निर्भया रेप कांड के बाद दिल वालों की दिल्ली नहीं आती रास

16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप कांड ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था और इस हादसे के बाद दिल्ली आने वाले विदेशी टूरिस्टों की संख्या में 30 प्रतिशत तक की गिरावट हो गई है।
इस घटना का असर आज तक भारत और राजधानी दिल्ली पर नजर आ रहा है। खासबात है कि दिल्ली में जब वर्ष 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजित हुए थे तो टूरिज्म और टूरिस्ट्स की संख्या में खासा इजाफा देखा गया था।
टिकटों की संख्या से पता चली हकीकत
दिल्ली के पर्यटन उद्योग में आनी वाली इस गिरावट के बारे में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया यानी एएसआई को सबसे पहले मालूम चला। एएसआई ने जब कुतुबमीनार, लाल किले और हुंमायूं का मकबरा जैसे एतिहासिक जगहों पर जाने वाले विदेशी टूरिस्टों की ओर से खरीदे गए टिकटों के बारे में जानकारी ली तो उसे मालूम चला कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इन एतिहासिक जगहों पर टूरिस्ट्स कम पहुंच रहे हैं।
साफ है कि वर्ष 2010 के कॉमनवेल्थ खेलों के बाद जिन विदेशी पर्यटकों ने दिल्ली और यहां पर मौजूद विरासतों की ओर रुख किया था, अब उन्हें ही दिल्ली रास नही आ रही है।
तो खत्म हो सकता है टूरिज्म
साल 2012 को निर्भया कांड एक रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा बन गया। इस कांड के अलावा भी आए दिन दिल्ली में रेप और इसके जैसे दूसरे अपराधों की तादाद में इजाफा होता जा रहा है।
पयर्टन उद्योग को जानने वाले और इस पर करीब से नजर रखने वाले लोगों की मानें तो अगर दिल्ली की हालत में सुधार नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब दिल्ली से पर्यटन पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।
कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाना होगा ताकि यहां पर आने वाले पर्यटक बेझिझक 'दिलवालों की दिल्ली' का लुत्फ उठा सकें और वह भी बिना किसी डर के।












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