निर्भया के दोषी पवन का एक और पैंतरा, सुप्रीम कोर्ट में नाबालिग होने का किया दावा
नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले के दोषी फांसी से बचने के लिए अलग-अलग पैंतरा अपना रहे हैं। निर्भया के दोषी पवन गुप्ता ने फांसी से बचने के लिए फिर एक नई चाल चली है। पवन ने सुप्रीम कोर्ट में फिर से क्यूरेटिव याचिका दाखिल की है। उपचारात्मक (क्यूरेटिव) याचिका में पवन ने नाबालिग होने का दावा किया है। वहीं दोषी अक्षय ने एक बार फिर जेल प्रशासन को दया याचिका दी है। जिसे राष्ट्रपति के पास भेजने की गुजारिश की गई है।
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पवन ने वकील के माध्यम से दायर की गई दूसरी क्यूरेटिव पिटीशन में कहा कि नया सबूत स्कूल के रजिस्टर में सामना आया है। इसमें याचिकाकर्ता की जन्म की तारीख आठ अक्टूबर 1996 बताई गई है। इसके अनुसार घटना के दिन उसकी उम्र 16 साल दो महीने और आठ दिन थी। याचिकाकर्ता की ओर से दलील में कहा गया कि नाबालिग होने के तथ्य दिल्ली पुलिस ने जानबूझकर अदालत से छिपाए। ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट ने भी इस तथ्य को नजरअंदाज किया। ये सब मीडिया और जनता के दबाव में हुआ।
वहीं चारों दोषियों में से एक अक्षय ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को संबोधित करते हुए जेल प्रशासन को अपनी दया याचिका सौंपी है। इस दया याचिका को दिल्ली सरकार के जरिये केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। वहीं अक्षय ने भी दूसरी दूसरी दया याचिका दायर की है। इससे पहले उसकी एक दया याचिका सरकार के द्वारा खारिज की जा चुकी है। डेथ वारंट के हिसाब से निर्भया के दोषियों को 20 मार्च को सुबह साढ़े पांच बजे फांसी पर लटकाया जाना है।
दोषियों के स्वास्थ्य को लेकर जेल प्रशासन पूरी तरह सजग जेल संख्या तीन के हाई सिक्योरिटी सेल में बंद निर्भया के चारों दोषियों के स्वास्थ्य को लेकर जेल प्रशासन पूरी तरह सजग है। रोजाना दो बार चिकित्सकों का एक दल सभी के स्वास्थ्य की जांच कर रहा है। दोषियों के स्वास्थ्य जांच की रिपोर्ट को रजिस्टर में दर्ज भी किया जा रहा है।












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