'आत्महत्या करने वालों को नहीं दिया जाता गार्ड ऑफ ऑनर', अग्निवीर अमृतपाल सिंह की मौत पर ARMY ने फिर से दी सफाई
Agniveer Amritpal Singh: पंजाब के अग्निवीर अमृतपाल सिंह की मौत को लेकर भारतीय सेना ने फिर से सफाई दी है। भारतीय सेना ने इस बार साफ-साफ कहा है कि 'अग्निवीर अमृतपाल सिंह की मौत 11 अक्टूबर 2023 को संतरी ड्यूटी के दौरान खुद को गोली मारकर आत्महत्या करने से हुई।' सेना ने 15 अक्टूबर को किए गए ट्वीट में ये भी साफ किया कि...आखिर क्यों अग्निवीर अमृतपाल सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया गया।
भारतीय सेना ने स्पष्ट किया कि अमृतपाल सिंह के अंतिम संस्कार में सैन्य सम्मान (गार्ड ऑफ ऑनर) इसलिए नहीं दिया क्योंकि उनकी मौत आत्महत्या से हुई है। सेना स्वयं को पहुंचाई गई चोटों से होने वाली मौत पर इस तरह का सम्मान नहीं देती।

पुंछ सेक्टर में सेना की जम्मू-कश्मीर राइफल्स यूनिट की एक बटालियन में कार्यरत अमृतपाल सिंह की 11 अक्टूबर 2023 को मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद 13 अक्टूबर को पंजाब के मनसा जिले में उनके पैतृक गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया था।
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सेना ने फिर से दिए सफाई में क्या-क्या कहा?
इंडियन आर्मी ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से 15 अक्टूबर की रात 11 बजकर 05 मिनट पर अग्निवीर अमृतपाल सिंह की मौत को लेकर हो रहे विवाद पर फिर से ट्वीट किया।
सेना ने अपने ट्वीट में लिखा, ''11 अक्टूबर 2023 को अग्निवीर अमृतपाल सिंह की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हुई थी। अग्निवीर अमृतपाल सिंह की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से संबंधित कुछ गलतफहमियां और तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया है। 14 अक्टूबर 2023 को व्हाइट नाइट कॉर्प्स द्वारा दी गई प्रारंभिक जानकारी के अलावा, हम इस मामले को स्पष्ट करने के लिए और भी विवरण साझा कर रहे हैं।''
सेना ने अपने ट्वीट में आगे लिखा, ''यह परिवार और भारतीय सेना के लिए एक गंभीर क्षति है कि अग्निवीर अमृतपाल सिंह ने संतरी ड्यूटी के दौरान खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मौजूदा प्रथा के अनुरूप, चिकित्सीय-कानूनी प्रक्रियाओं के संचालन के बाद, पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए एक एस्कॉर्ट पार्टी के साथ सेना की व्यवस्था के तहत मूल स्थान पर ले जाया गया था।''
सेना ने कहा, ''सशस्त्र बल अग्निपथ योजना के कार्यान्वयन से पहले या बाद में शामिल हुए सैनिकों के बीच हकदार लाभ और प्रोटोकॉल के संबंध में अंतर नहीं करते हैं। आत्महत्या/स्वयं को लगी चोट के कारण होने वाली मृत्यु की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की परवाह किए बिना, सशस्त्र बलों द्वारा परिवार के साथ गहरी और स्थायी सहानुभूति के साथ-साथ उचित सम्मान दिया जाता है। हालांकि, ऐसे मामले प्रचलित 1967 के मौजूदा सेना आदेश के अनुसार सैन्य अंत्येष्टि के हकदार नहीं हैं। इस विषय पर बिना किसी भेदभाव के नियमों का लगातार पालन किया जा रहा है।''
सेना ने आगे कहा, ''उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2001 के बाद से 100 से 140 सैनिकों के बीच औसत वार्षिक क्षति हुई है, जिन्होंने या तो आत्महत्याएं की हैं या स्वयं को लगी चोटों के कारण मौतें हुईं, और ऐसे मामलों में सैन्य अंत्येष्टि की अनुमति नहीं दी गई है। पात्रता के मुताबिक वित्तीय सहायता/राहत के वितरण को उचित प्राथमिकता दी जाती है, जिसमें अंत्येष्टि के संचालन के लिए तत्काल वित्तीय राहत भी शामिल है।''
सेना ने ट्वीट के आखिर में कहा, ''हानि की ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं परिवार और एक बिरादरी के रूप में बलों पर भारी पड़ती हैं। ऐसे समय में, परिवार के सम्मान, गोपनीयता और प्रतिष्ठा को बनाए रखना और दुख की घड़ी में उनके साथ सहानुभूति रखना समाज के लिए महत्वपूर्ण और अनिवार्य है। सशस्त्र बल नीतियों और प्रोटोकॉल के पालन के लिए जाने जाते हैं और पहले की तरह ऐसा करना जारी रखेंगे। भारतीय सेना अपने स्थापित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए समाज के सभी वर्गों से समर्थन का अनुरोध करती है।''
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