राम मंदिर, अनुच्छेद 370 पर सफलता, UCC पर भी बढ़ी बात, बीजेपी का अगला एजेंडा क्या होगा?
अयोध्या में भगवान राम लला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के साथ ही भारतीय जनता पार्टी का दशकों पुराना तीन में से दूसरा मूल एजेंडा भी हासिल होने जा रहा है। यह एजेंडा था, 'जहां राम का जन्म हुआ था, मंदिर वहीं बनाएंगे।' इससे पहले जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म हो चुका है।
बीजेपी का तीसरा मूल एजेंडा है- यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) का जो लगभग सफलता के नजदीक पहुंच चुका है। इसपर पार्टी राज्यों में काम कर रही है और संभावना है कि इसी महीने उत्तराखंड में यह हकीकत बनने जा रहा है।

- बीजेपी ने तीनों मूल मुद्दों पर लगभग पूरी सफलता प्राप्त की।
- यूसीसी भी राज्यों में हकीकत बनने की ओर।
- भाजपा को आगे भी भावनात्मक मुद्दों की है आवश्यकता।
- PoK और अक्साई चिन आ सकते हैं भाजपा के काम।
बीजेपी की स्थापना के समय से रहे यह तीनों मूल मुद्दे
बीजेपी की स्थापना के समय से यही तीन भावनात्मक मूल मुद्दे रहे हैं, जिसके दम पर पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़े रही है। 90 के दशक में सिर्फ कुछ समय के लिए इन तीनों मुद्दों को पार्टी ने किनारे पर रखा था, क्योंकि तब दूसरों के समर्थन से गठबंधन की सरकार बनाने की मजबूरी थी।
बीजेपी का अगला भावनात्मक एजेंडा क्या होगा?
ये तीनों ऐसे मुद्दे हैं, जिनके नाम पर विरोधी भारतीय जनता पार्टी पर जनता की भावनाएं भड़काने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन, अब सवाल है कि जब यह तीनों ही मूल मुद्दों पर पार्टी को लगभग सफलता हासिल हो चुकी है तो पार्टी के सामने आगे ऐसे कोर एजेंडे क्या होंगे?
क्योंकि, चुनाव जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी को आगे भी ऐसे भावनात्मक मुद्दों की जरूरत पड़ेगी, जो कार्यककर्ताओं को भी जोड़े रह सके और वोट जुटाने में भी असरदार साबित हो।
हालांकि, अभी तक कुछ भी साफ नहीं है, लेकिन फिर भी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के काम करने के तरीके की समझ रखने वाले लोग कुछ बातों की ओर इशारा कर रहे हैं, जिससे भविष्य में बीजेपी के संभावित एजेंडे का संकेत मिल सकता है।
'अखंड भारत' और देश को 'विश्व गुरु' बनाने का आरएसएस देखता है सपना
आरएसएस, बीजेपी को वैचारिक मार्ग दर्शन देने वाला गैर-राजनीतिक संगठन है। यह हमेशा से भारत के 'परम वैभव' की बातें करता है। प्राचीन काल में राष्ट्र की प्रतिष्ठा और गौरव को वापस हासिल करने जैसे विचार रखता है। 'अखंड भारत' और देश को 'विश्व गुरु' के रूप में फिर से स्थापित करने का लक्ष्य लेकर चलता आया है।
पीओके और अक्साई चिन जैसे मुद्दों पर दांव?
अगर इस आधार पर समझने की कोशिश करें तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन (Aksai Chin) ऐसे भावनात्मक मुद्दे हो सकते हैं, जो चुनावों में भाजपा के लिए वोट बटोरने वाली मशीन का काम दे सकते हैं। बीजेपी भारत के इन हिस्सों को फिर से वापस लेने को मुद्दा बना सकती है।
अमित शाह हाल ही में संसद में उठा चुके हैं पीओके का मुद्दा
अभी हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में कहा भी था, 'पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की समस्या पंडित जवाहर लाल नेहरू की वजह से हुई। नहीं तो यह हिस्सा कश्मीर का होता। नेहरूजी पीओके के लिए जिम्मेदार हैं।'
पीओके हमारा है- मोदी सरकार
इसके बाद उन्होंने जम्मू और कश्मीर में विधानसभा सीटों में बढ़ोतरी के बारे में बताते हुए कहा, 'पहले जम्मू में 37 सीटें थीं, अब 43 होंगी। पहले कश्मीर में 46 थीं, अब 47 होंगी और पीओके में, 24 सीटें आरक्षित रखी गई हैं, क्योंकि पीओके हमारा है।'
जम्मू-कश्मीर में पीओके और अक्साई चिन भी शामिल है- मोदी सरकार
इससे पहले संसद में जम्मू और कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के मामले में 6 अगस्त, 2019 को गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी से पूछा था, 'आप पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत का हिस्सा कैसे नहीं मान सकते हैं।'
उन्होंने आगे कहा था,'हम इस क्षेत्र (पीओके) के लिए अपनी जान दे देंगे। जब मैं जम्मू और कश्मीर कहता हूं, मैं उसमें पीओके भी शामिल करता हूं। जैसा कि संविधान में स्पष्ट रूप से लिखा गया है, जम्मू-कश्मीर की सीमाओं में पीओके और अक्साई चिन शामिल हैं.....'












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