मोदी सरकार का प्रस्ताव ठुकराने के बाद, आगे क्या है किसानों का प्लान ?
नई दिल्ली- बुधवार को तीनों कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार के प्रस्तावों को आंदोलनकारी किसानों ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने आंदोलन तेज करने के लिए एकसाथ कई तरह की योजनाओं की घोषणा कर दी है। सरकार के प्रस्तावों को ठुराने की घोषणा करते हुए अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने बयान जारी कर आरोप लगाया है कि सरकार ने पुराने प्रस्तावों को ही नए तरीके से तैयार करके भेजा है। उधर किसान नेता प्रह्लाद सिंह भारुखेड़ा ने कहा है कि सरकार के प्रस्तावों में नया कुछ भी नहीं है, इसलिए तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन और तेज किया जाएगा। सरकार पर दबाव बढ़ाने की नीयत से इसके लिए किसान संगठनों ने कई तरह तरह कए ऐलान कर दिए हैं।

आंदोलन को कई तरह से तेज करने का ऐलान
किसानों ने आंदोलन को नए सिरे से तेज करने के लिए जो घोषणा की है, उसके तहत वे 12 दिसंबर को 'दिल्ली घेराव' की योजना के मद्देनजर दिल्ली-जयपुर और दिल्ली आगरा हाइवे जाम करेंगे। 12 दिसंबर को ही वह देश के सभी टॉल प्लाजा को फ्री कर देंगे यानि उसपर कोई टैक्स नहीं दिया जाएगा। इस दिन किसान सभी टॉल प्लाजा पर धरना भी देंगे। वहीं 14 दिसंबर को किसानों ने देशव्यापी व्यापक विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। इसके तहत देशभर में भाजपा दफ्तरों का घेराव और प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही साथ बीजेपी के सभी सांसदों और विधायकों का विरोध किया जाएगा। किसान संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस दिन दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड के किसान जिला मुख्यालयों में एक दिवसीय धरने पर बैठेंगे। साथ ही दूसरे राज्यों के किसान 14 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे। आंदोलन को बड़ा बनाने के लिए देश के अलग-अलग इलाकों के किसानों को भी बुलाया जाएगा।

दिल्ली के सभी रास्ते बंद करने और दिल्ली कूच करने की भी योजना!
एक और किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा है कि प्रदर्शनकारी किसान आने वाले दिनों में दिल्ली कूच करने की भी घोषणा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि, 'तीनों कृषि कानून वापस नहीं लिए गए तो एक-एक करके दिल्ली की तमाम सडकों को बंद कर दिया जाएगा और किसान सिंघु बॉर्ड पार करके दिल्ली में घुसने का फैसला कर सकते हैं।'

राहुल के बाद किसानों के टारगेट पर भी आए अंबानी-अडाणी
सरकार से मिले प्रस्तावों को ठुकराते हुए संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से एक प्रेस रिलीज जारी किया गया है, जिसके मुताबिक तीनों कृषि कानूनों की वापसी और एमएसपी गारंटी कानून लाए बिना किसान अपना आंदोलन नहीं खत्म करेंगे। इनकी ओर से यह भी घोषणा की गई है कि देश के किसान इसके समर्थन में 'रिलायंस जियो सिम का भी बहिष्कार' करेंगे। किसानों ने बहिष्कार में मुकेश अंबानी ग्रुप के अलावा अडाणी ग्रुप का भी नाम लिया है। किसानों के मुताबिक जिनके पास जियो का सिम है, उसे दूसरे सर्विस प्रोवाइडर में पोर्ट कराया जाएगा। इन दोनों कॉर्पोरेट ग्रुप के हर मॉल, स्टोर और उनकी सेवाओं का इस्तेमाल बंद किया जाएगा। गौरतलब है कि आंदोलनकारी पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी के पुतले फूंक चुके हैं। ये दोनों वही बिजनेसमैन हैं, जिनके नाम पीएम मोदी पर निशाना साधने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की जुबान पर हमेशा रहता है।

क्या था सरकार का प्रस्ताव, जिसे प्रदर्शनकारियों ने ठुकराया?
- सरकार किसानों को लिखित भरोसा देने के लिए तैयार है कि एमएसपी व्यवस्था जारी रहेगी।
- प्राइवेट ट्रेडर्स को नियमित मंडी के बाहर भी कारोबार करने देने के मकसद से राज्यों को रजिस्ट्रेशन करने की इजाजत देने के लिए सरकार कानून में संशोधन करने को तैयार है।
- विवाद के हल के लिए सरकार किसानों को सिविल कोर्ट में जाने का विकल्प देने के लिए कानून में संशोधन करेगी।
- सरकार ने किसानों को भरोसा दिया है कि ठेके पर ली गई जमीन पर किसी भी तरह के निर्माण के लिए कोई लोन नहीं ली जा सकती है और ना ही करार खत्म होने के बाद स्पॉन्सर उस निर्माण पर कब्जा कर सकता है।
- सरकार ने किसानों को लिखित भरोसा दिया है कि किसानों की जमीन को लीज पर देने, गिरवी रखने या बेचने पर पाबंदी रहेगी। स्पॉन्सर के द्वारा जमीन पर मालिकाना हक पाने या उस जमीन पर कोई बदलाव पर भी पाबंदी रहेगी।












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