Plane Crash: UK के परिवारों के इनकार से लाशों का क्या होगा? कितना खर्चा हुआ? कहां से लौटाएंगे? उठे सवाल
Air India Crash British WRONG Bodies Case : 12 जून 2025 को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए एयर इंडिया की उड़ान AI171 के भयावह हादसे ने 260 जिंदगियों को छीन लिया, जिसमें 53 ब्रिटिश नागरिक शामिल थे। इस त्रासदी ने न सिर्फ परिवारों को सदमे में डाल दिया, बल्कि अब एक नया विवाद सामने आया है। ब्रिटेन के कम से कम दो परिवारों ने दावा किया है कि उनके प्रियजनों के बजाय गलत शव भेजे गए हैं। इस गंभीर चूक ने भारत की मृतक पहचान प्रक्रिया और शवों के प्रत्यावर्तन (रेपैट्रिएशन) पर सवाल खड़े किए हैं।
परिवारों ने इन शवों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं:- इन शवों का अब क्या होगा? कितना खर्च हुआ इन ताबूतों को ब्रिटेन भेजने में? क्या गलती अहमदाबाद में हुई या ब्रिटेन पहुंचने के बाद? और अब सही शव कैसे और कहां से लौटाए जाएंगे? Oneindia Hindi की इस विशेष रिपोर्ट में भारत में मौजूद ब्रिटिश एंबेसी ने Exclusive बातचीत की। आइए हम इन सवालों का जवाब तलाशते हैं, ताकि इस दुखद घटना की सच्चाई सामने आए...

पहला सवाल: कितने शव भेजे गए ब्रिटेन और कितना हुआ खर्च?
12 जून 2025 को एयर इंडिया की उड़ान AI171, जो लंदन-गैटविक जा रही थी, टेकऑफ के 32 सेकंड बाद बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में 241 यात्री और चालक दल के सदस्य मारे गए, साथ ही जमीन पर 19 लोग भी हताहत हुए। मृतकों में 53 ब्रिटिश नागरिक थे। सूत्रों के अनुसार, अब तक 12 शवों को ताबूतों में सील कर ब्रिटेन भेजा गया है।
प्रत्यावर्तन की लागत: शवों को अहमदाबाद से ब्रिटेन भेजने की लागत कई कारकों पर निर्भर करती है। एक अंतरराष्ट्रीय प्रत्यावर्तन सेवा, Homeland International Repatriation Global, के अनुसार, शवों को वापस लाने की लागत £2,500 से £20,000 (लगभग ₹2.75 लाख से ₹22 लाख) तक हो सकती है, जिसमें औसत लागत £3,000 से £6,000 (₹3.3 लाख से ₹6.6 लाख) होती है। राख (ऐश) भेजने की लागत कम होती है, जो £1,000 से £3,000 (₹1.1 लाख से ₹3.3 लाख) तक हो सकती है।
लागत के प्रमुख अंश:-
- एयरलाइन शुल्क: अंतरराष्ट्रीय शव परिवहन को 'ह्यूमन रिमेन्स' के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। सामान्य अनुमान के मुताबिक, अहमदाबाद से लंदन तक एक शव भेजने की लागत $1,500 से $15,000 (₹1.25 लाख से ₹12.5 लाख) हो सकती है। यह दूरी, एयरलाइन, और अतिरिक्त सेवाओं (जैसे एम्बाल्मिंग) पर निर्भर करता है।
- ताबूत की कीमत: सामान्य लकड़ी का ताबूत ₹10,000 से ₹50,000 तक हो सकता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिवहन के लिए जिंक-लाइन और एयरटाइट ताबूत की आवश्यकता होती है, जिसकी कीमत ₹50,000 से ₹1 लाख तक हो सकती है। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वडोदरा के एक ताबूत निर्माता, नेल्विन राजवाड़ी, ने बताया कि एयर इंडिया ने 100 ताबूतों का ऑर्डर दिया था।
- अन्य खर्चे: एम्बाल्मिंग, स्थानीय परिवहन, डॉक्यूमेंटेशन (मृत्यु प्रमाणपत्र, नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट, और दूतावास की मंजूरी), और सीमा शुल्क शुल्क जैसे खर्च ₹50,000 से ₹2 लाख तक जोड़ सकते हैं।
- कुल लागत का अनुमान: 12 शवों को ब्रिटेन भेजने की अनुमानित लागत ₹40 लाख से ₹1.5 करोड़ तक हो सकती है, जिसमें ताबूत, परिवहन, और डॉक्यूमेंटेशन शामिल हैं।
दूसरा सवाल: ब्रिटिश परिवारों ने गलत शवों का दावा किया, अब इनका क्या होगा?
