वीरभद्र-सुक्खू के बीच चल रहे घमासान का समाधान निकालेंगे राहुल
फिलवक्त पार्टी आलाकमान ने दोनों गुटों को संयम बरतने की सलाह दी है जिससे वीरभद्र सिंह के तेवर थोड़े नरम पड़े हैं।
शिमला। हिमाचल कांग्रेस में सीएम वीरभद्र सिंह व पार्टी अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू के बीच चल रहा घमासान अब राहुल गांधी के विदेश दौरे के बाद ही सुलट पायेगा। फिलवक्त पार्टी आलाकमान ने दोनों गुटों को संयम बरतने की सलाह दी है जिससे वीरभद्र सिंह के तेवर थोड़े नरम पड़े हैं। पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस माह के अंत तक हिमाचल कांग्रेस के बड़े नेताओं की बैठक राहुल गांधी लेंगे जिसमें मौजूदा विवाद को सुलटाने का प्रयास किया जायेगा ताकि चुनावी अभियान के लिये संगठन को सक्रिय किया जा सके।

वीरभद्र के कड़े तेवर
सीएम वीरभद्र सिंह व पार्टी अध्यक्ष सुक्खू के बीच मौजूदा दौर में चल रहा घमासान दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह इन दिनों आक्रामक रुख अख्तियार किये हैं व दबाव बना रहे हैं कि चुनावों से पहले सुखविन्दर सिंह सुक्खू को हटाया जाये। इसी के चलते अब तो सार्वजनिक तौर पर भी सीएम अपनी ही पार्टी की नीतियों पर हमला बोल रहे हैं। यहां तक कि पार्टी प्रभारी सुशील कुमार शिन्दे को भी उन्होंने खरी-खोटी सुना डाली। वीरभद्र सिंह के तेवरों के चलते पार्टी का चुनाव अभियान भी प्रभावित हुआ है जिससे पार्टी का एक बड़ा वर्ग चिंता जता रहा है कि हालात यही रहे तो पार्टी को चुनावों में अच्छा खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

चुनाव न लड़ने की वीरभद्र ने दी धमकी
दरअसल अभी तक पार्टी आलाकमान वीरभद्र सिंह के दबाव को अनदेखा कर पार्टी अध्यक्ष को इस समय बदलने को इनकार कर चुका है लेकिन वीरभद्र सिंह अपनी मांग पर अड़े हैं व कह चुके हैं कि अगर उनकी मांग को माना नहीं गया तो चुनाव नहीं लड़ेंगे। जाहिर है अगर ऐसा होता है कि कांग्रेस पार्टी को प्रदेश में नुकसान उठाना पड़ सकता है। वीरभद्र सिंह का प्रदेश में अपना प्रभाव है। उनके बिना चुनाव जीतना पार्टी के लिये आसान नहीं होगा।

वीरभद्र के रवैये से आलाकमान चिंतित
यही वजह है कि कांग्रेस आलाकमान वीरभद्र सिंह के तेवरों को देखते हुये पार्टी आलाकमान खासा चिंतित है। पार्टी को लेगता है कि चुनावी बेला पर पार्टी का विवाद जल्द नहीं सुलटा तो हिमाचल प्रदेश भी उसके हाथ से निकल सकता है। पार्टी की पहले ही गिने चुने प्रदेशों में सरकार बची है। इस समय हिमाचल प्रदेश के अलावा कर्नाटक , मिजोरम, पंजाब, पुडुचेरी और मेघालय में ही कांग्रेस की सरकारें बची हैं। पार्टी अब हिमाचल को भी अपने हाथ से गंवाना नहीं चाहती।

वीरभद्र के साथ राहुल की बैठक की तैयारी
यही वजह है कि पार्टी आलाकमान का संदेश लेकर पार्टी की सह प्रभारी सांसद रंजीत रंजन ऊना में सीएम वीरभद्र सिंह से मिली हैं व उन्हें दिल्ली बैठक के बारे में बताया। दरअसल इससे पहले दिल्ली में जो बैठक बुलाई गई थी। उसका वीरभद्र सिंह ने बहिष्कार किया था। इसी के चलते अब दोबारा दोनों नेताओं को राहुल गांधी के साथ बिठाने की तैयारी शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि समझौते की टेबल पर क्या फार्मूला तैयार होता है। वीरभद्र सिंह इसके लिये तैयार होते भी हैं कि नहीं। वहीं सुक्खू आसानी से अपने हथियार डाल देंगे।












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