भारत में कहर बरपाने वाला डेल्टा वेरिएंट कैसे दुनिया के लिए बन रहा खतरा? समझिए विस्तार से
नई दिल्ली, 25 जून। भारत में दो महीने तक कहर बरपाने वाला कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएंट अब दुनिया के दूसरे देशों में तेजी से अपने पैर पसार रहा है। सबसे पहले भारत में पहचाना गया डेल्टा वेरिएंट अब ब्रिटेन, इजरायल, रूस और आस्ट्रेलिया जैसे देशों में ताजा फैलाव की वजह बन रहा है। कोरोना के दूसरे वेरिएंट के मुकाबले अधिक संक्रामक पाए गए डेल्टा वेरिएंट को साल 2020 के आखिर में भारत में पहचाना गया था।

यूरोप पर छाया डेल्टा वेरिएंट का खतरा
अधिकांश अमीर देशों में जहां वैक्सीनेशन के चलते कोरोना वायरस के संक्रमण में कमी आई थी अब एक बार फिर डेल्टा वेरिएंट ने एक नई लहर आने का डर पैदा कर दिया है। ब्रिटेन इसका नया केंद्र बन सकता है जहां पर भारत के बाद सबसे ज्यादा डेल्टा वेरिएंट के मामले सामने आए हैं।
पिछले सप्ताह ब्रिटेन में कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट के 35,204 नए मामले सामने आए थे। इसके साथ ही शुक्रवार तक ब्रिटेन में अब तक डेल्टा वेरिएंट के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 1,11,157 हो गई है।
ब्रिटेन के साथ ही यूरोप के दूसरे देशों में भी डेल्टा वेरिएंट तेझी से फैल रहा है। जर्मनी में डेल्टा वेरिएंट से होने वाले कोविड संक्रमण की हिस्सेदारी एक सप्ताह में दोगुनी हो गई है।
जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने गुरुवार को चेतावनी दी कि यूरोप कोरोनोवायरस के खिलाफ अपनी लड़ाई में फिर से कगार पर है क्योंकि डेल्टा वेरिएंट अब तक संक्रमण की कम हुई गति को फिर से बढ़ा सकता है।
रूस भी बढ़ते डेल्टा मामलों से जूझ रहा है। गुरुवार को रूस में 20 हजार से अधिक मामले रिपोर्ट किए गए हैं जो जनवरी के बाद देश में सबसे बड़ी संख्या है। नए मामलों के पीछे बड़े पैमाने पर डेल्टा संस्करण जिम्मेदार है। राजधानी मॉस्कों में लगभग 90 प्रतिशत नए मामलों के लिए जिम्मेदार है।
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यूरोप में 90 प्रतिशत मामलों की बन सकता है वजह
ऐसे में जब कई देश कोविड प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर रहे हैं डेल्टा वेरिएंट ने पूरे यूरोप को चिंता में डाल दिया है।
यूरोपीय संघ की रोग नियंत्रण एजेंसी ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि डेल्टा संस्करण आने वाले महीनों में 90 प्रतिशत नए कोविड मामलों का कारण बन सकता है।
यूरोप के रोग नियंत्रण केंद्र (ईसीडीसी) ने आशंका जताई है कि डेल्टा वेरिएंट गर्मियों में यूरोप में कहर बरपा सकता है। विशेष रूप से युवाओं के बीच जिन्हें अभी तक टीकाकरण के लिए लक्षित नहीं किया गया है।
ईसीडीसी के मुताबिक अगस्त के अंत तक यह यूरोपीय संघ में 90 प्रतिशत नए मामले डेल्टा वेरिएंट की वजह से होंगे।

ऑस्ट्रेलिया, इजरायल में प्रतिबंधों की वापसी
लेकिन सिर्फ यूरोप ही नहीं है जो डेल्टा वेरिएंट से जूझ रहे हैं। आस्ट्रेलिया और इजरायल जो कोविड-19 को नियंत्रण करने में काफी हद तक सफल रहे थे, एक बार फिर से प्रतिबंधों की तरफ बढ़ रहे हैं। आस्ट्रेलिया के सबसे बड़े शहर सिडनी में लॉकडाउन लगाया है। सिडनी में पिछले सप्ताह 20 मामले सामने आए थे जो इस सप्ताह बढ़कर 64 हो गए।
अपनी आधी से अधिक आबादी को टीका लगाकर सुरक्षित महसूस कर रहे इजरायल में भी डेल्टा वेरिएंट के चलते खतरा लौट आया है। इजरायल ने एक बार फिर से मास्क को वापस अपना लिया है।
टीकाकरण की सफलता की कहानी इज़राइल, जिसने अपनी आधी से अधिक आबादी को अच्छी तरह से टीका लगाया है, ने उपाय को हटाने के दो सप्ताह से भी कम समय में इनडोर मास्क पहने हुए फिर से लगाया।
हाल ही में इजरायल ने मास्क की अनिवार्यता को खत्म किया था लेकिन एक दिन में 100 से अधिक नए मामले मिलने के बाद इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले चार दिनों के निर्णय को पलट दिया। गुरुवार को यहां पर 227 नए मामले दर्ज किए गए। जो इस महीने की शुरुआत के मुकाबले छह गुना ज्यादा है।
अफ्रीका खतरे के कगार पर
अफ्रीकी देश अब तक महामारी के बुरे कहर से बचे हुए थे लेकिन अब वहां भी कम से कम 12 देशों में संक्रमण खतरनाक दर से बढ़ रहा है। कई देशों में डेल्टा वेरिएंट फिर से फैलाव की वजह बन रहा है। अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) के निदेशक जॉन नेकेंगसॉन्ग ने महाद्वीप में आने वाली तीसरी लहर को "बेहद क्रूर" और "बहुत विनाशकारी" बताया है।

अलर्ट पर अमेरिका
अमेरिका में बड़े पैमाने पर टीकाकरण के चलते कोविड संक्रमण की स्थिति काफी नियंत्रण में आई थी। पिछले दिनों ही राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मास्क हटाकर इसे दिखाया भी था। लेकिन ब्रिटेन में बदलती स्थिति और डेल्टा मामलों में हालिया उछाल ने अमेरिका को चौकन्ना कर दिया है।
व्हाइट हाउस के मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ एंथनी फाउची ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि डेल्टा वेरिएंट कोविड -19 महामारी को मिटाने के अमेरिका के प्रयास के लिए "सबसे बड़ा खतरा" है।
अब तक डेल्टा वेरिएंट के बारे में क्या जानते हैं?
कोरोना वायरस का यह वेरिएंट सबसे पहली बार भारत में पहचाना गया था और अब तक यह 80 से अधिक देशों में पाया जा चुका है। इसे पहले बी.167.1.2 नाम से भी जाना जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे 10 मई को चिंताजनक वेरिएंट के रूप में वर्गीकृत किया। बाद में यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन और भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इसे वेरिएंट ऑफ कंसर्न के रूप में सूचीबद्ध किया है।












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