ब्रिटेन के दो परिवारों ने दावा किया है कि उन्हें भेजे गए शव उनके प्रियजनों के नहीं थे। विमानन वकील जेम्स हीली-प्रैट, जो 20 से अधिक ब्रिटिश परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने बताया कि लंदन की इनर वेस्ट सीनियर कोरोनर डॉ. फियोना विलकॉक्स ने DNA टेस्ट करवाए, जिसमें गड़बड़ी सामने आई। डेली मेल की एक रिपोर्ट में आरोप लगे- 'एक ताबूत में कई शवों के अवशेष 'कॉमिंगल्ड' (मिश्रित) पाए गए, जबकि दूसरे मामले में ताबूत में मौजूद शव उस परिवार के प्रियजन का नहीं था।'
- परिवारों का इनकार: इन परिवारों ने गलत शवों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसके कारण अंतिम संस्कार रद्द करने पड़े। एक परिवार को अब तक कोई शव नहीं मिला, जिससे वे अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहे हैं। हीली-प्रैट ने कहा, 'ये परिवार अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देना चाहते हैं, लेकिन गलत शवों ने उनकी पीड़ा को और बढ़ा दिया।'
- अवशेषों का भविष्य: ब्रिटिश और भारतीय अधिकारी संयुक्त रूप से इसकी जांच कर रहे हैं। अगर सही शवों की पहचान हो जाती है, तो उन्हें दोबारा ब्रिटेन भेजा जा सकता है, लेकिन यह प्रक्रिया समय लेने वाली और महंगी होगी। डेली मेल की एक रिपोर्ट में हीली-प्रैट ने बताया कि ब्रिटेन के कुछ शवों को भारत में ही दफनाया या अंतिम संस्कार किया गया है, जिससे परिवारों के लिए सही अवशेष प्राप्त करना और मुश्किल हो सकता है।
तीसरा सवाल: सही शव कहां से लौटाए जाएंगे?
हादसे में 53 ब्रिटिश नागरिकों की मौत हुई थी। अब तक 12 शव ब्रिटेन भेजे गए हैं, जबकि कुछ शवों को धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भारत में ही दफनाया या जलाया गया। उदाहरण के लिए, अकील नानाबावा, उनकी पत्नी हन्ना वोराजी, और उनकी चार साल की बेटी सारा के परिवार ने बताया कि उन्होंने भारत में ही इस्लामिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया, लेकिन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी।
क्या हैं चुनौतियां?
- क्षतिग्रस्त अवशेष: हादसे में आग की तीव्रता (1,500 डिग्री सेल्सियस) के कारण कई शव पूरी तरह जल गए, जिससे DNA नमूने लेना मुश्किल हो गया।
- पहचान की जटिलता: अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने DNA टेस्ट के आधार पर 231 शवों की पहचान की और 210 को परिवारों को सौंप दिया, लेकिन कुछ शव अभी भी अस्पताल में हैं।
चौथा सवाल: क्या ताबूतों की अदला-बदली ब्रिटेन में हुई?
यह सवाल अभी अनसुलझा है कि क्या गलती अहमदाबाद में शवों की पहचान के दौरान हुई या ब्रिटेन पहुंचने के बाद ताबूतों की अदला-बदली हुई। अहमदाबाद सिविल अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया, 'पहचान प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक थी।' शवों को सील्ड ताबूतों में रखकर Kenyon International Emergency Services के माध्यम से एयर इंडिया कार्गो द्वारा ब्रिटेन भेजा गया।
संभावित चूक क्या?
- परिवहन के दौरान: ताबूतों की लोडिंग, ट्रांजिट (जैसे दोहा या दुबई में), या ब्रिटेन में डिलीवरी के दौरान लेबलिंग में त्रुटि हो सकती है। हालांकि, Kenyon International जैसी विशेषज्ञ एजेंसी इस तरह की गलतियों को कम करने के लिए जानी जाती है।
- ब्रिटेन में चूक: लंदन में ताबूतों की डिलीवरी के बाद स्थानीय हैंडलिंग में गलती की संभावना कम है, क्योंकि कोरोनर डॉ. फियोना विलकॉक्स ने DNA टेस्ट करवाए, जिसने गड़बड़ी को उजागर किया।
कौन वहन करेगा खर्च?
