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हिमाचल प्रदेश की वो 10 सीटें जिससे तय होगी सूबे में सत्ता, जहां से आते हैं प्रदेश के कद्दावर नेता

By Gaurav Dwivedi
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    शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कुछ ऐसे प्रमुख चुनाव क्षेत्र हैं, जहां बड़े नेताओं का राजनीतिक भविष्य टिका है। उनकी हार-जीत बड़ी मायनें रखती है। हमीरपुर चुनाव क्षेत्र के नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल का राजनीतिक भविष्य तय करेगा। कांग्रेस इस चुनाव क्षेत्र से कई प्रयोग कर चुकी है लेकिन सफलता हासिल नहीं कर सकी। इस पर चुनाव क्षेत्र में कांग्रेस बहुत कमजोर नजर आ रही है। 2012 के चुनावों में कांग्रेस ने धूमल को घेरने के उद्देश्य से भाजपा से ही कांग्रेस में आए नरिंदर ठाकुर को उम्मीदवार बनाया था। नरिंदर 9302 वोट से पराजित हुए थे। भाजपा ने कांग्रेस से 21.05 प्रतिशत वोट ज्यादा प्राप्त किए थे। अब नरिंदर ठाकुर भाजपा में घर वापसी करके सुजानपुर से विधायक बन चुके हैं। कांग्रेस इस बार फिर किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में है जो भाजपा के शीर्ष नेता को अपने विधानसभा क्षेत्र में ही घेर सके। इस वक्त कांग्रेस से पूर्व विधायक कुलदीप सिंह पठानिया, कमल पठानिया, सुनील दत्त बिट्टू और हाल ही में भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में आए विनोद ठाकुर टिकट की दौड़ में बताए जाते हैं। लेकिन कार्यकर्ता की नजर में कुलदीप पठानिया बेहतर मुकाबला कर सकते हैं। इस क्षेत्र में भाजपा कांग्रेस से हर लिहाज से बहुत आगे दिखाई देती है।

    हिमाचल प्रदेश की 10 सीटें जो तय करेगी सत्ता

    Ten Assembly seats in Himachal Pradesh which decide the mandate of election 2017

    जिला कांगड़ा में नगरोटा-बगवां विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस के दिग्गज गुरमुख सिंह बाली 1998 से चुनाव जीतते आ रहे हैं। भाजपा की कभी मजबूत सीट रही ये विधानसभा अब भाजपा के लिए चुनौती बन चुकी है। बाली के बारे में बीच बीच में ऐसे संकेत भी आए कि वो भाजपा में जा सकते हैं।बाली ने न कभी इस तरह की खबरों का खंडन किया और न ही सही होने की पुष्टि की। इन संकेतों से भाजपा उम्मीदवार भी यहां असमंजस की स्थिति में चलते रहे। नतीजा ये की बाली ने अपने खिलाफ विपक्ष को मजबूत ही नहीं होने दिया। 2012 के चुनावों में बाली 2743 वोट से निर्दलीय अरुण कुमार को हरा कर चुनाव जीते थे। अरुण कुमार कूका ने 20883 वोट ले कर सबको हैरत में डाल दिया था। अब कूका भाजपा में शामिल हो चुके हैं और टिकट के प्रबल दावेदार हैं। हालांकि बाली के खिलाफ 2003 और 2007 का चुनाव लड़ चुके मंगल चौधरी भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं लेकिन अरुण कुमार कार्यकर्ताओं की पहली पसंद नजऱ आ रहे हैं। यहां भाजपा को बाली का किला भेदने के लिए खास रणनीति और कड़ी मेहनत की ज़रूरत है। बाली भाजपा से आगे दिखाई देते हैं। अगर भाजपा ने यहां अरूण कूका को ही मैदान में उतार दिया तो बाली मुशिकल में पड़ेंगे।

    सूबे में वही करेगा राज जिसने क्या यहां 'विकास'

