CAA पर बोले अभिजीत बनर्जी, क्यों नहीं करते अहमदिया और रोहिंग्या की मदद

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून पर देश के हर कोने में चर्चा हो रही है। लोग दो पक्षों में बंट चुके हैं। एक पक्ष इस कानून के पश्र में है तो दूसरा पक्ष इसके विरोध में। CAA को लेकरनोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी ने भी अपनी राय रखी और केंद्र सरकार से सवाल पूछा। अभिजीत बनर्जी ने कहा है कि भारत में उत्पीड़ित लोगों के प्रति उदारता दिखाने का एक लंबा इतिहास रहा है, लेकिन इसे एक समुदाय के खिलाफ नहीं होना चाहिए।

Nobel Laureate Abhijit Banerjee on CAA React on CAA said that Why Not Help Ahmadis & Rohingya Too as Per Hindu Tradition

उन्होंने कहा कि नये कानून के मुताबिक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग जो पाकिस्तान , बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 तक आए हैं उन्हें भारतीय की नागरिकता दी जाएगी। इस कानून में मुस्लिमों को बाहर रखा गया है और कथित तौर पर NRC और NPR लागू किए जाने से पूरे भारत में जबरदस्त प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार के सवाल करते हुए कहा कि मुस्लिमों को इस कानून के तहत नागरिकता देने से बाहर रखा गया है। ये लोग ज्यादातर गरीब हैं और बुरी तरह शिक्षित लोग हैं। ये लोग अल्पसंख्यक है। अभिजीत बनर्जी ने कहा कि मैं यह नहीं देख पाता कि हमें उनके प्रति उदार क्यों नहीं होना चाहिए। मैं इन सिद्धांतों को नहीं समझ पाता कि क्यों अमीर और पढ़े-लिखे लोगों की बहुसंख्या को उनके प्रति उदार नहीं होना चाहिए।

वहीं उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास रहा है बाहरियों के प्रति उदारता दिखाने का, लेकिन किसी एक धर्म विशेष के खिलाफ इसे रखना मेरी समझ से बाहर है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की तरह, भारत में अल्पसंख्यक कहीं से भी हावी होने की स्थिति में नहीं हैं, ऐसे में जो लोग ये सोचते हैं कि भारत पर मुस्लिमों का कब्जा हो जाएगा वो आधारहीन है। उन्होंने कहा कि हिंदू परंपरा हमें सबका स्वागत करना सिखाती है। उन्होंने कहा कि अगर ये कानून गैर मुस्लिमों को नागरिकता देने के लिए हैं भारतीय मुस्लिमों का नागरिकता छीनने के लिए नहीं तो फिर सरकार अहमदिया, शिया और रोहिंग्या की मदद क्यों नहीं करती।

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