Himachal Political Crisis: क्यों बदल गया सियासी सीन, कांग्रेस से कहां हुई चूक, क्या बीजेपी पलट पाएगी बाजी?
Himachal Pradesh Congress Political Crisis: हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव में मुंह की खाने के बाद कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश में रिवर्स ऐक्शन लेते हुए भाजपा के 15 विधायकों को सदन से निष्कासित करवाकर राजनीतिक लड़ाई को दिलचस्प बनाने की कोशिश की है। इससे फिलहाल के लिए उसकी सरकार तो सुरक्षित हो गई है, लेकिन बाजी नहीं पलटेगी, यह कहना मुश्किल है।
68 विधायकों वाले सदन में कांग्रेस की सुखविंदर सिंह सुक्खू मंगलवार तक पूर्ण बहुमत में थी। बहुमत के लिए सिर्फ 35 विधायकों का समर्थन चाहिए था। लेकिन, सरकार के पास अपने 40 विधायक थे और तीन निर्दलीय विधायकों को मिलाकर यह आंकड़ा 43 तक जाता था। 25 एमएलए के साथ बीजेपी से कांग्रेस सरकार को किसी तरह से खतरा होने का सवाल ही नहीं था!

पहले हुए 6 बागी, फिर 26 की नाराजगी बताई गई
लेकिन, राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस के 6 और उसकी सरकार को समर्थन दे रहे तीन निर्दलीय विधायकों ने पाला बदलकर सरकार को संकट में ला दिया। पहले राज्यसभा चुनाव हार गई। फिर बाद में पार्टी के बागी विधायकों की ओर से खबर आई कि कांग्रेस के 26 विधायक मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से अलग-अलग वजहों से नाराज हैं।
कांग्रेस से कहां हुई चूक?
इन दावों में तब दम तब नजर आया जब लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बुधवार को सुक्खू सरकार से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपनी ही सरकार पर उंगली उठाने में भी देरी नहीं की और अपने पिता पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के नाम पर वोट लेकर उन्हें भुला दिए जाने तक की बात कर दी।
इससे पहले विक्रमादित्य सिंह पार्टी लाइन से अलग जाकर 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी शामिल हो चुके हैं।
मतलब साफ है कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार में अब जो आग भड़की हुई दिखाई पड़ी है, उसका धुआं पहले से उठ रहा था, लेकिन पार्टी के रणनीतिकारों को या तो नहीं दिखा या उसे देखकर भी अनदेखा कर दिया गया!
डीके शिवकुमार और हुड्डा ने सुझाई तरकीब?
मुख्यमंत्री सुक्खू से कांग्रेस विधायकों की नाराजगी की खबरों के बीच राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट भी शुरू हो गई। कांग्रेस आला कमान ने आनन-फानन में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और अपने नए संकटमोचक डीके शिवकुमार और हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को शिमला में उतार दिया।
'बीजेपी के कई विधायक हमारे संपर्क में हैं'
एक वक्त मुख्यमंत्री के इस्तीफे की अफवाह भी उड़ी। लेकिन, उन्होंने यह कहकर इसे खारिज कर दिया कि 'बजट के दौरान हम अपना बहुमत साबित करेंगे। हिमाचल में कांग्रेस पार्टी की सरकार पांच साल तक चलेगी...'। यही नहीं कल की चूक के बावजूद ये दावा करने से भी परहेज नहीं किया कि 'बीजेपी के कई विधायक हमारे संपर्क में हैं...'
स्पीकर ने भाजपा के 15 एमएलए को निष्कासित करके सरकार का संकट दूर किया!
उधर न्यूज एजेंसी एएनआई ने पहले ही रिपोर्ट दी थी कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा के स्पीकर ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर समेत भाजपा के 15 एमएलए को सदन में कथित हंगामा और दुर्व्यवहार के आरोपों में निष्कासित कर दिया है।
वैसे बीजेपी विधायकों के निलंबन की आशंका जयराम ठाकुर ने स्पीकर के फैसले से भी पहले ही जता दी थी। लेकिन, यहां तो निष्कासन की कार्रवाई कर दी गई।
कैसे कांग्रेस के पक्ष में झुका जादुई आंकड़ा?
स्पीकर की ओर से विपक्ष के 15 विधायकों के निष्कासन का मतलब शायद यह हुआ कि विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या घटकर 53 रह जाए! यानी बहुमत का आंकड़ा 35 से घटकर 27 ही रह गया! इसकी वजह से जादुई आंकड़ा कांग्रेस के पक्ष में झुक गया!
इस तरह से कांग्रेस सरकार ने विधानसभा से आनन-फानन में बजट पास कराकर फिलहाल खुद को बचा लिया है। इसके साथ ही सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। लेकिन, सुक्खू सरकार का यह संकट कबतक के लिए टला है, यह फिलहाल हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।












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