    Ten Assembly seats in Himachal Pradesh which decide the mandate of election 2017

    जिला कांगड़ा में धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र भी अपना एक खास महत्व रखता है। यहां से कांग्रेस सरकार में मौजूदा मंत्री सुधीर शर्मा विधायक हैं। पुनर्सीमांकन के बाद अपनी परम्परागत बैजनाथ सीट आरक्षित होने की वजह से सुधीर ने नए क्षेत्र धर्मशाला का रुख किया था। 2012 में सुधीर ने भाजपा के वरिष्ठ नेता किशन कपूर को 5000 वोट से मात दे कर इतिहास रचा था। धर्मशाला को प्रदेश की दूसरी राजधानी, नगर निगम बना कर सुधीर ने कई सौगात दी हैं। इस वक्त सुधीर मजबूत नजर आ रहे हैं। उधर भाजपा में किशन कपूर के अतिरिक्त ओंकार नहरिया टिकटार्थी हैं लेकिन किशन कपूर बाकी आवेदकों से आगे नजऱ आ रहे हैं। इस क्षेत्र में गद्दी जाति के भी वोट अधिक हैं। हाल ही में हुए गद्दी प्रकरण पर जनता के रोष का शिकार कांग्रेस को होना पड़ सकता है लेकिन कांग्रेस वर्तमान हालात में बढ़त में नजर आ रही है।

    जनता यहां से जिसे करेगी पसंद उसकी पार्टी जुटाएगी बहुमत

    Ten Assembly seats in Himachal Pradesh which decide the mandate of election 2017

    मंडी जिला में सिराज विधानसभा क्षेत्र भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जय राम ठाकुर का मजबूत किला है। जय राम 1998 से लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं।2012 में उन्होंने कांग्रेस की तारा ठाकुर को 5752 वोट से पराजित किया था। इस बार कांग्रेस से तारा ठाकुर, चेत राम ठाकुर और जगदीश रेड्डी उम्मीदवार नजर आ रहे हैं। चेत राम ठाकुर का इलाके में अपना खास प्रभाव है। जय राम ठाकुर इस बार मजबूत स्थिती में नहीं हैं। मंडी जिला में मंडी सदर विधानसभा क्षेत्र पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री पण्डित सुख राम का ये गृह क्षेत्र है।उनके राजनीति से सन्यास लेने के बाद उनके बेटे अनिल शर्मा इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।अनिल एक ईमानदार नेता के रूप में जाने जाते हैं।

    Ten Assembly seats in Himachal Pradesh which decide the mandate of election 2017

    2012 में उन्होंने भाजपा के दुर्गा दत्त को 3930 वोट से हराया था। इस बार ऐसी भी सूचनाएं हैं कि सुख राम अपनी तीसरी पीढ़ी यानी अनिल के बेटे आश्रय को भी लॉन्च कर सकते हैं। फिलहाल कांग्रेस में अनिल शर्मा को कोई चुनौती नजर नहीं आ रही है।दूसरी ओर भाजपा में टिकट की दौड़ में दुर्गा दत्त, परवीन शर्मा,सुमन ठाकुर,नरिंदर गुलेरिया और दीपक गुलेरिया शामिल हैं। लेकिन भाजपा कार्यकर्ता प्रवीण की पैरवी करता नजर आया।गौरतलब है कि एडवोकेट प्रवीण शर्मा भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी है।वर्ष 2007 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने प्रवीण को ही टिकट दिया था लेकिन नामांकन के दो रोज़ बाद दुर्गा दत्त कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए और पार्टी ने प्रवीण का टिकट काट कर दुर्गा दत्त को थमा दिया। भाजपा कार्यकर्ता प्रवीण के त्याग, बलिदान का सिला मांगता नजर आया। फिलहाल परवीन लोगों की पहली पसन्द नजर आ रहे हैं। कांग्रेस यहां पर बढ़त में दिखाई दे रही है।

