IAS बनने का सपना लेकर दिल्ली आया था 'आप' का ये विधायक, लगातार तीसरी बार बना MLA

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होते ही जहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में गम पसरा पड़ा है वहीं, दूसरी ओर आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ता अभी भी जश्न मना रहे हैं। इस के चुनाव में चर्चित सीटों में से एक मॉडल टाउन विधानसभा की सीट पर लोगों की खास नजर थी। आप के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाने वाले भाजपा उम्मीदवार कपिल मिश्रा को यहां से बड़ी हार मिली है। आइए जानते हैं कपिल मिश्रा को हराने वाले आप विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी के बारे में ।

उत्तर प्रदेश के निवासी हैं अखिलेश पति त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश के निवासी हैं अखिलेश पति त्रिपाठी

मंगलवार को चुनाव के नतीजों की खुशी सिर्फ दिल्ली में ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के संतकबीर नगर जिले में भी देखी गई। इसकी वजह थी दिल्ली के मॉडल टाउन सीट पर आप उम्मीदवार अखिलेश पति त्रिपाठी की बड़ी जीत। दरअसल, अखिलेश पति त्रिपाठी संतकबीर नगर जिले में मेंहदावल के निवासी हैं, बेटे के विधायकी जितते ही परिवार सहित पूरे जिले के लोग खुशी से झूम उठे। अखिलेश पति त्रिपाठी दिल्ली में आईएएस की तैयारी के लिए आए थे और यहीं के होके रह गए।

2007 में आईएएस का सपना लेकर आए थे दिल्ली

2007 में आईएएस का सपना लेकर आए थे दिल्ली

अखिलेश पति त्रिपाठी ने साल 1998 में अपनी हाईस्कूल की परीक्षा पास की और वर्ष 2000 में उन्होंने डीएवी इंटर कॉलेज से पहली श्रेणी में इंटरनीडिएट की परीक्षा पास की। इसके बाद अखिलेश इलाहाबाद (प्रयागराज) चले गए और साल 2003 में उन्होंने स्नातक व 2005 में इतिहास विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इलाहाबाद में ही रहकर उन्होंन सिविल सर्विसेज की तैयारी करने शुरू कर दी और 2007 में आईएएस का सपना लिए दिल्ली आ गए।

अन्ना हजारे के आंदोलन से हुए प्रभावित

अन्ना हजारे के आंदोलन से हुए प्रभावित

दिल्ली में रहते हुए अखिलेश पति त्रिपाठी पढ़ाई की और बाद में अन्ना हजारे के आंदोलन से प्रभावित होकर उनके साथ आंदोलन में जुड़ गए। इसी दौरान वह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ जुड़ गए और बाद में आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली। 'आप' ने अखिलेश को पहली बार दिल्ली के मॉडल टाउन विधानसभा से टिकट दिया जहां से उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की। अखिलेश पति त्रिपाठी ने इसी सीट से 2020 के चुनाव में जीत की हैट्रिक भी लगाई है। वह सबसे पहले साल 2013, फिर 2015 और अब 2020 के विधानसभा में विधायक बने हैं।

यह भी पढ़ें: दिल्ली चुनाव नतीजे : क्या बीजेपी के खिलाफ़ मुसलमान एकजुट हो गए?

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