शिमला में शक्ति प्रदर्शन कर सांसद प्रतिभा सिंह ने संभाली हिमाचल कांग्रेस की कमान
शिमला, 5 मई। गुरुवार को शिमला में अपने शक्ति प्रदर्शन के साथ मंडी की सांसद प्रतिभा सिंह ने हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष की कमान संभाल ली। शिमला के हाली लाज से लेकर चौड़ा मैदान तक जश्न का माहौल पूरा दिन बना रहा। खासकर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समर्थक दूरदराज के इलाकों से यहां आये थे। लेकिन सवाल उठ रहा है कि प्रतिभा सिंह गुटों में बंटी पार्टी को चुनावों में एकजुट करने में कामयाब हो पायेंगी। प्रतिभा सिंह अपनी टीम में किसे शामिल करतीं हैं और किसे तरजीह देती हैं। इस पर सबकी नजर है।

कांग्रेस आलाकमान की ओर से किये बदलाव के बावजूद भी गुटबाजी पर लगाम लगती दिखाई नहीं दे रही है। चूंकि पार्टी में आये बदलाव से कई नेता अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। जिससे आने वाले दिनों में पार्टी में गुटबाजी बढ़ने का अंदेशा है। पार्टी में बदलाव के बावजूद राम लाल ठाकुर , चौधरी चंदर कुमार , कौल सिंह ठाकुर जैसे दिग्गज नेता दरकिनार हुये हैं। यही हाल सीएलपी लीडर मुकेश अग्निहोत्री का है। जिन्हें संगठन में कोई खास जिम्मेवारी नहीं मिली है। लेकिन उनके साथ विधानसभा में उप नेता के तौर पर हर्षवर्धन चौहान को तैनात कर उन्हें भी चौंका दिया है।

पूर्व मुख्यमंत्री प्रतिभा सिंह को कांग्रेस आलाकमान ने हाल ही में कुलदीप सिंह राठौर को हटा कर हिमाचल कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया था। और पंजाब पैटर्न पर उनके साथ चार कार्यकारी अध्यक्ष भी बने । आम तौर पर चुनाव से एक माह पहले ही चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया जाता रहा है। लेकिन इस बार चुनाव से छह माह पहले ही सुखविंदर सिंह सुक्खू को यह जिम्मेवारी सौंपी गई है। प्रतिभा सिंह के लिये अभी चुनाव न लड़ने का मापदंड तय किया गया है। जिससे सुक्खू प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख चेहरा भले ही बने हों। लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि वीरभद्र सिंह समर्थक आसानी से अपनी महत्वाकांक्षा छोड देंगे। यहां राजनीतिक गलियारों में भी यही चर्चा है कि कांग्रेस का यह प्रयोग जोखिम भरा है। इससे गुटबाजी मिटने के बजाय बढ़ भी सकती है।

वैसे अभी से ही कुछ मामलों में आपसी मतभेद उजागर होने लगे हैं। एक ओर सुक्खू खुद को प्रोजेक्ट करने में लगे हैं, व बेदाग छवि के नेता को तरजीह मिलने की वकालत भी उन्होंने की है। तो दूसरी ओर प्रतिभा सिंह ने दावा किया है कि अगला सीएम कांग्रेस आलाकमान ही तय करेगा। वहीं , पार्टी प्रभारी राजीव शुक्ला ने आज चौड़ा मैदान में अपने संबोधन में सबको साथ लेकर चलने की नसीहत पार्टी नेताओं को दी।

लेकिन माना जा रहा है कि प्रतिभा सिंह के लिये उनके अध्यक्ष के तौर पर कामकाज में उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह का दखल उनके लिये मुसीबत बन सकता है। वीरभद्र व प्रतिभा सिंह के बेटे और वर्तमान में शिमला ग्रामीण से विधायक विक्रमादित्य सिंह को एक बड़ी भूमिका पार्टी में मिल सकती है, हालांकि भ्रष्टाचार के मोर्चे पर उनकी खराब छवि को देखते हुए, यह बड़े पैमाने पर पार्टी के लिए बहुत नाराज़गी का कारण बन सकता है। यह कदम प्रदेश के सबसे बडे जिला कांगड़ा में भी बहुत नाराज़गी पैदा कर सकता है, जहाँ कांग्रेस के दिग्गज खुद को अलग-थलग महसूस कर सकते हैं और विद्रोह करने की कोशिश कर सकते हैं। इसके अलावा, राज्य इकाई के भीतर कई गुट हैं, और चुनाव के लिए समय पर उनको संभालना एक चुनौती हो सकती है। कौल सिंह ठाकुर और आनंद शर्मा जैसे लोग जी-23 का हिस्सा हैं, और भले ही उनका मजाक उड़ाया जा सकता है, लेकिन वे गुटीय चुनौतियों को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में प्रतिभा सिंह के सामने आगे का सफर मुश्किल भरा है। प्रदेश कांग्रेस में किये गये फेरबदल ने कई सवाल खड़े किये हैं।

प्रतिभा सिंह ने अपने संबोधन में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाने पर कांग्रेस हाईकमान का आभार व्यक्त किया। कहा कि सोनिया गांधी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर प्रदेश की समस्त महिलाओं को बड़ा सम्मान दिया है। कहा कि प्रदेश कांग्रेस एकजुट होकर आगे बढ़ेगी और फिर से सत्ता में आएगी। कहा कि प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के आर्शीवाद व सहयोग लेकर चलेंगी। प्रतिभा ने मंच से केंद्र की मोदी सरकार व प्रदेश सरकार पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी व किसानों-बागवानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा।












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