2024 में BJP से ज्यादा विपक्ष के लिए चुनौती बन सकती है AAP
आम आदमी पार्टी ने एमसीडी का चुनाव जीतने के बाद जो रुख अख्तियार किया है, उससे 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से ज्यादा वह विपक्षी एकता के लिए चुनौती बन सकती है। पार्टी ने कहा है कि बीजेपी को तो सिर्फ वही हरा सकती है।

गुजरात चुनाव में आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के सारे दावे भले ही फेल हो चुके हों या फिर एमसीडी में भी उसे अपनी उम्मीदों या कयासों के हिसाब से कामयाबी नहीं मिल पाई हो, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर उसके मंसूबे कम नहीं हुए हैं। दिल्ली और पंजाब में सत्ताधारी पार्टी ने अभी से कहना शुरू कर दिया है कि ना तो वह किसी चुनावी गठबंधन के चक्कर में पड़ने वाली है और ना ही उसके अलावा किसी भी दल या गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी को हराने का माद्दा है। उसके मुताबिक यह काम कर सकती है तो सिर्फ और सिर्फ अरविंद केरीवाल की आम आदमी पार्टी ही कर सकती है। पार्टी की यह रणनीति अगले लोकसभा चुनावों में भाजपा से बड़ी विपक्ष के लिए चुनौती बनती दिख रही है।

बीजेपी को तो हम ही हरा सकते हैं- संदीप पाठक
दिल्ली एमसीडी से बीजेपी को बेदखल करने और गुजरात में 5 विधायकों से खाता खोलने के बाद आम आदमी पार्टी आगे की चुनावी राजनीति को लेकर जो कुछ संकेत दे रही है, उससे भारतीय जनता पार्टी से ज्यादा विपक्ष को सोचने की आवश्यकता है। पार्टी के नए राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) डॉक्टर संदीप पाठक ने कहा कि है की उनकी पार्टी का लक्ष्य और उसे हासिल करने का रोडमैप अभी से स्पष्ट है और सिर्फ उन्हीं की पार्टी बीजेपी को हरा सकती है। 2024 के लोकसभा चुनाव और उससे पहले करीब आधा दर्जन राज्यों की विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी ने संदीप पाठक को 11 सदस्यीय पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी का पर्मानेंट इंवायटी बनाया है।

'कन्याकुमारी में लोग केजरीवाल को जानते हैं'
आम आदमी पार्टी के नए राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद का कहना है, 'हम अब एक राष्ट्रीय पार्टी बन चुके हैं। मेरा काम पार्टी को हर गांव, हर शहर और हर मोहल्ले तक पहुंचाना है। लोग केजरीवाल जी और उनकी राजनीति को प्यार करते हैं और पहचानते हैं। यहां तक कि कन्याकुमारी में भी जहां हमने कोई चुनाव नहीं लड़ा है, लोग उन्हें जानते हैं, जिससे मेरा काम आसान है। मुझे सिर्फ इस एनर्जी को चैनलाइज करना है।' पाठक पंजाब में आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत में निर्णायक भूमिका निभा चुके हैं और गुजरात में भी विधानसभा चुनाव के लिए अप्रैल से ही डेरा डाले हुए थे।

पीएम मोदी की लोकप्रियता से टक्कर नहीं लेगी AAP ?
आगे पाठक जो पार्टी की ओर से अपनाए जाने वाला रास्ता बता रहे हैं, उससे लगता है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को सीधी चुनौती देने के बजाए, दूसरे रास्ते पर चलने की तैयारी कर रही है। क्योंकि, केजरीवाल की पार्टी के नेता का कहना है, 'हम नहीं कहते कि केजरीवाल इस या उस नेता के विकल्प हैं। लोग ऐसा कहते हैं, क्योंकि वे उनकी सकारात्मक राजनीति की सराहना करते हैं।' इसके साथ ही उनका यह भी कहना है कि 'हालांकि, बीजेपी को तो हम ही हरा सकते हैं। हमने एमसीडी में बीजेपी को हराया है। गुजरात में हम बहुत ही शानदार तरीके से लड़े हैं, कई तरह की प्रतिकूलताओं से निकलते हुए। कांग्रेस 149 सीटों पर पिछड़ी है। हम कुछ ही महीनों में बीजेपी के गढ़ में घुसे हैं और पांच सीटें और 13 फीसदी वोट शेयर जुटाए हैं।.... '

लोकसभा चुनावों में AAP का अच्छा नहीं रहा है रिकॉर्ड
पार्टी नेता हिमाचल प्रदेश में खराब प्रदर्शन की बात मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि इसने भाजपा से ज्यादा कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया है। 18 दिसंबर को आम आदमी पार्टी की नेशनल काउंसिल की बैठक होने वाली है, जिसमें अगले लोकसभा आम चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। इस समय केजरीवाल की पार्टी के 10 सांसद हैं और सारे के सारे राज्यसभा के हैं। पिछली बार पार्टी ने लोकसभा चुनाव में पंजाब में एक सीट जीती थी, लेकिन भगवंत मान के मुख्यमंत्री बनने के बाद वह सीट खाली हुई तो आम आदमी पार्टी उसे वापस नहीं जीत पाई। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जो प्रदर्शन किया था, उससे 2019 में खराब प्रदर्शन रहा। इसी तरह दिल्ली में दो-दो बार विधानसभा में उसे जबर्दस्त बहुमत हासिल हुआ है, लेकिन पिछले दोनों लोकसभा चुनावों में सांसदों के नाम पर उसे शून्य बटे सन्नाटा ही हाथ लगा है। लेकिन, एमसीडी चुनाव में सामान्य बहुमत से थोड़ा ज्यादा सीट जीतकर पार्टी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को खुद ही हराने का दम भर रही है।

अगले चुनावों की रणनीति पर चर्चा शुरू करेगी पार्टी
अगले लोकसभा चुनाव से पहले 2023 में 9 राज्यों में चुनाव होने हैं। इनमें राजस्थान और मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ में भी चुनाव होने हैं, जिनमें से दो पर कांग्रेस की सरकारें हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश में अबतक मुख्यतौर पर भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुख्य मुकाबला होता रहा है। छत्तीसगढ़ तो संदीप पाठक का गृहराज्य भी है। फिर कर्नाटक में भी चुनाव होना है। उन्होंने कहा है, 'हम कहां चुनाव लड़ते हैं, कितनी सीटों पर लड़ते हैं और किस स्तर पर लड़ते हैं, यह सब काफी अलग चीजें हैं और जिस पर पार्टी काम करेगी। हमने परिस्थितियों की समीक्षा शुरू कर दी है। हम विस्तार से चर्चा करेंगे और फिर अपनी रणनीति तय करेंगे। '

विपक्षी एकता के मंसूबों को AAP का झटका
जब उनसे बीजेपी के खिलाफ किसी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा होने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'हम जोड़-तोड़ की राजनीति में विश्वास नहीं करते या ना ही इस तरह की किसी सरकार में ही साझीदार बनना चाहते हैं। हम उनकी नकारात्मक राजनीति के खिलाफ सकारात्मक राजनीति देने के लिए तैयार हैं। यह देश की जनता को फैसला करना है कि वे किसको और क्या चाहते हैं।'












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