अयोध्या: फैसले वाले दिन 183 लोग रहेंगे नजरबंद, प्रशासन ने की ये तैयारियां
नई दिल्ली। अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी होने के बाद देश को अब फैसले का इंतजार है। दोनों ही पक्षों ने लोगों से अपील की है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला जो भी हो उसे स्वीकार करें और देश में शांति बनी रहे। फैसला आने से पहले सरकार भी सतर्क हो गई है और इस मामले में एक बड़ा निर्णय ले लिया गया है। जिस दिन फैसला आएगा उस दिन बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा सहित 183 लोगों को नजरबंद रखा जाएगा।
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हिंसा के आरोपी हैं सभी 183 लोग
बता दें कि यह फैसला देश में किसी भी तरह से हिंसा फैलने से रोकने के लिए लिया गया है, बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा अप्रैल 2018 में भारत बंद के दौरान मेरठ में हिंसा फैलाने के आरोपी हैं। दरअसल, देश में अब तक हुए हिंसे के जितने भी आरोपी हैं उन सभी को नजरबंद किया जाएगा, पुलिस इस मामले में पुरानी फाइलें खंगाल रही है और अब तक 183 लोगों का नाम नजरबंद लिस्ट में शामिल किया जा चुका है। लिस्ट में वह सभी लोग शामिल हैं जो हिंसा के आरोप में जेल गये थे।

इंटरनेट बंद रखने पर विचार
हिंसा के आरोपी लोगों को नजरबंद करने के अलावा पुलिस और प्रशासन इंटरनेट की सुविधा को भी कुछ समय के लिए बंद किए जाने पर विचार कर रही है। वहीं, पुलिस 10 हजार व्हाट्सएप ग्रुप पर भी नजर रखेगी जिसमें लोग भड़काऊ पोस्ट शेयर या वायरल कर सकते हैं। लोगों के भड़काऊ बयानों और टिप्पणी पर भी नजर रखी जाएगी। एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि वर्ष 2018 में मेरठ में हुए हिंसा के आरोपी योगेश वर्मा को भी नजरबंद किया जाएगा।

सोशल मीडिया पर होगी पैनी नजर
अजय साहनी ने बताया कि फैसला आने के बाद और उससे पहले सोशल मीडिया पर होने वाले पोस्ट पर भी पैनी नजर रखी जाएगी। विवादित व्हाट्सएप ग्रुप के मेंबर्स के नंबरों को सर्विलांस पर रख दिया गया है, इसके अलावा साइबर की अतरिक्त चार टीमें बनाई गई हैं जो सिर्फ भड़काऊ पोस्ट पर नजर रखेगी। यह टीमें अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी। अजय साहनी ने कहा कि हमने सोशल मीडिया पर पोस्ट के अलावा विवादित फोटो शेयर करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।












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