यह अभी स्पष्ट नहीं है कि गलत शवों की वापसी और सही शवों को भेजने की लागत कौन वहन करेगा? एयर इंडिया ने स्पष्ट किया कि शवों की पहचान और हैंडलिंग में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। यह काम अहमदाबाद सिविल अस्पताल और Kenyon International ने किया। हालांकि, ब्रिटिश परिवारों के वकील जेम्स हीली-प्रैट ने एयर इंडिया और उनकी संबद्ध एजेंसी से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। कुछ परिवारों ने मांग की है कि भारत और ब्रिटेन सरकारें इस लागत को वहन करें।
शवों की हवाई यात्रा में क्या-क्या डॉक्यूमेंट जरूरी?
- मृत्यु प्रमाणपत्र
- एम्बाल्मिंग सर्टिफिकेट
- नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (भारत और ब्रिटेन के दूतावासों से)
- जिंक-लाइन और एयरटाइट ताबूत
- ब्रिटेन के स्वास्थ्य और सीमा शुल्क नियमों का पालन
भारतीय सरकार और ब्रिटेन का क्या रूख ?
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'सभी शवों की पहचान स्थापित प्रोटोकॉल के तहत की गई और गरिमा के साथ हैंडल किया गया। हम ब्रिटिश अधिकारियों के साथ मिलकर इस मुद्दे को सुलझाने के लिए काम कर रहे हैं।' साथ ही विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि सभी शवों की पहचान 'वैज्ञानिक प्रोटोकॉल' के तहत की गई और 'उत्कृष्ट पेशेवरता' के साथ हैंडल किया गया। हालांकि, ब्रिटिश परिवारों के वकील ने पहचान प्रक्रिया को 'अस्वीकार्य रूप से खराब' बताया। ब्रिटेन ने अपने फोरेंसिक एक्सपर्ट्स को अहमदाबाद भेजा था, लेकिन पहचान और ताबूतों की पैकिंग का काम भारतीय अधिकारियों ने किया।
दो देशों के बीच अटका 'शवों की अदला-बदली' का पेंच!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 23-26 जुलाई 2025 को ब्रिटेन यात्रा के दौरान इस मुद्दे के उठने की संभावना है, क्योंकि ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ उनकी मुलाकात में यह एक संवेदनशील विषय हो सकता है।
एयर इंडिया हादसे के बाद गलत शवों का विवाद न केवल परिवारों के लिए दुखदायी है, बल्कि यह भारत और ब्रिटेन के बीच एक कूटनीतिक मुद्दा भी बन गया है। अहमदाबाद सिविल अस्पताल की DNA टेस्टिंग प्रक्रिया, Kenyon International की भूमिका, और परिवहन के दौरान संभावित चूक की जांच जरूरी है। परिवारों का दर्द तब तक कम नहीं होगा, जब तक उन्हें अपने प्रियजनों के सही अवशेष नहीं मिलते।
क्या कहती है ब्रिटिश हाई कमीशन?
भारत में मौजूद ब्रिटिश एंबेसी ने Oneindia से खास बातचीत में कहा कि यह वक्त मृतकों के परिवारों के लिए बेहद तकलीफदेह है और हमारी पूरी संवेदनाएं उनके साथ हैं। ब्रिटिश सरकार के अफसरों की टीम लगातार उन परिवारों की मदद कर रही है, जिनके अपने इस हादसे में मारे गए हैं। हर परिवार को एक अधिकारी (Consular) कर्मचारी सौंपा गया है, ताकि उन्हें जरूरत के मुताबिक हर तरह की मदद मिल सके। जिन परिवारों ने संपर्क अधिकारी की मदद मांगी है, उन्हें वह सुविधा भी दी जा रही है।
शवों की पहचान करना भारतीय अधिकारियों का काम है, लेकिन ब्रिटेन की तरफ से लंदन के एक सीनियर कोरोनर (London Senior Coroner), जो विशेष न्यायिक अधिकारी, भारत और गुजरात सरकार के साथ संपर्क में हैं, ताकि पोस्टमार्टम और बाकी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं में मदद मिल सके।
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