क्या है 'अफ्रीकी स्वाइन फीवर' जिसके चलते त्रिपुरा में मारकर दफनाए जाएंगे बड़ी संख्या में सुअर
मिजोरम, 19 अप्रैल। मिजोरम के बाद अब त्रिपुरा में भी अफ्रीकन स्वाइन फीवर का मामला सामने आया है। यह मामला त्रिपुरा के पशु संशाधन विकास विभाग द्वारा संचालित सरकारी प्रजनन फार्म सेपाहिजिला में मिला है। अफ्रीकन स्वाइन फीवर का मामला सामने आने के बाद एक्सपर्ट की टीम अगरतला से जांच के लिए पहुंची है। पशु संसाधन विभाग की ओर से संचालित रोग जांच प्रयोगशाला के अधिकारी ने बताया कि 7 अप्रैल को तीन सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। 13 अप्रैल को पीसीआई रिपोर्ट सामने आई, जिसमे इस बात की पुष्टि हुई थी कि सभी सैंपल पॉजिटिव हैं। शेल्टर में सुअरों के लक्षण भी इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि उनके भीतर पहले ही यह बीमारी पहुंच चुकी है। एक अन्य रिपोर्ट भी जल्द ही भोपाल नेशनल डिसिज डाइग्नोस्टिक इंस्टिट्यूट की ओर से आने वाली है।

8 फीट गहरी कब्र खोदी जा रही
शुरुआती तौर पर फार्म में काम करने वालों से कहा गया है कि वह इस बीमारी को अपने स्तर पर निपटाएं। इस बीमारी से निपटने के लिए नोडल टीम का गठन किया गया है जिसमे एआरडीडी के डिसिज इंन्वेस्टिगेशन लैब के डॉक्टर मृणाल दत्ता और बिशालगढ़ के एसडीएम शामिल हैं। उन्होंने बताया कि हमने दो टास्क फोर्स का गठन किया है, दोनों में 10-10 सदस्य हैं। टीम की अगुवाई वेटनरी अधिकारी करेंगे और वह सीधे नोडल अधिकारी को रिपोर्ट देंगे। पहले फेज में 8 फीट गहरी और 8 फीट चौड़ा गड्ढा खोदा जाएगा, जिसमे बड़ी संख्या में सुअरों को दफनाया जाएगा।

दर्जनों सुअरों को मारा जाएगा
शुरुआत में फॉर्म में एक किलोमीटर के दायरे में रहने वाले सुअरों को मारकर दफनाया जाएगा, जिससे कि बीमारी को फैलने से रोका जा सके। सूत्र ने बताया कि हम कोशिश कर रहे हैं कि फॉर्म के भीतर ही हम इस बीमारी को रोक लें ताकि यह संक्रमण पूरे राज्य में ना फैलने पाए। लैब के अधिकारी केंद्र सरकार को इस बाबत अनुमति के लिए पत्र लिखेंगे। सभी प्रक्रियाएं तभी शुरू होंगी जबक राज्य सरकार की ओर से हमारे पास अनुमति पत्र पहुंचेगा। रिपोर्ट के अनुसार 63 सुअर अज्ञात बीमारी की वजह से मर गए थे, जिसके बाद लोग अलर्ट हो गए थे। इस बीमारी के आने से पहले यहां 265 सुअर थे, जबकि 185 सुअर के बच्चे इस फॉर्म में थे।

क्या है स्वाइन फ्लू
बता दें कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर सुअरों में पाई जाने वाली संक्रामक बीमारी है, यह काफी तेजी से सुअरों में फैलती है। यह बीमारी जब अपने चरम पर होती है तो मृत्यु दर काफी अधिक होती है। स्वाइन फ्लू और अफ्रीकन स्वाइन फ्लू दोनों अलग बीमारी हैं। राहत की बात यह है कि अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का इंसानों पर असर नहीं होता है और उनका स्वास्थ्य इससे प्रभावित नहीं होता है लेकिन सुअरों में यह काफी तेजी से फैलता है और बड़ी संख्या में सुअरों की मौत हो जाती है।
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