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भारत के वैज्ञानिकों ने किया कमाल! IIT मंडी ने बनाया ऐसा सॉफ्टवेयर, जो करेगा 'कुदरत के कहर' की भविष्यवाणी

IIT Mandi scientists develop AI algorithm Who will predict landslides and other natural disaster

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (एआई एंड एमएल) का उपयोग करते हुए एक नया एल्गोरिदम विकसित किया है। जो प्राकृतिक खतरों की भविष्यवाणी की सटीकता में सुधार करेगा। आसान शब्दों में समझें तो भूस्खलन समेत कई अन्य आपदाओं के लेकर और अधिक सटीक जानकारी हमें समय से पहले दे देगा।

समय रहते मिल जाएंगी आपदाओं की सटीक जानकारी

समय रहते मिल जाएंगी आपदाओं की सटीक जानकारी

हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, इस नई एल्गोरिदम को डॉ डेरिक्स प्रेज शुक्ला, एसोसिएट प्रोफेसर, स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग और पूर्व शोध विद्वान डॉ शरद कुमार गुप्ता द्वारा विकसित किया गया है। उन्होंने बताया कि, एल्गोरिदम भूस्खलन संवेदनशीलता मानचित्रण के डेटा असंतुलन की चुनौती से निपट सकता है। जो किसी दिए गए क्षेत्र में भूस्खलन की घटनाओं की संभावना को उजागर करता है। संस्थान ने कहा कि शोध के निष्कर्ष लैंडस्लाइड्स जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।

कई अहम जानकारियां देने में सक्षम है ये AI

कई अहम जानकारियां देने में सक्षम है ये AI

आईआईटी मंडी ने एक प्रेस बयान में कहा कि, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। एआई संभावित रूप से ऐसी बड़ी घटनाओं की भविष्यवाणी कर सकता है, खतरे के नक्शे बना सकता है, वास्तविक समय में घटनाओं का पता लगा सकता है। परिस्थिति के अनुसार जागरूकता प्रदान कर सकते हैं और निर्णय लेने में सहायता कर सकते हैं।

आपदाओं के पैटर्न की कर सकता है पहचान

आपदाओं के पैटर्न की कर सकता है पहचान

आईआईटी ने कहा कि, मशीन लर्निंग (एमएल) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक उपक्षेत्र है। जो कंप्यूटर को स्पष्ट रूप से प्रोग्राम किए बिना सीखने और अनुभव से बेहतर बनाने में सक्षम बनाता है। यह एल्गोरिदम पर आधारित है। जो मानव बुद्धि की तरह डेटा का विश्लेषण कर सकता है, पैटर्न की पहचान कर सकता है और भविष्यवाणियां या निर्णय ले सकता है।

मानव सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकता है ये एल्गो

मानव सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकता है ये एल्गो

आईआईटी के एक्सपर्ट्स ने बताया कि, इस एमएल मॉडल को सटीक रूप से प्रशिक्षित करने के लिए बड़ी मात्रा में डेटा की महत्वपूर्ण आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। विशेष रूप से भू-खतरों और प्राकृतिक आपदाओं के मामले में जहां मानव सुरक्षा को बड़ा जोखिम है।

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