तेलंगाना में इको-टूरिज्म स्पॉट, 'छिपे हुए रत्नों' के समान हैं निर्मल जिले की ये दो झीलें
तेलंगाना के निर्मल जिले में वेंगन्ना चेरुवु और तुर्कम चेरुवु नाम की दो झीलों को पर्यावरण पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा। telangana eco tourism Turkam Cheruvu Venganna Cheruvu
हैदराबाद, 31 अगस्त : तेलंगाना के निर्मल जिले में छिपे हुए रत्न माने जाने वाले डिम्मदुरथी रेंज में तुर्कम चेरुवु (Turkam Cheruvu) और वेंगन्ना चेरुवु (Venganna Cheruvu) को इको-टूरिज्म आकर्षण (eco-tourism attractions) के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। तुर्कम चेरुवु जिले के घने जंगलों के बीच बसा हुआ है, जबकि वेंगन्ना चेरुवु को पक्षी-देखने वालों के लिए स्वर्ग के समान माना जाता है। इसमें किसी क्षेत्र विशेष की पक्षियों (avifauna) के लिए बसेरों (perches) की भरमार है।

पर्यटन के साथ युवाओं को रोजगार
निर्मल मंडल के वन मंडल अधिकारी सिद्धार्थ विक्रम सिंह ने कहा, "ये दोनों क्षेत्र की सबसे बड़ी झीलें हैं और ये निर्मल शहर के करीब स्थित हैं, इसलिए इन्हें इकोटूरिज्म स्पॉट के रूप में विकसित करने से स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी।"बकौल सिद्धार्थ विक्रम, पारिस्थितिकी तंत्र में बहुत अधिक गड़बड़ी पैदा किए बिना बर्ड-वाचिंग टॉवर, इको-कॉटेज, नाइट कैंपिंग और स्टारगेजिंग, झील में नौका विहार और कयाकिंग, तैरते हुए घर और प्रकृति के निशान के साथ पत्थर के संकेत स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
दोनों झीलों को जोड़कर 10 किलोमीटर के दायरे में जंगल सफारी शुरू करने की भी योजना बनाई जा रही है। इकोटूरिज्म स्पॉट बनने के बाद यहां के लोगों के लिए रोजगार के मौके बनेंगे। लोग फूड स्टॉल लगा सकेंगे। सफारी में गाइड के रूप में काम कर सकते हैं, नावों और कॉटेज जैसे विकल्पों के प्रबंधन में भी युवाओं को रोजगार मिल सकता है।
स्थानीय लोगों के लिए रोजगार की संभावना
जिला वन अधिकारी विकास मीणा के अनुसार, जैव-विविधता से समृद्ध दोनों झीलों पर इको-टूरिज्म प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों को आजीविका प्रदान करना है। साथ ही पक्षियों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण पर भी ध्यान देना है। भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारी मोहन चंद्र परगायन ने कहा, तुर्कम चेरुवु और वेंगन्ना चेरुवु में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं।












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