    Ten Assembly seats in Himachal Pradesh which decide the mandate of election 2017

    मंडी जिला में द्रंग विधानसभा क्षेत्र ,कांग्रेस के दिग्गज ठाकुर कौल सिंह इस क्षेत्र से लगातार नौवीं बार विधायक बने हैं।ठाकुर कौल सिंह का ये अजेय किला तोडने के लिए हर बार भाजपा को मशक्कत करनी पड़ती है लेकिन विजय हासिल करना अभी भी चुनौती बना हुआ है।भाजपा से इस बार टिकट की दौड़ में ब्रिगेडियर(रि.) खुशहाल चन्द और भाजपा जिला अध्यक्ष जवाहर ठाकुर प्रबल दावेदारों में शामिल हैं।2012 में कौल सिंह ने भाजपा के जवाहर ठाकुर को 2232 वोट से पराजित किया था।भाजपा कार्यकर्ता यहां जीत चाहता है।इस बार खुशहाल चन्द के पक्ष में कार्यकर्ता नजऱ आ रहा है।खुशहाल कारगिल युद्ध के हीरो रहे हैं। इस बार मुक़ाबल कड़ा होने की संभावना है । हालांकि कौल सिंह को अपनी ही पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष पूर्ण चन्द से पार पाना होगा। पूर्ण चन्द अपनी समानांतर गतिविधियां चलाये हुए हैं जो कांग्रेस के लिए सर दर्द साबित हो सकती हैं। यहां पर किसी बड़े उलटफेर की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।

    Ten Assembly seats in Himachal Pradesh which decide the mandate of election 2017

    मंडी जिला में जोगिन्दरनगर विधानसभा क्षेत्र में अजय जम्वाल,गुलाब सिंह, प्रकाश राणा इन तीन नामों की वजह से इन दिनों ये क्षेत्र खासा चर्चा में है। यहां से संघ के राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत स्वयं सेवक अजय जम्वाल का नाम मुख्यमंत्री के रूप में काफी समय से राजनीतिक गलियारों में चर्चा में है।उनके छोटे भाई पंकज जम्वाल को यहां से फील्ड कर बड़े भाई के लिए जमीन तैयार करने की सूचनाएं आ रही हैं।हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है ये तो भाजपा आलाकमान ही बेहतर जानती होगी।वर्तमान में यहां से भाजपा के वरिष्ठ नेता गुलाब सिंह ठाकुर विधायक हैं।उन्होंने 2012 में कांग्रेस के ठाकुर सुरिंदर पाल को 5916 मतों से हराया था। गुलाब सिंह इस क्षेत्र के कद्दावर नेता हैं लेकिन इस बार दो तरफा आक्रमण में घिरे लगते हैं।

    जानिए क्या है कांग्रेस के 'विकास' प्रदेश की हकीकत!

    तीसरे दिलचस्प उम्मीदवार प्रकाश राणा हैं जो सभी नेताओं को चिंतित किये हुए हैं। प्रकाश राणा विदेशों में बड़े कारोबारी हैं और पिछले एक वर्ष से क्षेत्र में अपनी समानांतर सामाजिक गतिविधियों चला कर भीड़ खींच रहे हैं।करोड़ों रुपए प्रकाश अपनी जेब से क्षेत्र में दान करके जनता में अपनी लहर बनाते दिख रहे हैं। भाजपा को उनकी मजबूत,प्रभावशाली गतिविधियों का शायद आभास हो गया है तभी तो भाजपा के वरिष्ठ नेता उनको टिकट देने की वकालत करने लगे हैं। क्षेत्र के विस्तृत दौरे से प्रकाश ठाकुर की उपस्थिति साफ नजऱ आई। ये व्यक्ति सभी संभावित प्रत्याशियों को पीछे छोड़ता नजऱ आ रहा है। बहुतायत में कांग्रेस-भाजपा के कार्यकर्ता भी प्रकाश राणा के समर्थन में नजऱ आए। इस वक़्त प्रकाश सभी प्रत्याशियों पर भारी नजऱ आ रहे हैं। भाजपा को इस सीट पर प्रत्याशी तय करना एक चुनौती से कम नहीं है। यहां भाजपा में असमंजस की स्थिति नजऱ आती है।गुलाब सिंह,पंकज जम्वाल और प्रकाश राणा में से किसी एक को चुनना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। फिलवक्त राणा सब पर भारी नजर आ रहे हैं।

