दिल्ली पुलिस ने दर्ज की डॉक्टरों ने खिलाफ FIR, एम्स RDA ने दिया अल्टीमेटम

नई दिल्ली, 27 दिसंबर: नीट-पीजी काउंसलिंग में देरी की वजह से प्रदर्शन करने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों ने अपना आंदोलन और तेज कर दिया है। आक्रोशित डॉक्टर पुलिस पर बर्बर कार्रवाई का आरोप लगाते हुए देर रात सरोजिनी नगर पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठ गए। जानकारी के मुताबिक करीब 4 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी रेजिडेंट डॉक्टरों ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोला है। आंदोलनकारी लोग पुलिसकर्मियों की कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी लगातार नारेबाजी भी करते नजर आए।

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इधर, आईटीओ में डॉक्टरों के प्रदर्शन पर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में धारा 188 और अन्य धाराओं के तहत दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। वहीं एम्स आरडीए ने अपनी सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुलिस द्वारा डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार की निंदा करता है और हिरासत में लिए गए डॉक्टरों की तत्काल रिहाई की मांग करता है। वहीं अल्टीमेटम देते कहा कि अगर 24 घंटे के भीतर सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आता है, तो एम्स आरडीए 29 दिसंबर को हड़ताल पर जाएगा, जिसमें सभी गैर-आपातकालीन सेवाएं बंद भी शामिल है।

रेजिडेंट डॉक्टरों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। सोमवार को दिल्ली के कई इलाकों में रेजिडेंट डॉक्टर इकट्ठा हुए और मार्च निकालते हुए केंद्र के प्रति अपने गुस्से का इजहार किया। वहीं सैकड़ों रेजिडेंट डॉक्टरों ने पुलिस पर बर्बर कार्रवाई का आरोप लगाते हुए सोमवार को चिकित्सा सेवाओं को पूरी तरह से बंद करने की धमकी दी। इधर, रेजिडेंट डॉक्टरों के विरोध के चलते तीन प्रमुख सरकारी अस्पतालों सफदरजंग, आरएमएल और लेडी हार्डिंग में मरीजों की देखभाल प्रभावित रही।

दअरसल जब प्रदर्शनकारी सुप्रीम कोर्ट की ओर जाने लगे तो दिल्ली पुलिस ने आईटीओ के पास उन्हें रोका। इसके बाद कई रेजिडेंट को हिरासत में लिया गया, जिसमें फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (FORDA) के अध्यक्ष डॉ. मनीष भी शामिल हैं। दिल्ली पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने में 7 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

दरअसल फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने नीट-पीजी काउंसलिंग को वक्त पर करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक प्रदर्शन का आह्वान किया था। इस वजह से आईटीओ स्थित शहीद पार्क के पास हजारों की तादाद में डॉक्टर इकट्ठा हुए। इसके बाद वो सुप्रीम कोर्ट जाने लगे, जिस पर पुलिस ने उनको रोका। इससे नाराज डॉक्टर सड़क पर ही बैठ गए। जब पुलिसकर्मी उन्हें हटाने पहुंचे तो उनकी झड़प हो गई। जिसमें 7 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। साथ ही बड़ी संख्या में डॉक्टरों को भी हिरासत में लिया गया।

वहीं दूसरी ओर करीब 2500 डॉक्टरों को सरोजिनी नगर पुलिस स्टेशन के बाहर हिरासत में लिया गया। ये सभी स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मनडाविया के घर की तरफ मार्च कर रहे थे। इसके अलावा शाम को बड़ी संख्या में रेजिडेंट डॉक्टर सफदरजंग अस्पताल के बाहर इकट्ठा हुए। कुछ देर नारेबाजी करने के बाद वो वहीं पर बैठ गए। साथ ही केंद्र सरकार से नीट-पीजी काउंसलिंग जल्द से जल्द करवाने की मांग की। वैसे तो इस प्रदर्शन की वजह से मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन अभी तक केंद्र सरकार की ओर इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।

पुलिस ने की बदसलूकी?
वहीं रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ हुई झड़प का मामला बढ़ता जा रहा है। FORDA ने प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों के साथ बदसलूकी का आरोप लगाया है। साथ ही इसे चिकित्सा इतिहास का काला दिन बताया। इस कार्रवाई के बाद उन्होंने ऐलान करते हुए कहा कि अगली घोषणा तक रेजिडेंट डॉक्टर पूरी तरह से कार्य बहिष्कार करेंगे।

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