फर्जी डिग्री के जरिए कर रहे थे नौकरी, अब सरकार वापस लेगी 10 साल की तनख्वाह
शिमला। जिन कंधों पर देश के भविष्य के निर्माण की जिम्मेदारी है, वहीं लोग अपने लिए फर्जी डिग्री का जुगाड़ कर प्रदेश की भावी पीढ़ी की तकदीर व तस्वीर बदलने में जुटे हैं। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में कार्यरत 21 शिक्षकों ने फर्जी डिग्री पर सरकारी नौकरी भी पा ली। बता दे कि पिछले 10 सालों तक यह मामला छुपा रहा। लेकिन एक शिकायत के बाद अब जब जांच शुरू हो गई है। जांच में पता चला है कि शिक्षकों ने अपने लिए यह डिग्रियां बिहार से खरीदी थी। जिस यूनिवर्सिटी की यह डिग्री बताई जा रही है, वहां पर शिक्षकों का कोई भी रिकार्ड नहीं है। जिस के बाद मामला पेचीदा हो गया है।

दरअसल, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड में साल 2004-05 में हुई शिक्षकों की भर्तियां संदेह के दायरे में हैं। मामले की जांच हुई तो प्रदेश के कई स्कूलों में कार्यरत करीब 21 टीजीटी और पीजीटी टीचर्स की डिग्रियों को बिहार की मगध यूनिवर्सिटी ने फर्जी करार दिया है। इतना ही नहीं विजिलेंस विभाग की जांच में भी यह डिग्रियां फर्जी निकली है। फिलहाल टीम जांच करने के बाद बिहार से लौट आई है। अब वह यह रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। इन फर्जी शिक्षकों की सरकारी नौकरी के साथ-साथ सैलरी की रिकवरी भी की जा सकती है।
बताया जा रहा है कि राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो शिमला हेडक्वार्टर में एक व्यक्ति ने इन शिक्षकों की फर्जी डिग्रियों होने की शिकायत की थी। साल 2004-2005 में प्रदेश शिक्षा विभाग में टीजीटी की भर्तियों में करीब 2 दर्जन अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने फर्जी डिग्रियां दिखाकर नौकरी प्राप्त की थी। इसके बाद कुछ शिक्षक पदोन्नत होकर पीजीटी बन गए। जब बाद में इनकी शिकायत मिली तो जांच शुरू हुई। वहां पर पता चला कि इन शिक्षकों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। फिलहाल जांच में 21 शिक्षकों का फर्जीवाड़ा ही सामने आया है। लेकिन अंदेशा जताया जा रहा है कि अगर जांच का दायरा आगे बढ़ा तो कई ओर शिक्षक इस गोलमाल में नपेंगे।












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