बादल फटने के बाद उत्तराखंड में 'तबाही' की बारिश, अबतक 30 मौतें
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड से बुरी खबर आ रही है। यहां अलग-अलग जगहों पर बादल फटने के बाद हुई आफत की बारिश से 30 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है। अभी तक 18 लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। वहीं करीब 25 लोग मलबे और पानी में फंसे हुए हैं। भारी बारिश के कारण ऋषिकेश-बद्रीनाथ मार्ग पर तोता घाटी के निकट नेशनल हाईवे पर चट्टान गिर गई है जिससे हाईवे बंद हो गया। नदी पर जगह-जगह बने अस्थायी पुल बह गए हैं।

यमुनोत्री और केदारनाथ के रास्ते पर भी हजारों लोग फंसे हैं। बाढ़-बारिश से प्रभावित इलाके में रेस्क्यू टीमें भेजी गई हैं। अलकनंदा व मंदाकिनी नदियों सहित तमाम नदियां ऊफान पर हैं। नदियों के किनारे बसी बस्तियों में लोगों को अलर्ट किया गया है कि वो अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। जानकारी के मुताबिक पिथौरागढ़ के डीडीहाट में सबसे अधिक 5 लोग मारे गए हैं, जबकि नौलाड़ा में के चिफलवाकुमल्गोनि में एक मकान पहाड़ी से आए मलबे में दब गया।
इससे एक ही एक ही परिवार के तीन सदस्य दब गए। बस्तड़ी में मलबे में दबे 4 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। सिंगाली, दाफिला, बस्तड़ी और नौलाड़ा क्षेत्र में बादल फटने से जमीन से पानी निकल रहा है। कितने लोग मलबे में और दबे हैं इसकी वास्तविक संख्या का पता नहीं चल सका है। पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी हरीश चंद्र सेमवाल ने कहा, 'हमने सिंघली क्षेत्र से पांच शव बरामद किये हैं और थल गांव से भी तीन शव मिले हैं। सेना और अर्धसैनिक बलों के कर्मियों की मदद से चलाये जा रहे तलाशी अभियान के जरिये अन्य शव निकालने का प्रयास किया जा रहा है।












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