बहन के साथ हुई नाइंसाफी ने हार्दिक के ब्रेन में पैदा किया आरक्षण का कीड़ा
अहमदाबाद। आज चारों ओर केवल पटेल नेता हार्दिक के चर्चे है, सोशल मीडिया पर तो उनको लेकर मिले-जुले विचार लोगों ने प्रकट किये हैं, हार्दिक को किसी ने हीरो कहा तो किसी ने कुठिंत मानसिकता का शिकार बताया है।
फिलहाल जो भी हो लेकिन इस बात में किसी को शक नहीं है कि बीते 15 सालों से लोगों के लिए मिसाल बने गुजरात मे इस समय उन्होंने नफरत की चिंगारी पैदा कर दी है।
नफरत की चिंगारी
जिसके चलते आज पूरे 15 साल बाद गुजरात में सेना की जरूरत पड़ी है। हार्दिक पटेल के जिंदगी की पन्नों को पलटते वक्त कुछ ऐसे सच सामने आये हैं जिन्हें सुनकर आप हैरान रह जायेंगे। हार्दिक की स्कूली शिक्षा दिव्यज्योत स्कूल और केबी शाह हायर सैकंडरी स्कूल में हुई है ।
बहन के साथ हुई नाइंसाफी ने हार्दिक को बना दिया पटेल नेता
जहां के टीचरों ने हार्दिक के बारे में बताया कि वो काफी अंतरमुखी स्वभाव का बच्चा था, वो पढ़ाई में तो औसत था लेकिन वो क्रिकेट अच्छी खेलता था। इस बात का प्रमाण अहमदाबाद के सहजानंद कॉलेज में भी मिलता है, यहां के अध्यापकों ने कहा कि हार्दिक के दिल-दिमाग में क्या चल रहा है इसे जान पाना बहुत मुश्किल था।
उसके अंदर बचपन से ही लीडरशीप की आदत थी जिसकी वजह से ही आज वो पाटीदार पटेलों का नेता बन गया है लेकिन एक बात जो बचपन में उसके साथ हुई जिसने उसे राजनीति और हक की लड़ाई के प्रेरित किया वो थी उसके बहन मोनिका के साथ हुई एक नाइंसाफी।
दरअसल 12वीं की कक्षा में 84 प्रतिशत अंक उसकी बहन मोनिका मिले थे लेकिन इसके बावजूद उसे राज्य सरकार की ओर दी जाने छात्रवृत्ति नहीं मिली जबकि मोनिका के क्लास में पढ़ने वाली एक और छात्रा जिसके नंबर मोनिका से कम थे लेकिन वो ओबीसी रैंक से थी इसलिए आरक्षण की वजह से स्कालरशिप उसे मिल गयी।
बहन को आरक्षण के कारण स्कॉलरशिप नहीं मिली
बस इसी बात ने हार्दिक के दिल पर इस हद तक चोट कर गई जिसके बाद से हार्दिक के अंदर आरक्षण की बात बैठ गई जो आज चिंगारी के रूप में विकराल हो चुकी है।













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