Adani Group: AWL का 7% स्टेक भी बेचा, कंपनी से अडाणी ग्रुप का कम्पलीट एग्जिट
Adani Group: भारत के कॉरपोरेट जगत में एक बड़ा मोड़ तब देखने को मिला जब अडाणी ग्रुप ने Adani Wilmar से अपनी आखिरी हिस्सेदारी भी बेच दी। सालों से साथ खड़ी यह जॉइंट वेंचर कंपनी अब पूरी तरह एक नए दौर में प्रवेश कर रही है-जहां नियंत्रण सिर्फ एक वैश्विक दिग्गज, Wilmar International, के हाथ में रहेगा। हैरानी की बात यह है कि जब हिस्सेदारी बाजार में रखी गई, तो घरेलू और विदेशी निवेशकों की इतनी मजबूत मांग देखने को मिली कि पूरा ब्लॉक चंद मिनटों में उठ गया। बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनियों से लेकर एशियाई बाज़ारों के प्रमुख निवेशक तक, सभी इस स्टॉक के नए अध्याय में हिस्सेदारी लेने के लिए उत्साहित नजर आए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अडाणी ग्रुप के बाहर होने से कंपनी की ओनरशिप स्ट्रक्चर अब ज्यादा साफ, स्थिर और पारदर्शी हो गया है-जिससे Adani Wilmar, यानी अब AWL Agri Business, एक मजबूत MNC-कंट्रोल्ड फूड कंपनी के रूप में अपनी नई पहचान बना सकती है। सिंगापुर, यूएई और अन्य एशियाई बाज़ारों के कई इंटरनेशनल इंवेस्टर्स ने भी इस क्लीन-आउट ब्लॉक में निवेश किया। बाज़ार के जानकारों के अनुसार, GIC जैसे लंबे समय से जुड़े संस्थागत निवेशक आगे और हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं।

अडाणी का पूरा एग्जिट, विलमार बना एकमात्र प्रमोटर
इससे पहले भी अडाणी ग्रुप ने 13% हिस्सेदारी बेची थी। अब 20 नवंबर को 275 रुपये प्रति शेयर की दर से हुई इस अंतिम डील के बाद अडाणी एंटरप्राइजेज ने अपनी 44% हिस्सेदारी पूरी तरह बेच दी है। कुल मिलाकर कंपनी को 15,707 करोड़ रुपये का मूल्य मिला है। अब सिंगापुर की Wilmar International लगभग 57% हिस्सेदारी के साथ कंपनी की एकमात्र प्रमोटर बन गई है। इससे AWL एक साफ-सुथरे मल्टीनेशनल स्वामित्व वाली कंपनी के रूप में उभर रही है।
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"Fortune" ब्रांड और फूड बिज़नेस पर कंपनी की पकड़ मजबूत
AWL भारत के सबसे बड़े कुकिंग ऑयल ब्रांड "फॉर्च्यून" का संचालन करती है। इसके अलावा कंपनी आटा, चावल, दालें और रेडी-टू-कुक प्रोडक्ट्स जैसे कई फूड कैटेगरी में काम करती है। विश्लेषकों का मानना है कि Wilmar का ग्लोबल नेटवर्क और AWL का मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क कंपनी की बुनियादी स्थिति को मजबूत बनाए रखेगा।
शेयर भाव दबाव में, लेकिन आगे उम्मीदें बढ़ीं
लंबे समय से चल रहे स्टेक सेल और कमोडिटी उतार-चढ़ाव के कारण शेयर अभी भी 2022 के IPO के समय के निचले स्तरों के पास ट्रेड कर रहा है।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि:
- अडाणी से जुड़ी अनिश्चितता खत्म हो गई है
- एक ही मजबूत MNC प्रमोटर का नियंत्रण आ गया है
- संस्थागत निवेशकों का दायरा बड़ा हुआ है
इन फैक्टर्स से स्टॉक में तकनीकी रिकवरी और वैल्यूएशन में सुधार देखने को मिल सकता है।
AWL का नया अध्याय
अडाणी ग्रुप के पूरी तरह निकल जाने के बाद अब AWL एक MNC-कंट्रोल्ड फूड और स्टेपल्स कंपनी के रूप में नई शुरुआत कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में ग्लोबल कैपिटल फ्लो इसका निवेशक प्रोफाइल और मजबूत करेंगे।
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