लॉकडाउन में 1400 किमी दूर फंसा था बेटा, स्कूटी से सफर कर घर ले आई मां

हैदराबाद। कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन को घोषणा की थी। लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद सड़क और रेल यातायात बंद हो गए है। वहीं, पुलिस और जिला प्रशासन लॉकडाउन के नियमों का पालन करवाने में जुटा हुआ है। इस दौरान केवल अति-आवश्यक चीजों को लाने ले जाने की अनुमति दी जा रही है। लेकिन तेलंगाना के निजामाबाद की रहने वाली एक महिला का अनोखा रूप देखने को मिला, जिसने बेटे को वापस लाने की जिद ठानी और लॉकडाउन की परवाह न करते हुए स्कूटी पर 1400 किलोमीटर का सफर तय किया।

पुलिस से ली थी अनुमति

पुलिस से ली थी अनुमति

दरअसल, निजामाबाद के बोधान में एक स्कूल में पढ़ाने वाली रजिया बेगम (48) लॉकडाउन के कारण आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में फंसे अपने बेटे को घर वापस लाने के लिए अपनी स्कूटी से ही निकल पड़ीं। इस दौरान रजिया ने लॉकडाउन में बाहर निकलने के लिए पुलिस से अनुमति ली थी। अनुमति लेने के बाद रजिया बेगम स्कूटी से अकेले आंध्र प्रदेश के नेल्लोर के लिए निकली थीं। नेल्लोर पहुंचने तक उन्हें रास्ते में कई जगहों पर रुकना पड़ा। इस दौरान उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को कन्विंस करते हुए नेल्लोर तक की यात्रा तय की।

आसान नहीं था ये सफर

आसान नहीं था ये सफर

उन्होंने बताया, 'एक महिला के लिए छोटे टू-व्हीलर पर ये सफर आसान नहीं था, लेकिन बेटे को वापस लाने की मेरी इच्छाशक्ति के आगे ये डर भी गायब हो गया। मैंने रोटी पैक कीं और निकल पड़ी। रात में कोई ट्रैफिक नहीं, सड़क पर कोई लोग नहीं, ये डराता जरूर था लेकिन मैं अपने रुख पर कायम थी।' रजिया हैदराबाद से करीब 200 किलोमीटर दूर निजामाबाद स्थित एक सरकारी स्कूल में कार्यरत हैं। 15 साल पहले उनके पति की मौत हो गई थी। उनके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है और दूसरा बेटा 19 साल का निजामुद्दीन पढ़ाई कर रहा है और वह डॉक्टर बनना चाहता है।

लॉकडाउन में फंस गया था बेटा

लॉकडाउन में फंस गया था बेटा

निजामुद्दीन ने 12वीं की परीक्षा पास कर ली है और इस समय वह एमबीबीएस एंट्रेस के लिए कोचिंग कर रहा है। वह 12 मार्च को अपने दोस्त को छोड़ने नेल्लोर के रहमताबाद गया था। वह कुछ दिन उसके साथ रहा। कुछ दिन बाद कोरोना के चलते लॉकडाउन की घोषणा हो गई, जिसके चलते वह वहीं फंस गया। वह घर लौटना चाहता था लेकिन कोई जरिया नहीं था। रजिया बेगम ने तय किया कि वह बेटे को घर लेकर आएंगी। उन्होंने अपने बड़े बेटे को पुलिस के डर से नहीं भेजा। कार से जाने के बजाय उन्होंने स्कूटी से जाना तय किया।

रजिया बेगम के जज्बे की हो रही है तारीफ

रजिया बेगम के जज्बे की हो रही है तारीफ

6 अप्रैल की सुबह वह घर से निकलीं और लगातार स्कूटी चलाते हुए वह अगले दिन दोपहर में नेल्लोर पहुंच गईं। बेटे को साथ लेकर वह वहां से निकलीं और बुधवार शाम वह बोधन पहुंच गईं। रजिया बताती हैं कि वह रोटियां घर से रखकर ले गई थीं. रास्ते में वह पेट्रोल पंप से पेट्रोल भराती रहीं और अपनी मंजिल की ओर बढ़ती रहीं। रजिया बेगम के जज्बे की हर कोई तारीफ कर रहा है।

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