Akhand Bharat: मिजोरम से क्यों उठी RSS-BJP के 'अखंड भारत' का सपना पूरा करने की मांग?
अयोध्या में जिस समय राम मंदिर में भव्य प्राण-प्रतिष्ठा की तैयारी चल रही है, उसी समय देश के पूर्वोत्तर के एक राज्य मिजोरम से एक ऐसी मांग उठी है, जो आरएसएस, वीएचपी जैसे हिंदूवादी संगठनों का हौसला और बुलंद कर सकता है। यही नहीं चुनावी वर्ष में यह भाजपा के एजेंडे में भी फिट बैठ सकता है।
'वन इंडिया' ने हाल ही में एक रिपोर्ट दिखाई थी कि देश को 'परम वैभव', 'अखंड भारत' जैसे 'विश्व गुरु' बनाने वाले एजेंडे को आगे बढ़ाकर किस तरह से बीजेपी आने वाले दिनों में अपने कैडर और कोर वोटरों को उत्साहित करने के लिए नए एजेंडे पर काम कर सकती है।

मिजोरम के सीएम ने 'अखंड भारत' के लिए की बैटिंग
मिजोरम के नव-निर्वाचित मुख्यमंत्री और जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) के नेता लालदुहोमा ने मिजो लोगों की ओर से गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर उसी 'अखंड भारत' के विचार को अमलीजामा पहनाने की मांग रख दी है।
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी और लालदुहोमा के बीच हुई बातचीत की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने यह खुलासा किया है।
भारत-म्यांमार सीमा पर करने आए थे चर्चा
माना जा रहा है कि मिजोरम के सीएम ने पीएम मोदी से कहा है कि मिजोरम के लोग शरणार्थियों (म्यांमार के) के बारे में मानते हैं कि 'वे बाहरी नहीं हैं, बल्कि अपने ही खून वाले भाई हैं।'
'ग्रेटर मिजोरम की अवधारणा को 'अखंड भारत' में शामिल करें'
अधिकारियों के अनुसार लालदुहोमा ने प्रधानमंत्री से कहा है, 'दोनों देशों को सीमा ने बांट रखा है, जिसे स्वीकार करना हमारे लिए मुश्किल है। हम एक प्रशासनिक इकाई के अंदर एकजुट होने के लिए तरस रहे हैं। हम ग्रेटर मिजोरम की अवधारणा को अखंड भारत प्रोजेक्ट में शामिल करना चाहते हैं।'
'अखंड भारत' सच्चाई बनेगा- मोहन भागवत
ज्यादा दिन नहीं गुजरे हैं। एक कार्यक्रम के दौरान एक छात्र के सवाल के जवाब में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि 'अखंड भारत' का विचार आने वाले वर्षों में सच्चाई बनेगा।
जब नई संसद भवन में 'अखंड भारत' भित्तिचित्र लगाया गया था, तब भी यह मामला बहुत चर्चित हुआ था। कुछ समय बाद 'भारत' बनाम 'इंडिया' की चर्चा ने भी खूब सुर्खियां बटोरी थीं।
'अखंड भारत' क्या है?
प्राचीन इतिहास के मुताबिक भारत (पाकिस्तान-बांग्लादेश समेत) अफगानिस्तान, भूटान, म्यांमार, मालदीव, श्रीलंका, तिब्बत और नेपाल भारत का ही हिस्सा थे और एक ही राष्ट्र कहे जाते थे।
40 साल पुरानी फ्री मूवमेंट रिजीम खत्म करने का फैसला
केंद्र सरकार की ओर से पूर्वोत्तर के 4 राज्यों के साथ लगने वाली म्यांमार की सीमा के इलाकों में 40 साल पुरानी फ्री मूवमेंट रिजीम (FMR) को खत्म करने के फैसले के एक दिन बाद मिजोरम के मुख्यमंत्री दिल्ली में पीएम मोदी से मिलने पहुंचे थे।
म्यांमार सीमा पर बाड़बंदी का विरोध
इस दौरान उन्होंने कहा कि म्यामांर की सीमा पर किसी भी तरह से बाड़बंदी की कोशिश, अंग्रेजों की ओर से की गई भूल की तरह ही होगा। एफएमआर के तहत दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे के इलाकों में 16 किलोमीटर तक निश्चित अवधि के पास के साथ आ-जा सकते हैं।
इससे एक दिन पहले पूर्व आईपीएस लालदूहोमा विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मिले थे, जो 1977 के उनके बैचमेट भी हैं। अधिकारियों के मुताबिक जयशंकर से मिजरोम के सीएम ने कहा था, 'भारत और म्यांमार में रहने वाले मिजो लोगों को अंग्रेज सरकार ने बांट दिया था। मिजो लोग सीमा पर बाड़ लगाने के प्रस्ताव को ठुकराते हैं...'
मिजोरम से म्यांमार और बांग्लादेश की 700 किमी सीमा लगती है
जानकारी के मुताबिक लालदूहोमा ने प्रधानमंत्री को बताया है कि मिजो लोग म्यांमार के चिन राज्य के साथ अंग्रेजों की ओर किए गए सीमा के निर्धारण को नहीं मानते। मिजोरम के साथ म्यांमार और बांग्लादेश की 700 किलोमीटर सीमा लगती है।
मिजोरम में म्यांमार और बांग्लादेश के शरणार्थी मौजूद हैं
मिजोरम में इस समय म्यांमार और बांग्लादेश में राजनीतिक विवाद और जातीय हिंसा की वजह से भागकर आए हजारों लोग शरणार्थी बनकर रह रहे हैं। पड़ोसी मणिपुर से भी पिछले साल भड़की जातीय हिंसा की वजह से बड़ी संख्या में लोग मिजोरम में शरण लिए हुए हैं।
2021 से मिजोरम में म्यांमार से आए करीब 30,000 शरणार्थी रह रहे हैं, जिनमें से अधिकांश वहां के चिन राज्य के रहने वाले हैं। राज्य में बांग्लादेश के चिटगांव पहाड़ी से भागकर आए करीब 1,000 लोग भी रह रहे हैं। वहीं मणिपुर के पहाड़ी इलाकों से आने वाले लोगों की संख्या भी करीब 11,000 बताई जा रही है।












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