मोदी के 7 दुश्मन जो उन्हें नहीं पहुंचने देंगे 7 रेसकोर्स!
नयी दिल्ली। लोकसभा चुनाव के ऐलान से पहले ही भाजपा नमो नमो का मंत्रोच्चारण कर रही है। पार्टी को पूरी उम्मीद है कि मोदी के नेतृत्व में वो इसबार सत्ता की कुर्सी हासिल कर लेंगे। पार्टी का दावा है कि पूरे देश में नमो नमो की लहर दौड़ रही है और यहीं लहर उन्हें जीत का रास्ता दिखाएगी। जहां भाजपा मोदी को अपना पालनहार मान रही है वहीं सट्टा बाज़ार को भी मोदी ही सत्ता के सबसे बड़े खिलाड़ी नज़र आ रहे हैं, लेकिन, विरोधी हैं कि उन्हें मोदी की महिमा कहीं नहीं दिख ही नहीं रही है।
विरोधियों का दावा है कि भाजपा के पीएम पद के दावेदार मोदी पीएम इन वेटिंग ही रह जाएंगे। ये दावा करने वाले विरोधी मोदी की शख्सियत को ही उनकी राह का सबसे बड़ा रोड़ा बता रहे हैं। मोदी के विरोधी का मानना है कि मोदी की सात कमजोरियां उनकी सबसे बड़ी दुश्मन है जो उन्हें कभी भी देश का प्रधानमंत्री नहीं बनने देंगी। यहां हम आपको मोदी के उन दुश्मनों से मिलवाएंगे जो उन्हें 7 रेसकोर्स तक नहीं पहुंचने देंगे।

मोदी का तानाशाह रवैया
मोदी का तानाशाही रवैया उनका सबसे बड़ा दुश्मन है। मोदी के विरोधी हो या पार्टी के लोग। सब मानते है कि मोदी जिद्दी है। वो जो एकबार ठान लेते हैं उसे पूरा करके ही छोड़ते है। उनकी इस आदत को विरोधी तानाशाही कहते हैं तो कोई उनकी तुलना हिटलर से करता है।

मोदी का अहंकार
मोदी का अहंकार उनके लिए दुश्मन है। वो विरोधियों पर जब हमला करते है तो उनका अहंकार दिखता है। मोदी के अहंकार की चर्चा सिर्फ विरोधी ही नहीं ब्लकि दबी जुबान में पार्टी के भीतर लोग भी करते हैं।

मोदी का बड़बोलापन
मोदी के मुंह से निकले हर बोल उनके समर्थकों को अनमोल लगते हैं तो विरोधियों को ये उनका बड़बोलापन लगता है। उनके विरोधी मानते है कि मोदी भीड़ जुटाने और लोगों को आकर्षित करने के लिए बड़बोलापन दिखाते हैं। मोदी के विरोधी उनके इस बड़बोलेपन को उनका दुश्मन मानते हैं। उनका ये बड़बोलापन उनके कई भाषणों में दिख चुका है।

मोदी पर लगे हैं दंगे का दाग
मोदी के दामन में 2002 के गुजरात दंगों का दाग लगा है। दंगे का ये दाग मोदी का सबसे बड़ा दुश्मन है और विरोधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार। विरोधी मानते है कि मोदी को उनके इसी दुश्मन से वो हरा सकते हैं। मोदी खुद भी अपने इस दुश्मन से वाकिव है इसलिए वो विकास के दावों को पेश कर अपने इस दाग को छुपाने की कोशिश करते हैं।

मोदी के मन में पद की चाह
मोदी के भाषणों को सुने तो साफतौर पर दिखता है कि मोदी के मन में पद की चाहत है। वो कभी विकास के दावे करते है तो कभी खुद को अल्पसंख्यक के तौर पर दिखाते है। इतना ही नहीं वो अपने अतीत को लोगों के बीच पेश कर लोगों के आंखों में पानी लाने की कोशिश करते हैं। मोदी के विरोधी मानते है कि वो जनता से सीधा संपर्क नहीं बनाते, लेकिन उनका ये स्टंट ही उनका दुश्मन है।

मोदी के भेदी
मोदी पर पतिधर्म और राजधर्म न निभाने का आरोप लगता रहा है। मोदी के विरोधी उनपर इसे लेकर निशाना साधते है और मानते है कि मोदी का ये भेद उनपर हमला करने के लिए कारगर है।

जनता से दूरी
मोदी के विरोधी उनपर जनता से दूरी बनाने का आरोप लगाते है। उनके अपने भाषणों के जरिए वो लोगों से संपर्क करने की कोशिश करते है, लेकिन कभी भी वो जनता से सीधा संपर्क नहीं बनाते। आलोचक कहते है कि मोदी हेलीकॉप्टर से आते है और भाषण देकर चले जाते है। वो जनता से तो क्या अपने कार्यकर्ताओं से भी नहीं मिलते। उनके आलोचक इसे उनका दुश्मन मानते है।












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