अडानी पावर की याचिका पर हिमाचल सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, जानें पूरा मामला?
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (02 सितंबर) को हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार से अडानी पावर लिमिटेड की याचिका पर जवाब मांगा है। याचिका में किन्नौर जिले में दो जलविद्युत परियोजनाओं के संबंध में राज्य सरकार से ब्याज सहित 280 करोड़ रुपए लौटाने की मांग की गई है।
जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने अडानी पावर द्वारा हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुखविंदर सिंह सुखू सरकार को नोटिस जारी किया है। अडानी पावर ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है।

अडानी पावर ने हाई कोर्ट के फैसले से राहत पाने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने अपनी याचिका में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी, जिसमें जल विद्युत परियोजना से संबंधित 280 करोड़ रुपए का प्रीमियम वापस करने के एकल पीठ के फैसले को पलट दिया था।
18 जुलाई को जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने हिमाचल सरकार की ओर से दायर चुनौती के बाद अडानी पावर के रिफंड दावे को खारिज कर दिया था।
जानिए क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पूरा मामला दो जलविद्युत परियोजनाओं, जंगी थोपन और थोपन पोवारी से जुड़ा है, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 480 मेगावाट है। अक्टूबर 2005 में हिमाचल प्रदेश सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए विज्ञापन दिया था। बोली दस्तावेज नवंबर 2005 में जारी किए गए थे, जिन्हें 16 मार्च 2006 तक प्रस्तुत किया जाना था।
1 दिसंबर, 2006 को ब्रेकल कॉर्पोरेशन को राज्य सरकार से सबसे ऊंची बोली लगाने वाले के रूप में आशय पत्र मिला। उन्हें पूर्व-कार्यान्वयन समझौते पर हस्ताक्षर करने और अग्रिम प्रीमियम का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, ब्रेकल समय पर भुगतान करने या परियोजनाओं को लागू करने के लिए कदम उठाने में विफल रहा।
अडानी पावर की भागीदारी
ब्रेकेल ने बाद में 49% इक्विटी अडानी पावर को हस्तांतरित करने पर सहमति व्यक्त की, जिसने फिर परियोजना के लिए अग्रिम प्रीमियम का भुगतान किया। इस भुगतान के बावजूद ब्रेकेल द्वारा प्रारंभिक गलत बयानी और महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाने के बारे में मुद्दे उठे।
उच्च न्यायालय ने कहा कि "ब्रेकल ने गलत बयानी और तथ्यों को छिपाने के आधार पर अपने पक्ष में निर्णय प्राप्त किया था।" न्यायालय ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में ना तो ब्रेकल और ना ही उसकी ओर से कोई भी व्यक्ति धन वापसी का दावा कर सकता है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने शुरू में 4 सितंबर, 2015 को रिफंड जारी करने का फैसला किया था। हालांकि, अडानी पावर का दावा है कि यह रिफंड ना मिलने के कारण उन्हें आर्थिक रूप से नुकसान हुआ है। ऐसे में खंडपीठ ने 2022 में एकल पीठ के फैसले के खिलाफ हिमाचल प्रदेश द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया।
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