IAS अफसर समेत बैंक के 8 बड़े अधिकारियों पर FIR, कास्ट भेदभाव का आरोप, पूर्व DGM ने दर्ज कराई शिकायत
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में पुलिस ने एक सीनियर IAS अधिकारी, जो कांगड़ा केंद्रीय सहकारी (KCC) बैंक के एडमिनिस्ट्रेटर हैं, और सात अन्य बड़े अफसरों के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई बैंक के ही एक पूर्व अधिकारी के.सी. भारद्वाज की शिकायत पर हुई है, जिन्होंने इन सभी पर जाति के आधार पर भेदभाव करने का गंभीर आरोप लगाया है।
दरअसल, के.सी. भारद्वाज कुछ समय पहले ही KCC बैंक के डिप्टी जनरल मैनेजर (DGM) पद से रिटायर हुए हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में कई बड़ी बातें कही हैं। उनका आरोप है कि इन आठ अधिकारियों ने मिलकर उनके खिलाफ साजिश रची और लंबे समय तक उन्हें जातिगत आधार पर परेशान किया।

- नौकरी से निकाला: भारद्वाज का कहना है कि उन्हें गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकाला गया, जिसका मकसद उन्हें समाज और ऑफिस में अपमानित करना और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाना था।
- मानसिक तनाव: उन्होंने आरोप लगाया कि इन अधिकारियों की हरकतों की वजह से उन्हें गहरा मानसिक दुख और तनाव झेलना पड़ा।
- सुनियोजित साजिश: शिकायत के मुताबिक, यह भेदभाव कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि उन्हें पेशेवर और सामाजिक रूप से अलग-थलग करने के लिए एक सोची-समझी प्लानिंग थी।
- झूठा नैरेटिव: भारद्वाज का दावा है कि बैंक के बड़े अफसरों ने उनके खिलाफ झूठी कहानियां गढ़ीं ताकि उनके खिलाफ गलत कार्रवाई की जा सके। बता दें कि उन्होंने अपनी बर्खास्तगी को कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां से उन्हें स्टे (रोक) मिल गया था।
पुलिस ने की कार्रवाई
धर्मशाला पुलिस ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया है कि FIR दर्ज कर ली गई है।
- SC/ST एक्ट: यह मामला अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(q) के तहत दर्ज किया गया है।
- जांच की प्रक्रिया: पुलिस अब शिकायतकर्ता और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज करेगी। साथ ही इस मामले से जुड़े दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की भी जांच की जाएगी। पुलिस ने साफ किया है कि सभी नामजद लोगों की भूमिका की गहराई से जांच होगी। हालांकि, अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
इन अधिकारियों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
FIR में जिन आठ लोगों के नाम शामिल हैं, वे बैंक के बहुत ही वरिष्ठ पदों पर हैं:
1. विनोद कुमार: सीनियर IAS अधिकारी, बैंक एडमिनिस्ट्रेटर और धर्मशाला डिवीजन के कमिश्नर।
2. राकेश शर्मा: कार्यवाहक जनरल मैनेजर।
3. अमित गुप्ता: जनरल मैनेजर।
4. सतवीर सिंह मिन्हास: पूर्व जनरल मैनेजर।
5. नवदीप महाजन: डिप्टी जनरल मैनेजर।
6. नवनीत शर्मा: असिस्टेंट जनरल मैनेजर।
7. कश्मीर सिंह ठाकुर: सीनियर मैनेजर।
8. विनीत कुमार: ऑफिसर ग्रेड-II।
अधिकारियों का पक्ष और भारद्वाज की मांग
दूसरी ओर, जिन अधिकारियों के नाम FIR में हैं, उनमें से कुछ का कहना है कि सिर्फ केस दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि आरोप सच साबित हो गए हैं। उनके अनुसार, पूरी सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। वहीं, के.सी. भारद्वाज ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और समय पर जांच की जाए ताकि उन्हें न्याय मिल सके।












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