2002 गुजरात दंगे: सुप्रीम कोर्ट में जाकिया जाफरी ने पीएम मोदी को मिली क्लीन चिट को दी चुनौती
नई दिल्ली, 10 नवंबर: 2002 के गुजरात दंगों में मारे गए दिवंगत कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा दी गई क्लीन चिट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। जस्टिस एएम खानविलकर, दिनेश माहेश्वरी और सीटी रविकुमार की बेंच ने बुधवार को मामले की सुनवाई की। जाफरी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 2002 के गुजरात दंगों की जांच कर रहे विशेष जांच दल ने सबूतों की अनदेखी की और बिना किसी जांच के निष्कर्ष निकाला।

कपिल सिब्बल ने यह भी बताया कि सबक सिखाने की एक बड़ी साजिश थी और एसआईटी ने न तो किसी को गिरफ्तार किया और न ही उन्होंने कोई फोन जब्त किया। अदालत को इकट्ठा किए गए सबूतों को स्वतंत्र रूप से देखना चाहिए था और एसआईटी की अवहेलना करनी चाहिए थी। सिब्बल ने कहा सांप्रदायिक हिंसा ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा की तरह है। यह एक संस्थागत समस्या है, जब भी लावा पृथ्वी पर किसी जमीन को छूता है तो यह उसे डराता है और भविष्य में बदला लेने के लिए उपजाऊ जमीन बन जाता है। इस दौरान कपिल सिब्बल भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि, मैंने पाकिस्तान में अपने नाना-नानी को खोया। मैं भी उसी नफरत का शिकार हूं।
जाफरी की ओर से पक्ष रख रहे सिब्बल ने कहा कि वह किसी 'ए' या 'बी' पर आरोप नहीं लगा रहे हैं, लेकिन दुनिया को यह संदेश अवश्य जाना चाहिए कि यह हिंसा अस्वीकार्य है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कपिल सिब्बल ने कहा कि यह एक 'ऐतिहासिक मामला' है। हमें यह तय करना है कि कानून का राज कायम रहेगा या लोगों को आपस में भिड़ने देना चाहिए।' कपिल सिब्बल ने कहा कि जाफरी ने 2006 में एक शिकायत की थी जिसमें बड़ी साजिश की बात की गई थी और एसआईटी ने उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर कोई जांच नहीं की थी।
सिब्बल ने शीर्ष अदालत से उन रिकॉर्डिंग की प्रतिलिपि पर एक नजर डालने के लिए कहा था जिन्हें सीबीआई ने प्रमाणित किया था और एसआईटी ने बिल्कुल भी छुआ नहीं था। टेप के अनुसार, राज्य में बड़ी संख्या में आग्नेयास्त्रों को बाहर से ले जाया गया था और यहां तक कि बम भी बनाए गए थे। सिब्बल ने पीठ को बताया कि देशी बंदूके को वितरित किया गया और मोटे पाइपों का उपयोग करके रॉकेट लांचर स्टैंड बनाए गए।
सिब्बल ने तर्क दिया, कि गुजरात के पूर्व एडीजीपी श्रीकुमार की गवाही को एसआईटी ने इस आधार पर खारिज कर दिया था कि उन्हें पदोन्नति से वंचित कर दिया गया था। सिब्बल ने पूछा गया कि अन्य अधिकारियों द्वारा पुष्टि किए जाने पर भी इसे क्यों खारिज कर दिया गया था। सिब्बल ने आगे कहा कि विहिप नेता जयदीप पटेल का मोबाइल फोन भी जब्त नहीं किया गया। उन्होंने कहा, 'कई फोन कॉल आए होंगे लेकिन फोन जब्त नहीं हुआ तो जांच क्या हुई? सब कुछ मजिस्ट्रेट के सामने था।
सिब्बल ने दलील दी कि जाफरी की शिकायत यह थी कि 'एक बड़ी साजिश थी जहां अधिकारियों की निष्क्रियता, पुलिस की संलिप्तता, नफरत फैलाने वाले भाषण के साथ हिंसा को बढ़ावा दिया गया।' एसआईटी ने आठ फरवरी, 2012 को मोदी (अब प्रधानमंत्री) और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों सहित 63 अन्य लोगों को क्लीन चिट देते हुए मामला बंद करने के लिए 'क्लोजर रिपोर्ट' दाखिल की थी जिसमें कहा गया था कि उनके खिलाफ 'मुकदमा चलाने योग्य कोई सबूत नहीं' था।












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