महाराष्ट्र: ग्रामीणों पर बेइंतहा जुल्म ढाहने वाले 4 पुलिसकर्मी निलंबित

Four Policemen Suspended for Allegedly Assaulting Villagers in Maharashtra
पुणे। महाराष्ट्र सरकार ने ग्रामीणों पर कथित रूप से अत्याचार करने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले में स्थित कांगड़ा गांव के लोग क्षेत्र में शराब की अवैध ब्रिकी को लेकर सोमवार को प्रदर्शन कर रहे थे, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं।

राज्य के गृह मंत्री आरआर पाटिल ने घटना पर संज्ञान लेते हुए पुलिस विभाग द्वारा संसदीय रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद पुलिसकर्मियों के निलंबन के आदेश जारी किए। राज्य गृह मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कहा कि निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में सहायक पुलिस निरीक्षक राजेंद्र बंसोड़े और कांस्टेबल अशोक पवार, अन्ना भोंसले और हरिदास शिंदे शामिल हैं।

सभी पुलिसकर्मी उसमानाबाद के बेंबली पुलिस थाने से संबंद्ध हैं। विधान परिषद में विपक्ष के नेता विनोद तावड़े ने बुधवार को गांव का दौरा किया और पुलिसिया अत्याचार के मुद्दे को आगामी मानसून सत्र में विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया। तावड़े ने कहा कि मैं इस घटना की न्यायिक न्यायिक जांच की मांग करता हूं, जहां ग्रामीण अवैध शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे थे और बदले में उनको बुरी तरह पीटा गया।

यह घटना हमें निजामों के काल में राजाकारों के अत्याचारों की याद दिलाती है। उल्लेखनीय है कि बीते सोमवार कांगड़ा गांव की कुछ महिलाओं ने एसएल राठौड़ को एक स्थानीय लोगों और युवकों को अवैध रूप से शराब बेचते हुए पकड़ा था और राठौड़ के पास मौजूद सारी अवैध शराब जब्त कर ली थी। महिलाओं ने घटना के बारे में बेम्बली पुलिस को तुरंत सूचित भी किया था।

लेकिन पुलिस ने अवैध शराब विक्रेता और जब्त शराब पर उचित कार्रवाई करने के बजाय महिलाओं और ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार किया। पीड़ित ग्रामीणों का दावा है कि जब उन्होंने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया और अवैध शराब की बिक्री रोकने की मांग की तो पुलिस ने महिलाओं सहित प्रदर्शनकारी ग्रामीणों की पिटाई की।

उग्र ग्रामीणों द्वारा प्रदर्शन के बाद पुलिस ने 200 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों के बल के साथ गांव में धावा बोला। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस ने प्रारंभिक जांच पड़ताल किए बगैर ही पुरुष, महिलाओं और बच्चों की पिटाई शुरू कर दी। पुलिस ने ग्रामीणों को उनके घरों से घसीट कर बाहर निकाला और लात-जूतों, घूंसों और थप्पड़ों से पिटाई की।

गांव वालों का कहना है कि उनमें से कई ने गांव से बाहर खेतों में छिपकर खुद को बचाया, जबकि पुलिस सबेरा होने तक घर-घर की तलाशी ले रही थी। पुलिस ने अगले दिन 54 ग्रामीणों को अलग-अलग आरोपों के तहत गिरफ्तार भी किया, लेकिन 47 लोगों को शाम तक छोड़ दिया गया। ग्रामीणों ने पुलिस पर क्षेत्र के अवैध शराब माफिया का साथ देने का आरोप लगाया है। गांववासी जिले में शराब की बिक्री पर पूर्णत: प्रतिबंध चाहते हैं।

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