सवर्णों को रिजर्वेशन: अब करीब-करीब हर भारतीय आरक्षण के दायरे में
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया है। सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट ने इस पर सहमति दी है। कैबिनेट के इस फैसले के बाद भारत का तकरीबन हर आदमी आरक्षण के भीतर आ गया है, वो जाति आधारित आरक्षण हो या फिर आर्थिक। मोदी कैबिनेट के नए फैसले के मुताबिक, आठ लाख से कम सालाना आमदनी वाले परिवार को आरक्षण के दायरे में रखा गया है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और एनएसएसओ की रिपोर्ट के आधार पर देखा जाए तो ये फैसला अमल में आने के बाद करीब 95 फीसदी आबादी को आरक्षण का लाभ मिलने लगेगा।

आठ लाख सालाना आमदनी से ज्यादा वाले परिवार पांच प्रतिशत ही
सवर्णों को आरक्षण के लिए 8 लाख रुपये के सालाना आमदनी का पैमाना रखा गया है। अगर एक परिवार में पांच सदस्य हैं, तो प्रति व्यक्ति आय करीब 13,000 रुपए होगी। एनएसएसओ सर्वे 2011-12 के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति मासिक आय 2,625 रुपए और शहरी क्षेत्रों में 6,015 रुपए है। ऐसे में आर्थिक आधार पर आरक्षण से इससे ज्यादा आमदनी वाले पांच फीसदी परिवार ही इसके दायरे से बाहर रहेंगे।

पांच एकड़ जमीन का मालिकाना हक बहुत कम परिवारों के पास
2016-17 में दो करोड़ तीस लाख लोगों ने अपनी आय चार लाख से अधिक घोषित की है। सरकार ने अपने आंकड़े में प्रति व्यक्ति आय 1.25 लाख सालाना बताई गई है। ऐसे में किसी परिवार में कमाने वाले पांच लोग हैं तब भी यह आय 6.25 लाख सालाना ही होगी।
आरक्षण के लिए जमीन के मालिकाना हक के लिए पांच एकड़ से कम जमीन का मालिक इसका हकदार होगा। कृषि जनगणना आंकड़े 2015-16 के अनुसार, भारत में करीब 87 फीसदी लोगों के पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन है। वहीं घर की बात की जाए तो आरक्षण के लाभ के लिए परिवार के पास 1000 स्कवॉयर फीट से कम का घर होना चाहिए। ज्यादातर आबादी छोटे घरों में रह रही है ऐसे में इसको लेकर भी ज्यादातर लोग आरक्षण के हकदार होंगे।

कानून लाने में कई पेचीदगी भी
केंद्रीय कैबिने नेआर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को नौकरी और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इतना ही नहीं सरकार संविधान में संशोधन के जरिए आरक्षण का कोटा बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। इस फैसले को लागू करने में राजनीतिक और कानूनी दोनों ही मोर्चों पर कई चुनौतियां सामने आ सकती हैं। सरकार इसे ससंद में भी पास करा लेती है तो इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इस पर रोक लग सकती है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा 50 फीसदी तय कर रखी है।












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