ISRO News: क्यों चंद्रयान-3 से ज्यादा मुश्किल है आदित्य एल1 मिशन? आसान भाषा में समझिए
हाल ही में इसरो ने चांद पर एक नया कीर्तिमान रचा, जहां चंद्रयान-3 का लैंडर विक्रम वहां के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा। इस कामयाबी के बाद इसरो की नजर सूर्य पर है, जिसके लिए कल यानी 2 सितंबर को आदित्य एल1 मिशन लॉन्च किया जाएगा। हालांकि ये मिशन चंद्रयान-3 से ज्यादा कठिन होगा।
दूरी है ज्यादा
चंद्रयान और आदित्य मिशन की तुलना की जाए, तो सबसे पहले दूरी की चुनौती आएगी। पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी 384,400 किमी है, जबकि आदित्य एल1 जिस जगह पर स्थापित होगा, वो 15 लाख किमी है। इतनी दूरी तय करने में ज्यादा वक्त और ज्यादा ईंधन लगेगा।

तापमान बनेगा चुनौती
चंद्रमा के तापमान के बारे में काफी कुछ वैज्ञानिकों को पता है, लेकिन खुले अंतरिक्ष के तापमान पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता। ऐसे में लैग्रेंज पॉइंट का तापमान भी यान की चुनौती बढ़ा सकता है।
सूर्य पर पहला मिशन
चांद पर इस साल इसरो का तीसरा मिशन था। जिसमें पहला कामयाब रहा, जबकि दूसरा आखिरी स्टेज में फेल हो गया, लेकिन दोनों मिशन के अनुभव का फायदा चंद्रयान-3 में मिला। वहीं आदित्य एल1 सूर्य की ओर जाने वाला भारत का पहला यान है। ऐसे में ये वैज्ञानिकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहेगा।
सौर तूफान का खतरा
सूर्य पर लगातार विस्फोट होते रहते हैं, जिससे सौर तूफान उठते हैं। उनका असर अंतरिक्ष यान, सैटेलाइट आदि पर पड़ता है। आदित्य एल1 सूर्य की ओर जा रहा, ऐसे में सौर तूफान का खतरा बना रहेगा।
लैग्रेंज पॉइंट में स्थापित होगा यान
पृथ्वी से सूर्य की दूरी 15 करोड़ किमी के आसपास है, लेकिन ये यान सिर्फ पृथ्वी से 15 लाख किमी दूर जाएगा। वहां पर लैग्रेंज पॉइंट में स्थापित किया जाएगा। इस जगह से ही वो सूर्य का अध्ययन करेगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक पहली बार इसरो लैग्रेंज पॉइंट में यान को स्थापित करने जा रहा है।












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