपा ने 17 नवंबर को होने वाले चुनावों के लिए 229 सीटों में से 33 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का एलान कर दिया था।












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