डेरा सच्चा सौदा के अखबार 'सच कहूं' के बारे में जानिए कुछ बातें
शिमला। डेरा सच्चा सौदा ने लगभग तीन साल पहले 'सच कहूं' नाम से एक हिन्दी अखबार छापना शुरू किया था। कुछ ही समय में यह अखबार खासा लोकप्रिय हो गया जिसकी अचछी खासी प्रसार संख्या है। उसके बाद डेरा ने एक अंग्रेजी वीकली छापना शुरू किया। देखते ही देखते उनके प्रकाशन पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, राजस्थान से होते हुये उत्तर प्रदेश तक पहुंच गए और हाथों हाथ बिकने भी लगे। अखबार ने सिरसा में बाकायदा डेस्क स्थापित किया था। करीब तीन साल पहले इसका हिमाचल एडीशन शुरू हुआ तो यहां नगरी चच्चियां डेरे में भी डेस्क बनाया गया। यहां से हिमाचल का पेज बनाकर चंडीगढ़ भेजा जाता था। इस दौरान पंजाबी एडीशन भी छपना शुरू हुआ। बीच में एक मैगजीन भी छापी गई जो बाद में बंद हो गई लेकिन दूसरे अखबार आज भी लगातार छप रहे हैं।

डेरा इस साल के अंत तक चंडीगढ़, सिरसा पालमपुर और बठिंडा में अखबार की प्रेस लगाने की तैयारी थी जो शायद अब पूरी नहीं हो पायेगी। माना जाता है कि डेरा को लोकप्रिय बनाने में इस अखबार का बहुत बड़ा योगदान रहा है। चूंकि अखबार की अपनी ही एक निति थी। जिसके तहत इसे छापा जाता था। इस अखबार में ज्यादातर डेरा की ओर से आयोजित सत्संग व दूसरी गतिविधयों की ही खबरें छपती रही हैं। इस अखबार का असर यह रहा कि दूसरे लोग भी डेरे से जुड़ते चले गए।
अखबार के लिये पत्रकारों के लिये कुछ खास हिदायतें भी थीं। मसलन किसी भी खबर में जब भी सिरसा का नाम आये तो वहां सरसा लिखना होता था। गुरमीत राम रहीम ने सिरसा का नाम बदलकर सरसा किया हुआ है। वहीं बलात्कार शब्द को लिखने पर भी मनाही थी। उसकी जगह खबर में दुष्कर्म लिखना होता था। अगर कोई पत्रकार अपने नाम के साथ इंसा सरनेम इस्तेमाल करे तो समझो सोने पे सुहागा। उसे सिरसा में खासी तरजीह मिलती थी और उसे डेरा के लोग अपना ही मानते थे। वहीं अखबार को ब्लाक स्तर पर बनाये गये वालंटियर डेरा प्रेमियों तक पहुंचाते थे। हर शहर में जितने भी डेरा प्रेमी हैं उसके हिसाब से अखबार भेजी जाती थी और सभी लोगों से पहले ही एक साल के पैसे ले लिये जाते थे।
बताया जाता है कि मिडिया की जरूरत डेरे को कुछ साल पहले उस समय महसूस हुई जब सिरसा के पत्रकार रामचंदर छत्रपति ने डेरे में यौन शोषण की खबर को अपनी अखबार में छाप दिया। उसके बाद उनकी हत्या हुई तो हरियाणा से लेकर चंडीगढ़ तक विभिन्न पत्रकार संगठनों ने डेरा का जमकर विरोध किया। जिससे डेरा की छवि को खासा नुकसान हुआ। उसके बाद राम रहीम ने अपनी ही अखबार निकालने की ठान ली।












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