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    शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह कर रहे हैं। राजा के इस मजबूत किले में सेंध लगना भाजपा के लिए पहाड़ की चुनौती के समान नजऱ आता है।2012 में वीरभद्र सिंह ने एक तरफा मुक़ाबके में भाजपा के ईश्वर रोहाल को 20000 वोट से हराया था।यहां पर भाजपा की ओर से टिकट के चाहवानों में ईश्वर रोहाल,रवि मेहता,सुनील ठाकुर और किरण बाबा दौड़ में हैं। ईश्वर रोहाल अभी भी भाजपा कार्यकर्ताओं की पहली पसंद नजऱ आ रहे हैं। कांग्रेस यहां पर मजबूत स्थिति में नजऱ आ रही है। हह्वालांकि इस बार यहां से वीरभद्र सिंह नहीं, बल्कि उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह चुनाव मैदान में हैं। सिरमौर जिला के नाहन विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के चाणक्य माने जाने वाले डॉ. राजीव बिंदल विधायक हैं।बिंदल भाजपा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे और सोलन विधानसभा सीट से चुनाव जीते थे।

    2012 में पुनर्सीमांकन में सोलन सीट आरक्षित होने के बाद बिंदल ने सिरमौर जि़ला के नाहन का रुख कर सबको चौंका दिया था।उन्होंने डॉ यशवंत सिंह परमार के सुपुत्र कुश परमार को 12824 वोट से हरा कर सबको चौंका दिया था।इस बार फिर बिंदल नाहन से ही भाजपा के प्रत्याशी हैं।कांग्रेस पर हर समय तीखा हमला करने के लिए मशहूर बिंदल को घेरने के लिए कांग्रेस भी विशेष योजना बना रही है।इस क्षेत्र के दौरे में जब हमने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से राय जानी तो अजय बहादुर सिंह,इकवाल मोहम्मद,अजय सोलंकी,सत्या परमार और कुश परमार सम्भावित प्रत्याशी के रूप में नजऱ आए।कार्यकर्ताओं की राय में बिंदल को घेरने के लिए इक़बाल सबसे बेहतर उम्मीदवार हो सकते हैं। भाजपा यहाँ मजबूत स्थिति में नजर आ रही है।

    शिमला जिला में ठियोग विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की वयोवृद्ध नेत्री श्रीमति विद्या स्टॉक्स विधायक हैं। 2012 में उन्होंने भाजपा के राकेश वर्मा को 4276 वोट से पराजित किया था।विद्या स्टॉक्स वीरभद्र सिंह की कभी कट्टर विरोधी रही हैं। सरकार में जनस्वास्थ्य विभाग सम्भाल रही स्टॉक्स के लिए अबकी राहें आसान नजऱ नहीं आ रही हैं।हालांकि इस क्षेत्र से कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता बेहतर उम्मीदवार होने की क्षमता रखते हैं लेकिन स्टॉक्स की वरिष्ठता के आगे कोई भी दावेदारी जताने से बचते रहे हैं।इस क्षेत्र में संगठनात्मक रूप से भाजपा कांग्रेस से बढ़त में दिखाई देती है। सत्ता विरोधी लहर का असर इस क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। लेकिन इस बार खुद ही स्टोक्स ने चुनाव मैदान से हटने का ऐलान कर दिया है। उनकी घोषणा होते ही वीरभद्र सिंह ने यहां से चुनाव लडऩे की दावेदारी जता दी। लिहाजा वीरभद्र सिंह इस बार यहां से चुनाव लड़ेंगे।

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    English summary
    Ten Assembly seats in Himachal Pradesh which decide the mandate of election 2017

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