तीन राज्यों में करारी हार के बाद ओडिशा में कांग्रेस की तुलसी यात्रा को लेकर पार्टी के अंदर शुरू हुआ मतभेद
कांग्रेस पार्टी भाजपा से मुकाबला करने के लिए सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड खेलने के बावजूद उसे उत्तर भारत के तीन राज्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बुरी हार का सामना करना है। ओडिशा में धार्मिक भावनाओं को भड़काने की समान कोशिश करते हुए कांग्रेस ने तुलसी यात्रा शुरू की थी लेकिन अब तीन राज्यों में मिली करारी हार के बाद इस तुलसी यात्रा को लेकर कांग्रेसियों के बीच वैचारिक मतभेद हो गया है।

कांग्रेस की धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कांग्रेस की एक समान कोशिश को लेकर पार्टी के शक्तिशाली नेताओं के वर्ग ने इस पर संदेह व्यक्त किया है। ओडिशा में कई कांग्रेसियों ने कथित तौर पर जगन्नाथ मंदिर मुद्दे को पार्टी के अभियान से पूरी तरह हटा दिए जाने की मांग की है क्योंकि उनका मानना है कि यह उनके लिए फायदेमंद नहीं होगा।
ये सवाल उठ रहा है कि ओडिशा में धार्मिक मुद्दें उठाकर क्या कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता की अपनी मूल विचारधारा से समझौता करके लोगों का विश्वास हासिल कर सकती है।
बता दें कांग्रेस का तुलसी यात्रा एक राज्यव्यापी कार्यक्रम है, इसके अंतर्गत पार्टी के नेताओं ने तुलसी के पत्ते एकत्र किए और मंदिर के सभी चार द्वार खोलने की मांग करते हुए इसे पुरी के भगवान जगन्नाथ मंदिर में जमा किया।
कांग्रेस पार्टी के कई लोग इस प्रकार की चालों को संगठन में अंतर्निहित कमजोरियों को छिपाने के साधन के रूप में देखते हैं वहीं दूसरों का मानना है कि इस प्रकार की यात्रा से बीजद और भाजपा के चुनावी संभावनाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ सकता है क्योंकि उन्होंने वर्षों से इसमें महारत हासिल कर ली है। जबकि बीजद सरकार ने श्रीमंदिर परिक्रमा और बड़े पैमाने पर मंदिर नवीकरण परियोजनाओं के माध्यम से एक धार्मिक एजेंडे को आक्रामक रूप से आगे बढ़ाया है, भाजपा हिंदू रुख का पर्याय बन गई है।












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