कसाब ने जेल में कभी नहीं मांगी थी मटन बिरयानी,सरकारी वकील ने बोला था झूठ
नयी दिल्ली। 26/11 को मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब को नबंवर 2012 में फांसी दे दी गई। उसके मौत के बाद अब जाकर इस मामले में नया खुलासा हुआ है। खुलासा मामले की पैरवी करने वाले जाने-माने सरकारी वकील उज्जव निकम ने की है।

सरकारी वकील ने दावा किया है कि मुंबई हमले के दोषी आतंकी आमिर अजमल कसाब ने जेल में कभी बिरयानी नहीं मांगी थी। निकम ने कहा कि उस वक्त मैंने झूठ होला था । ये झूठ आतंकी के पक्ष में बनाई जा रही 'भावनात्मक लहर' को रोकने के लिए बोला गया था।
सनसनीखेज खुलासा: आतंक के नए रंगरूटों के लिए चलाई गई थी 'स्पेशल कसाब क्लास'
जयपुर में आतंकवाद विरोधी अंतररराष्ट्रीय सम्मेलन में निकम ने कहा कि कसाब ने कभी भी बिरयानी की मांग नहीं की थी और न ही सरकार ने उसे बिरयानी परोसी थी। उन्होंने कहा के केस के दौरान आतंकी कसाब के पक्ष में चल रहे भावनात्मक माहौल को रोकने के लिए मैंने इसे गढ़ा था।
जिंदा रहते 28.46 करोड़ खर्च कराने वाला कसाब महज 10 हजार में हुआ दफ्न
उन्होंने कहा जब मामला केस में चल रहा था तो मीडिया गहराई से कसाब के हाव-भाव देख कर रही थी। वो चीजों को अच्छे से समझ रहा था। वो मीडिया के जरिए भावनात्मक खेल खेलना चाहता था। ऐसे में इसे रोकने के लिए मैंने बिरयानी की बात सामने रखी।
कसाब की मौत के बाद भी बाकी है कई सवाल: पाकिस्तान
निकम ने कहा कि इस तरह की भावनात्मक लहर और माहौल को रोकने की जरूरत था, इसलिए मैंने उस वक्त मीडिया में ये बाते रखी कि कसाब ने जेल में मटन बिरयानी की मांग की है। गौरतलब है कि पाकिस्तानी आतंकवादी कसाब को नवंबर 2008 में हुए आतंकी हमले के करीब 4 साल बाद नवंबर 2012 में फांसी दे दी गई थी।












Click it and Unblock the Notifications