सपा का दंगल: अखिलेश के खिलाफ शिवपाल जाएंगे कोर्ट?
राजनीति की समझ रखने वालों के हिसाब से अब शिवपाल केे पास अपनी साख पार्टी में बचाए रखने के लिए कोर्ट ही विकल्प बचता है।
लखनऊ। आज जो कुछ भी लखनऊ में हुआ है, उसे देखकर तो ये ही लगता है कि अब शिवपाल सिंह यादव के पास कोर्ट जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। राजनीति की समझ रखने वालों के हिसाब से अब शिवपाल के पास अपनी साख पार्टी में बचाए रखने के लिए कोर्ट ही विकल्प बचता है।
सोची समझी चाल है मुलायम की?
हालांकि विरोधीगढ़ और अखिलेश के मंत्री ने तो कह दिया कि ये सबकुछ एक सोची-समझी रणनीति के तहत हुआ है लेकिन अगर गौर फरामाया जाए तो विरोधियों का ये आरोप बेबुनियाद नहीं है।
सपा सुप्रीमो ने हर फैसले पर अपनी मुहर कैसे लगा दी?
अगर आप पूरे घटनाक्रम पर गौर फरमाए तो आप देखेंगे कि मुलायम सिंह का हर फैसला चाहे वो अखिलेश और रामगोपाल को पार्टी से बाहर करने का हो, या वापस बुलाने का, उन्होंने अकेले ही किया है, जबकि ये सारे निर्णय लेने के लिए पार्टी में एक पूरी व्यवस्था है, यहां तक कि सूची जारी करने का अधिकार भी सीधे अध्यक्ष को नहीं है, ऐसे में मुलायम ने हर फैसले पर अपनी मुहर कैसे लगा दी, ये एक बड़ा सवाल है।
मुलायम के हर जोड़ का तोड़ रामगोपाल के पास
तो वहीं दूसरी ओर मुलायम के हर जोड़ का तोड़ रामगोपाल के पास है, उन्होंने जो राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया है, वह उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। वह राष्ट्रीय महासचिव होने के नाते यह निर्णय ले सकते हैं, ऐसी स्थिति में महासचिव द्वारा बुलाए गए सम्मेलन को अगर वैध माना जाए तो उसमें जो प्रस्ताव पास हुए भी वैध हुए, इसलिए वो तो गलत हुए नहीं।
मुलायम और शिवपाल के बयान का इंतजार
राजनीति और संविधान की अच्छी जानकारी रखने वाले मुलायम को भी कहीं ना कहीं ये मालूम है कि उनके द्वारा लिए गए सभी निर्णय, निष्कासन और निलंबन वापस लेना, इन सभी चीजों को अदालत में सही नहीं ठहराया जा सकता है, वो भले ही कहे कि वो शिवपाल के साथ हैं लेकिन उनका हर कदम उनके खिलाफ ही दिख रहा है। फिलहाल हर किसी को अब मुलायम और शिवपाल के बयान का इंतजार है, जो कि अभी तक शांत हैं।













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