पैसे की तंगी से जूझती आम आदमी पार्टी, प्रचार पर भी खर्च करने को नहीं पैसे

पार्टी ने 16वीं लोकसभा चुनावों के लिए देशभर में 444 उम्मीदवारों को लोकसभा का टिकट दिया है। आप पार्टी की स्थापना वर्ष 2012 नवंबर में हुई थी और पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान 20 करोड़ रुपए खर्च किए थे। लेकिन अब पार्टी कहीं न कहीं इस बात को महसूस कर रही है कि लोकसभा चुनाव काफी बड़े हैं और ऐसे में उसे आने वाले दिनों के दौरान और ज्यादा राशि की जरूरत होगी।
पूर्व मंत्री ने भी मानी तंगी की बात
वैसे तो पार्टी आर्थिक तंगी का सामना कर रही है इस बारे में इशारा उस दिन ही मिल गया था जब अरविंद केजरीवाल ने वाराणसी में लोगों के बीच ऐलान किया था कि उनके पास प्रधानमंत्री का चुनाव लड़ने के लिए बिल्कुल भी पैसे नहीं हैं। लेकिन 49 दिनों की आप सरकार में परिवहन मंत्री रहे सौरभ भारद्वाज ने इस बात को स्वीकार करते हुए कहा कि हां हमें इस समय पैसे की कमी का सामना करना पड़ रहा है। सौरभ की मानें तो यह तंगी इस कदर है कि पार्टी वित्तीय मोर्चों पर संघर्ष करने को मजबूर है।
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चुनाव आयोग ने हर उम्मीदवार की ओर से चुनावों पर किए जाने वाले खर्च की सीमा को बढ़ारक 70 लाख रुपए कर दिया है और सूत्रों की मानें तो आप पार्टी के कई उम्मीदवार इस हालत में भी नहीं हैं कि वह इस रकम की आधी राशि ही खर्च कर सकें। उदाहरण के लिए आप पार्टी के दिल्ली में उम्मीदवार आशाीष खेतान की ओर से अब तक चुनाव प्रचार पर करीब 15 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
होर्डिंग्स लगाने को भी नहीं पैसे
दिल्ली में मंगलवार को प्रचार अभियान थम जाएगा। पार्टी के नेताओं के मुताबिक जहां कांग्रेस और बीजेपी के उम्मीदवारों की ओर से भारी-भरकम राशि सिर्फ चुनाव अभियान पर खर्च की जा रही है तो वहीं आशीष की ओर से खर्च की गई यह रकम काफी कम है। आप पार्टी के नेताओं की मानें तो इन दोनों पार्टियों की तुलना में आप पार्टी के पास इतना भी पैसा नहीं है कि वह दिल्ली, जहां बड़ी संख्या में उसके समर्थक मौजूद हैं, में बड़ी होर्डिंग्स भी लगा सके।
दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद से ही आप पार्टी लोकसभा चुनावों के लिए पैसा जुटाने के काम में लग गई थीं और पार्टी ने डोनेशंस के जरिए करीब 22 करोड़ रुपए की रकम इकट्ठा कर ली। पार्टी को मिली इस रकम में देश और विदेश से मिली डोनेशन शामिल थी। पार्टी के कई नेताओं जिनमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी शामिल हैं, की ओर से फंड इकटृठा करने के मकसद से 'फंड रेसिंग डिनर' का आयोजन किया गया था।
कम पड़ गई डोनेशन भी
इसके अलावा पार्टी ने मदद के लिए कई लोगों के दरवाजे भी खटखटाए। पार्टी को कैश और ऑनलाइन जो भी डोनेशन हासिल हुर्इ, वह अब पार्टी के लिए नाकाफी साबित हो रही है।पार्टी की ओर से न तो मीडिया में किसी तरह को कोई एडवरटाइजमेंट दिया गया और न ही दिल्ली की गलियों और मेट्रो ट्रेन में किसी तरह की कोई होर्डिंग लगाई गई। पार्टी पूरी तरह से सिर्फ केजरीवाल के जादू और उनकी लोकप्रियता पर भरोसा करके आगे बढ़ रही है। पार्टी की ओर से सस्ती दर पर तैयार किए गए पैंफेलेट्स
लोगों के बीच बांटे जा रहे हैं ताकि वह वोटर्स के बीच आसानी से अपनी पहुंच बना सकें। पैसे की तंगी का आलम यह है कि केजरीवाल और दूसरे नेता चुनाव प्रचार पर जाने के लिए कभी-कभी ही फ्लाइट्स का सहारा लेते हैं और ज्यादातर सदस्य ट्रेन से सफर कर रहे हैं। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से किसी भी तरह की कोई फंडिंग नहीं है और ऐसे में हर उम्मीदवार को अपने चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी खुद ही उठानी पड़ रही है। यहां तक कि पार्टी की ट्रेडमार्क बन चुकी गांधी टोपी को भी वह अपने ही पैसे ही तैयार करवा रहे हैं। पार्टी के नेताओं की मानें तो भले ही पार्टी के पास फंड की कमी हो लेकिन इसके बावजूद लोगों का भरोसा पार्टी पर बना हुआ है और यह उनके लिए काफी अच्छी बात है।












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