एयरक्राफ्ट (अमेंडमेंट) बिल 2020 राज्यसभा में पास, कांग्रेस ने किया जमकर विरोध
नई दिल्ली। कोरोना वायरस संकट के बीच संसद के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन है। इसी के साथ ही मंगलवार को चली लंबी बहस के बाद राज्यसभा में वायुयान संशोधन विधेयक (एयरक्राफ्ट अमेंडमेंट बिल) को पास कर दिया गया। राज्यसभा में कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने इस बिल का जमकर विरोध किया है। बहस के दौरान कांग्रेस नेता सांसद केसी वेणुगोपाल ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा, आडानी ग्रुप को 6 एयरपोर्ट सौंप दिए गए हैं। एक अकेली प्राइवेट कंपनी को 6 एयरपोर्ट दे देना नियमों का उल्लंघन है। सरकार ने अपने ही मंत्रालयों और विभागों की सलाह नहीं मानी। नियमों में परिवर्तन करके अडानी ग्रुप को नीलामी में जिता दिया गया।

इस बीच एयरक्राफ्ट अमेंडमेंट बिल पर चर्चा के दौरान नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, ' सदन में विपक्ष द्वारा छह हवाई अड्डों को लेकर बहुत कुछ कहा जा रहा है, तो मैं उन्हें बता दूं कि साल 2006 में मुंबई और दिल्ली के दो हवाई अड्डों का निजीकरण किया गया जो हमारे यातायात और कमाई का 33 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं, 2018 में जिन छह हवाई अड्डों पर फैसला लिया गया उनका मिलकर हिस्सा केवल नौ प्रतिशत है। 2006 में जब दिल्ली और मुंबई के हवाई अड्डों का निजीकरण करने के लिए जिन शर्तों को रखा गया था उन्हीं प्रक्रियाओं का हमने भी पालन किया है। बस फर्क इतना है कि हमारे ऊपर आरोप लगाए जा रहे हैं।'
बहस के दौरान कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया है कि पीपीपी मॉडल हवाई अड्डे को विकसित करने के नाम पर घोटाला है। वहीं भाजपा सांसद जीवीएल नरसिम्हा राव ने विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि यह हमारे विमानन क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए है, जिससे यात्रियों के आवागमन में वृद्धि हुई है। विमान के बिल पर बहस के दौरान एनसीपी सांसद प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि साल में एक बार 4-5% पीपीएल बोर्ड उड़ानें। यदि यह संख्या 10-15% तक बढ़ जाती है, तो हमें हवाई अड्डों और विमानों की संख्या में भारी वृद्धि की आवश्यकता होगी। COVID-19 की वजह से एयरलाइंस को वित्तीय रूप से झटका लगा है और उन्हें समर्थन की आवश्यकता है।
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