हिमाचल के चुनावी नतीजों पर टिका है इन 10 दिग्गज नेताओं का राजनैतिक भविष्य
शिमला। मतगणना के बाद आने वाले चुनाव परिणाम हिमाचल की राजनीति को जहां नई दिशा देंगे वहीं चुनाव मैदान में उतरे प्रदेश के कई दिग्गज नेताओं का राजनैतिक भविष्य भी चुनाव परिणाम तय करेंगे। चुनाव लड़ रहे कई नेता सालों से लोगों के दिलों पर राज कर प्रदेश की राजनिति में अपना दबदबा कायम किये हैं। लिहाजा यही नेता अगर चुनाव हारते हैं, तो उन्हें अगले पांच साल तक इंतजार करना होगा। तब तक तो बहुत देर हो चुकी होगी। कई नेता ऐसे हैं, जिनकी बढ़ती उम्र के चलते यह चुनाव खास मायने रखता है। चुनाव में इन दिग्गज नेताओं की साख व राजनीतिक भविष्य भी दांव पर है।

वीरभद्र सिंह
कांग्रेस के सातवीं बार मुख्यमंत्री प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे वीरभद्र सिंह (83) इस बार सोलन जिला के अर्की विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं। वह अपने राजनीतिक जीवन में रामपुर, रोहड़ू, जुब्बल-कोटखाई तथा शिमला ग्रामीण के विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में वह शिमला ग्रामीण से निर्वाचित हुए थे। वीरभद्र सिंह 1983, 1985, 1990, 1993, 1998, 2003, 2007 तथा 2012 में विधायक चुने गए। लिहाजा अगर वह इस बार चुनाव जीतते हैं व पार्टी को बहुमत मिलता है, तो निसंदेह वीरभद्र सिंह के हाथों ही प्रदेश की सत्ता होगी।

प्रेम कुमार धूमल
नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की उम्र इस समय 73 साल हो चुकी है। भाजपा ने उनको मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किया है। हलांकि उनकी बढ़ती उम्र उनके राजनैतिक भविष्य पर तलवार की तरह लटकी है। वह इस बार सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं। वर्ष 2012 में वह हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र से जीत कर विधानसभा में पहुंचे थे। वर्ष 1998 के विधानसभा चुनाव में वह बमसन से निर्वाचित हुए तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। भाजपा को बहुमत मिलने की सूरत में इस समय तो धूमल ही अगले सीएम होंगे लेकिन पांच साल तक वह सत्ता में बने रहेंगे कि नहीं इस पर जरूर संदेह है। चूंकि भाजपा पहले 75 पार कर चुके नेताओं को सक्रिय राजनिति से दूर कर रही है।

गुलाब सिंह ठाकुर
कभी 27 वर्ष की आयु में जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ कर विधानसभा पहुंचने वाले भाजपा नेता गुलाब सिंह ठाकुर प्रदेश की राजनीति के उन पुराने खिलाड़ियों में शामिल हैं,जो दशकों से प्रदेश की राजनीति में वर्चस्व बनाए हुए हैं। विधानसभा अध्यक्ष पद का दायित्व संभाल चुके गुलाब सिंह कांग्रेस पार्टी के टिकट पर भी चुनाव लड़ चुके हैं। अपने राजनीतिक जीवन में 11वीं बार चुनाव मैदान में उतरे ठाकुर गुलाब सिंह को 7 बार जीत प्राप्त हुई है।। 70 वर्षीय ठाकुर गुलाब सिंह एक बार पुन: चुनाव मैदान में अपना दमखम दिखा रहे हैं लेकिन उन्हें इस बार जोगिन्दर नगर में आजाद प्रत्याशी ने खासी परेशानी दी है।

सुजान सिंह पठानिया
कांगड़ा के फतेहपुर से चुनाव मैदान में उतरे कांग्रेस नेता सुजान सिंह पठानिया (75) वर्ष 1977 के विधानसभा चुनाव में पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। उसके पश्चात वह वर्ष 1990, 1993, 2003 व 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में विजयी रहे थे, वहीं एक उपचुनाव में भी सुजान सिंह पठानिया जीत दर्ज करने में सफल रहे थे। एक बार फिर कांग्रेस टिकट पर सुजान सिंह पठानिया चुनाव मैदान में हैं लेकिन यहां उन्हें भाजपा के बागी उम्मीदवार राजन सुशांत से चुनौती मिली है।

