Independence Day: आजादी के बाद रक्षा क्षेत्र की वो उपलब्धियां जिन पर हर देशवासी को होगा नाज
नई दिल्ली, 13 अगस्त। भारत आजादी की 74वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के बाद से देश ने एक लंबी यात्रा तय की है और इस दौरान कृषि से लेकर अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्र तक तमाम उपलब्धियां इसके हिस्से में आई हैं। रक्षा के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का एक विशाल आंकड़ा है जिसके बारे में एक लेख में बता पाना आसान नहीं है। फिर भी हम आजादी के बाद भारतीय रक्षा क्षेत्र की कुछ प्रमुख उपलब्धियों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके बार में जानकर हर भारतवासी को नाज होगा।

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में उपलब्धियां
आजादी के बाद भारत ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा समेत विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्योग में आत्मनिर्भरता के पथ पर आगे बढ़ा। 1950 के दशक के अंत तक भारत ने परमाणु ऊर्जा पर काम शुरू कर दिया था। इसी का नतीजा रहा कि 70 के दशक तक स्वदेशी परमाणु ऊर्जा संयंत्र बने।
इसके साथ ही भारत ने परमाणु हथियारों के उत्पादन पर भी काम शुरू कर दिया था। 1971 में भारत ने पोखरण में परमाणु विस्फोट कर दुनिया को चौंका दिया। बाद में इसी बम को हथियार से लैस किया गया और दो दशक बाद 1998 में जब अटल बिहारी वाजपेयी से शासन में भारत ने परमाणु शक्ति का दर्जा प्राप्त कर लिया।
मिसाइल के क्षेत्र में
1983 में आयुध कारखानों की सहायता से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के तत्वावधान में एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) शुरू किया गया। इसके तहत विभिन्न भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों को एक साथ लाया गया। आईजीएमडीपी कार्यक्रम के तहत सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल पृथ्वी, सतह से हवा में मार करने वाली त्रिशूल व आकाश और एंटी टैंक मिसाइल नाग का सफलतापूर्वक विकास किया गया। 2008 में इस कार्यक्रम को बंद कर दिया गया।
लंबी दूरी की अग्नि को 1989 में अलग से विकसित और परीक्षण किया गया था। खास बात यह थी इन तकनीकों को अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा अमेरिका की मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था के तहत अत्यधिक प्रतिबंधों के मद्देनजर विकसित किया गया था। बाद में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को रूस के साथ संयुक्त रूप से विकसित किया गया और भारत में निर्मित किया गया।
हवाई सीमाओं की रक्षा
1964 में गठित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) आज भारत के अब तक के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के रूप में अपना स्थान बना चुका है। एचएएल ने अपने फाइटर एचएफ-24 मारुत को डिजाइन करना शुरू किया था। इसका एयरडायनमिक्स बहुत उन्नत था लेकिन कम पॉवर का इंजन इसकी समस्या थी और कोई भी देश इसका विकल्प देने को तैयार नहीं था। हालांकि एचएएल ने अपने बुनियादी ट्रेनल एचटी-2 और प्रथम स्तर के जेट ट्रेनर एचजेटी-16 को डिजाइन और निर्मित किया जिस पर 60 और 70 के दशक में पायलटों की दो पीढ़ियों ने ट्रेनिंग ली।
हथियार निर्माण
स्वतंत्रता के बाद की आयुध कारखानों ने 1960 के दशक से कई हथियार बनाए। इनमें स्वदेशी इनसास राइफल, रूसी मूल के टी-92 टैंक, भारतीय मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन, बख्तरबंद वाहन और सैनिक वाहक प्रमुख नाम हैं।
नौसेना
मझगांव, विशाखापत्तनम, गोवा और गार्डन रीच में शिपयार्ड ने कई युद्धपोत, विध्वंसक, पनडुब्बियां अंडर-लाइसेंस का निर्माण किया है, और स्वदेशी रूप से एक परमाणु-संचालित पनडुब्बी और विमान वाहक का डिजाइन और निर्माण किया है।
इसी साल अगस्त में भारत ने पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत विक्रांत को समुद्र में उतारकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।












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