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जम्मू के अखबारों में रोहिंग्या मुस्लिमों को बताया टाइम बम, राज्य से भगाने की अपील

By Rahul Sankrityayan
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    श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर में बीते दिनों सुंजवान में हुए आतंकी हमले के बाद अब राज्य में मौजूद रोहिंग्याओं और बंग्लादेशी शरणार्थियों के खिलाफ मुहिम छेड़ी गई है। इस मुहिम में लोगों से अपील की जा रही है कि जम्मू को बचाने के लिए रोहिंग्याओं को इलाके से निकालें। गौरतलब है कि करीब एक साल पहले जम्मू चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने धमकी दी थी कि अगर उन्हें एक माह के भीतर डिपोर्ट नहीं किया गया तो वो रोहिंग्या मुस्लिमों और बंग्लादेशी राष्ट्रीयता के लोगों को पहचान कर मार देंगे। अब रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ जो अपील की जा रही है उसमें स्थानीय अखबारों में विज्ञापन का सहारा लिया जा रहा है। कई संस्थाओं ने स्थानीय अखबार में विज्ञापन दे रहे हैं जिसमें कहा जा रहा है कि जम्मू को बचाने के लिए रोहिंग्याओं को यहां से निकालें। सभी विज्ञापन जम्मू के अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र Early Times में प्रकाशित कराए गए हैं। 

    'रोहिंग्या एक टाइम बम हैं'

    'रोहिंग्या एक टाइम बम हैं'

    अखबार में 27 फरवरी से 4 मार्च के बीच में यह विज्ञापन प्रकाशित कराए गए हैं। 27 फरवरी को प्रकाशित कराए गए विज्ञापन में कहा गया है कि 'रोहिंग्या एक टाइम बम हैं, जम्मू को बचाने के लिए इन्हें यहां से निकालें।' इसके अगले दिन यानी 28 फरवरी को जारी किए गए विज्ञापन में कहा गया है कि 'अमन पसंद जम्मूवासियों पर रोहिंग्याओं का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। सभी एक हो कर जम्मू को बचाएं।'

    'सभी एकजुट हो जाएं'

    'सभी एकजुट हो जाएं'

    इसी मसले पर 1 मार्च को प्रकाशित कराए गए विज्ञापन में सिटिजन एडवाइजरी फोरम, आईसी जिंदल की फोटो के साथ लिखा है- 'जम्मू पर रोहिंग्याओं को खतरा है। आइए जम्मू को बचाएं।' 2 मार्च को प्रकाशित कराए गए विज्ञापन में जम्मू चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव गौरव गुप्ता की तस्वीर के साथ लिखा गया है कि- ' जम्मूवासियों पर रोहिंग्याओं का खतरा है। आइए इसे बचाएं। ' वहीं 4 मार्च को प्रकाशित कराए गए विज्ञापन में टीम जम्मू के चेयरमैन जोरावर सिंह की तस्वीर के साथ लिखा गया है कि- 'जम्मू को बचाने के लिए सभी एकजुट हो जाएं।'

    सुंजवान हमले के बाद रोहिंग्‍या मुसलमानों का मसला गर्म

    सुंजवान हमले के बाद रोहिंग्‍या मुसलमानों का मसला गर्म

    गौरतलब है कि सुंजवान हमले के बाद से ही जम्‍मू में बसे रोहिंग्‍या मुसलमानों का मसला एक बार फिर से गर्म हो गया है। जिस जगह पर हमला हुआ था उससे कुछ ही दूर पर रोहिंग्‍या मुसलमान बसे हुए हैं। जम्‍मू कश्‍मीर विधानसभा के स्‍पीकर कवीन्द्र गुप्ता ने कहा था कि इस हमले में रोहिंग्या शरणार्थियों का प्रयोग होना भी संभव है।

    जम्‍मू में करीब 10,000 रोहिंग्‍या मुसलमान

    जम्‍मू में करीब 10,000 रोहिंग्‍या मुसलमान

    कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक जम्‍मू में करीब 10,000 रोहिंग्‍या मुसलमान हैं। केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष ऐलान किया था कि सरकार जम्‍मू में बसे रोहिंग्‍या मुसलमानों की पहचान करने और उनका पता लगाने की योजना बना रही है। सरकार के शीर्ष अधिकारियों की ओर से कहा गया था कि अगर संभव होगा तो सरकार गैर-कानूनी तरीके से जम्‍मू में बसे रोहिंग्‍या मुसलमानों को म्‍यांमार वापस भेज देगी।

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    English summary
    Advertisements against rohingya muslims who stayed in jammu

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