नीतीश कुमार के बाद कहीं BJP की नजर मुलायम के भाई पर तो नहीं?

बिहार में नीतीश कुमार को अपने साथ लाने और गुजरात में वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वघेला के कांग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद क्या भाजपा अब शिवपाल यादव पर डोरे डाल रही है?

नई दिल्ली। बिहार में नीतीश कुमार को अपने साथ लाने और गुजरात में वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वघेला के कांग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद क्या भाजपा अब शिवपाल यादव पर डोरे डाल रही है? जसवंतनगर से सपा विधायक और मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल सिंह यादव पिछले काफी दिनों से पार्टी में अलग थलग पड़ गए हैं और जल्द की अपनी नई पार्टी खड़ी करने की बात रहे हैं।

नीतीश कुमार के बाद क्या भाजपा अब शिवपाल यादव पर 'डोरे' डाल रही है?

बीतें विधानसभा चुनाव में शिवापल यादव और उनके कुछ करीबी नेताओं की भाजपा के प्रति झुकाव के चलते सपा को अपने गढ़ इटावा और मैनपुरी बेल्ट में नुकसान उठाना पड़ा था। भाजपा 2019 के लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर जरूर जीतना चाहेगी जिसके लिए उसे शिवपाल यादव के मदद की जरूरत पड़ सकती है। बता दें कि सपा के अभी मौजूदा 5 लोकसभा सांसदों में से चार इसी बेल्ट से सांसद हैं।

राजनैतिक विश्लेषक मानते हैं कि भाजपा 2019 के लोकसभा चुनाव शिवपाल यादव के किसी कदम से मिलने वाली बढ़ता का मौका नहीं छोड़ेगी। पीएम मोदी के देशभर में कांग्रेस मुक्त भारत के एजेंडे की जगह भाजपा यूपी में 'सपा-बसपा मुक्त यूपी' के एजेंडे को आगे बढ़ा सकती है। भाजपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य कई मौकों पर ऐसे नारे दें भी चुके हैं।

विश्लेषक मानते हैं कि सपा के गढ़ में सेंध लगाने के लिए भाजपा के पास सुनहरा मौका है। यदि शिवपाल सपा छोड़ते हैं तो इस बात की संभावना अधिक है कि भाजपा लोकसभा चुनाव में शिवपाल यादव और उनके बेटे आदित्य यादव का इटावा और मैनपुरी से टिकट दे सकती है। या शिवपाल की पार्टी बनाने की दशा में उस पार्टी को अपना समर्थन दे सकती है।

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