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पंजाब में क्यों हुई अकाली दल-भाजपा की हार, ये रही 5 बड़ी वजहें

मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के बेटे और उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर ड्रग्स तस्करों को संरक्षण देने के आरोप लगते रहे है।

नई दिल्ली। जहां उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में मोदी की सूनामी चल रही है तो वहीं पंजाब में अकाली दल-भाजपा गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है। पंजाब में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर ऊभरी है और सरकार बनाने जा रही है, वहीं पिछले 10 सालों से सत्ता संभाल रही शिरोमणि अकाली जल और भाजपा गठबंधन को लोगों ने नकार दिया।

 5 reasons why SAD was crushed in Punjab elections

पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस को 77 सीटें मिली है, जबकि आम आदमी पार्टी 20 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं सत्ताधारी अकाली दल और भाजपा गठबंधन को मात्र 18 सीटें ही मिली और उन्हें करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। ऐसे में ये जानना बेहद जरूरी है कि पंजाब में किन वजहों से अकाली दल और बाजपा गठबंधन को लोगों ने नकार दिया...

ड्रग्स ले डूबी अकाली दल की नैया

पंजाब चुनाव में ड्रग्स और नशोखारी सबसे से बड़ा मुद्दा रही है। वहीं चुनाव के दौरान हर पार्टी ने इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के बेटे और उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर ड्रग्स तस्करों को संरक्षण देने के आरोप लगते रहे है। पंजाब में युवा नशे की लत के शिकार हो रहे है। इसे आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने खूब बढ़ा-चढ़ा कर उठाया कि बादल सरकार राज्य में ड्रग्स के गैरकानूनी धंधे को जानबूझ कर नहीं रोक रही है। इस बात की नाराजगी लोगों ने वोट के जरिए दिखाई।

अप्रवासी भारतियों ने दिखाई नाराजगी

पंजाब में अप्रवासी भारतियों की तादात काफी है। ये अप्रवासी बादल सरकार से कासे नाराज रहे है। उनपर अपनी जमीन कब्जाने का आरोप लगाते रहे है। चुनाव के दौरान भी इन अप्रवासियों का मुद्दा खूब गरमाया। अप्रवासियों ने आरोप लगाया कि वे चाह कर भी राज्य में निवेश नहीं कर पाते हैं, क्योंकि इस काम में भी उन्हें बहुत दिक्कतें आती हैं।

मूक दर्शक बने रहे प्रकाश सिंह बादल

पंजाब के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भले ही प्रकाश सिंह बादल बैठे हो, लेकिन इसकी चाभी उनके बेटे सुखबीर बादल के हाथों में रही है। सुखबीर सिंह बादल के मनमाने फैसलों की वजह से लोगों में बादल सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी, जिसका खामियाजा चुनाव में अकाली दल और भाजपा गठबंधन को चुकाना पड़ा।

10 साल की सरकार से ऊब गए लोग

पिछले 10 सालों से पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा गठबंधन की सरकार रही है। 10 साल की इस सरकार से लोग ऊब गए। जब भी कोई पार्टी लंबे समय तक सत्ता में रहती है तो एक स्वभाविक प्रक्रिया के तहत वोटरों के एक धड़ा उससे नाराज होता है। लोग उसके बाद बदलाव चाहते है।

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