तो क्या मोदी के खिलाफ जाने के लिए लालू-नीतीश बन जायेंगे दोस्त?
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लेकिन उसके बाद से बिहार के राजनैतिक हलकों से जो खबरें आ रही हैं उसके मुताबिक बिहार में राजनैतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव ने इशारा दिया है कि बीजेपी के खिलाफ एक-जुट होने के चक्कर में जेडीयू-लालू संग दोस्ती कर सकती है। शनिवार शाम को शरद यादव ने कहा है कि वह सेक्युलर गठबंधन की सरकार बनाने के लिए लालू यादव के साथ मतभेद भुलाने को तैयार है, देश को सांप्रदायिक ताकतों से बचाने के लिए वो कुछ भी करने को तैयार हैं।
खुद लोकसभा चुनावों में बुरी तरह से हारने वाले शरद यादव की इस बात में अगर सच्चाई है तो नीतीश कुमार बहुमत के 122 आंकड़े को फिर से छू लेगी। क्योंकि बिहार विधानसभा में जद-यू के 118 विधायक हैं, जबकि भाजपा के 91 विधायक। 22 विधायकों के साथ राजद तीसरे स्थान पर है और कांग्रेस के 4 व 8 अन्य हैं। ऐसे में लालू अगर जेडीयू के साथ आते हैं तो सरकार फिर से बन जायेगी अन्यथा जेडीयू के लिए सरकार बनाना मुश्किल हो जायेगा।
गौरतलब है कि एक दिन पहले शुक्रवार को लोकसभा चुनाव के घोषित नतीजों में राज्य में सत्तासीन जनता दल (युनाइटेड) का प्रदर्शन बेहद शर्मनाक रहा। राज्य की 40 सीटों में से पार्टी को केवल दो सीटों पर ही सफलता मिल पाई और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव भी मधेपुरा से चुनाव हार गए। 2009 के चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन में पार्टी को 20 सीटें मिली थी।
नीतीश कुमार के लिए सबसे शर्मनाक बात यह रही कि लोकसभा चुनाव के साथ ही जिन पांच विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव कराए गए उनमें से उनकी पार्टी को सिर्फ एक सीट पर ही कामयाबी मिली जबकि राजद ने तीन और भाजपा के खाते में एक सीट गई।













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