विप्लव ठाकुर
देहरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव में उतरी कांग्रेस दिग्गज विप्लव ठाकुर (74) की प्रतिष्ठा भी इस चुनाव से जुड़ी हैं। वर्तमान राज्यसभा सांसद विप्लव ठाकुर 5 बार विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं, जिनमें से 3 बार वह चुनाव जीतने में सफल रही हैं तो 2 बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। विप्लव ठाकुर को 1985, 1993 व 1998 के विधानसभा चुनाव में जीत मिली थी तो वर्ष 1990 और 2003 में हार का सामना करना पड़ा था। उन्हें भाजपा व आजाद प्रत्याशी ने तिकोने मुकाबले में घेर रखा है।

ठाकुर कौल सिंह
जनता पार्टी से अपनी चुनावी पारी आरंभ करने वाले कांग्रेस नेता ठाकुर कौल सिंह (72) के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण है। 9 बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके ठाकुर कौल सिंह को 8 बार जनता का विश्वास प्राप्त हुआ तथा मात्र 1990 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। मंडी जिला के द्रंग विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरे ठाकुर कौल सिंह के राजनीतिक भविष्य की दशा व दिशा को भी ये चुनाव निर्धारित करेंगे। इस बार उन्हें खूब पसीना बहाना पड़ा है जिससे उनकी जीत किसी करिश्मे से कम नहीं होगी।

गंगूराम मुसाफिर
राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी कांग्रेस के दलित नेता गंगूराम मुसाफिर (72) 7 बार विधायक रह चुके हैं। वर्ष 1982 से निरंतर 6 चुनाव कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में तथा एक बार निर्दलीय चुनाव जीत चुके गंगूराम मुसाफिर को वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था। कांग्रेस ने एक बार फिर गंगूराम मुसाफिर पर अपना भरोसा जताते हुए पच्छाद विधानसभा क्षेत्र से उन्हें चुनावी समर में उतारा है।

जी.एस. बाली
ब्राहम्ण होते हुये 1998 में ओ.बी.सी. बहुल नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लडक़र विधानसभा पहुंचने वाले जी.एस. बाली निरंतर चार बार चुनाव जीत चुके हैं। वर्तमान कांग्रेस सरकार में मंत्री परिषद में पहरवहन मंत्री जी.एस. बाली के लिए भी विधानसभा चुनाव साख का प्रश्न बन चुका है। इस बार बाली ने खतरा महसूस करते हुये भाजपा में जाने की कोशिश भी की ,लेकिन बात नहीं बनी। अगर वह चुनाव हारते हैं तो उनकी राजनैतिक पारी का इस चुनाव से ही अंत हो जायेगा।

रविंद्र सिंह रवि
पांच बार विधानसभा चुनाव जीत चुके भाजपा नेता रविंद्र सिंह रवि दूसरी बार देहरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं। उन्होंने वर्ष 1993 के विधानसभा चुनाव में थुरल विधानसभा क्षेत्र से अपने राजनीतिक जीवन को प्रारंभ किया। वर्ष 2012 वह देहरा से बड़े अंतर से जीत दर्ज करने में सफल रहे। इस बार वह चुनाव जीते व भाजपा सरकार बनी तो रवि कैबिनेट मंत्री होंगे।

मनसा राम
करसोग से कांग्रेस प्रत्याशी मनसा राम (76) ने वर्ष 1967 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ कर प्रदेश विधानसभा में दस्तक दी थी। वर्ष 1972 व 1982 में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीते तथा वर्ष 1998 में मनसा राम हिमाचल विकास कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। वर्ष 2012 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते। यह चुनाव उनके लिये खास मायने रखता है। उनकी हार भाजपा नेता जय राम ठाकुर को नया राजनैतिक जीवन देगी।












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