भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित की नई तकनीक,बड़ी दुर्घटनाओं में आसानी से पता चल सकेगा DNA
अमूमन ऐसा होता है कि किसी बड़ी दुर्घटना के दौरान मारे गए लोगों का DNA नहीं मिल पाता ऐसे में भारतीय वैज्ञानिकों ने यह नई तकनीक विकसित की है।
हैदराबाद। जब भी कोई घटना, दुर्घटना या मर्डर होता है तो पुलिस और फॉरेंसिक टीमें संबंधित लोगों के डीआक्सी राइबोज न्यूक्लिक एसिड यानी DNA की जरूरत होती है।
इसी से जुड़ी एक खोज में हैदराबाद में स्थित सेंटर फॉर डीएनए फिंगर प्रिंटिंग एण्ड डायगोनिस्टिक्स (सीडीएफडी) ने 70 जेनेटिक मार्कर्स का एक सेट विकसित किया है जिसकी मदद से भारतीय जनसंख्या के डीएनए प्रोफाइल की जानकारी आसानी से मिल सकती है।

आसानी से लगा सकेंगे पता
नए जेनेटिक मार्कर्स की मदद से फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स, किसी अपराध की जांच में आसानी से यह पता लगा सकेंगे कि पीड़ित के साथ क्या हुआ था।
डीएनए प्रोफाइल की मदद से खोदकर निकाले गए शरीर, हवाई यात्रा में नष्ट हुए शरीर और बुरी तरह से नष्ट हो चुके शरीरों के फॉरेंसिक सैंपेल आसानी से मिल सकते हैं।
सीडीएफडी लैब साइंटिस्ट इन चार्ज डॉक्टर एन मधुसूदन रेड्डी और उनके एसोसिएट अनुजीत सरकार ने अपनी खोज का प्रकाशन एक अंतरराष्ट्री. फॉरेंसिक जरनल में प्रकाशित कराई है, जिसका शीर्षक 'SNP-based panel for human identification for Indian populations' है।
इस लेख में डॉक्टर रेड्डी ने लिखा है कि ऐसे किसी मामले में जिसमें हड्डिया खोज कर निकाली गई हों या फिर शरीर जल चुका हों, जहां DNA पाना बेहद मुश्किल होता है, ऐसी स्थिति में मौजूदा संक्षिप्त तरीका Tandem Repeat (STR-based markers) अमूमन असफल हो जाता है।
वैरिएशन का ये कॉमन फॉर्म
SNPs (Single Nucleotide Polymorphisms) में ह्यूमन जेनेटिक वैरिएशन का कॉमन फॉर्म पाया जाता है। यह एक अकेला बदलाव है ,जो DNA सिक्वेंस में पाया जाता है। इसकी मदद से वैकल्पिक न्यूक्लियोटाइड को एक जगह मिलती है।
इस संबंध में इससे पहले की गई स्टडीज में भारतीयों को शामिल नहीं किया गया था।
रेड्डी ने कहा कि अब हमने भारतीय जनसंख्या के SNP आधारित पैनेल डिजाइन किया है। कहा कि इसका फायदा यह है कि इसकी मदद से उन लोगों के बारे में भी जानकारी हासिल कर सकते हैं, जो इससे मेल खाते हैं।












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