Apple Season: 6 हजार करोड़ की सेब आर्थिकी पर गहराया संकट, 144 करोड़ रुपए का नुकसान
खराब मौसम की मार कुछ इस तरह सेब आर्थिकी पर असर डाल रही है कि 15 सितंबर के बाद तोड़ने वाली फसल वक्त से पहले ही तोड़ी जा रही है।
Apple Season: हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देने वाले सेब के उत्पादन में इस बार भारी गिरावट देखने को मिल रही है। खराब मौसम की मार से प्रदेश की 6 हजार करोड़ की सेब आर्थिकी पर संकट गहरा गया है। बागवानों को वक्त से पहले ही फसल तोड़नी पड़ रही है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि मौसम की मार के कारण इस बार सेब का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले आधा रह सकता है। प्रदेश में 7 हजार फीट से अधिक ऊंचाई वाले बगीचों में सेब की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खराब मौसम की मार कुछ इस तरह सेब आर्थिकी पर असर डाल रही है कि 15 सितंबर के बाद तोड़ने वाली फसल वक्त से पहले ही तोड़ी जा रही है। राज्य बागवानी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल लगभग 33.6 मिलियन सेब बक्सों का कारोबार हुआ। हर साल 4-5 करोड़ रुपए की सेब उपज का कारोबार होता है। लेकिन इस बार सेब का उत्पादन घटकर 1.5-2 करोड़ (15-20 मिलियन) पेटी रहने का अनुमान है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 113,000 हेक्टेयर में सेब उगाए जाते हैं।
बागवानी क्षेत्र को कुल 144 करोड़ रुपये का नुकसान
7 जुलाई से 10 जुलाई के बीच भारी बारिश के कारण शिमला और कुल्लू के सेब उत्पादक बेल्ट में बगीचों को गंभीर नुकसान हुआ है। बागवानी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सीजन के दौरान बागवानी क्षेत्र को कुल 144 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। भारी बारिश के कारण सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिसके कारण बागवानों को फसल को बाजारों तक पहुंचाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शिमला जिले में कई स्थानों पर सड़क सुविधा न होने के कारण बागवान अपनी सेब की फसल को नदी-नालों में फेंकते देखे गए हैं। हिमाचल प्रदेश में 500,000 से अधिक लोग सीधे तौर पर सेब की खेती से जुड़े हुए हैं।
वहीं, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान की सहायक प्रोफेसर निशा रानी की मानें तो जलवायु परिवर्तन के कारण सेब बेल्ट में ऊंचाई में बदलाव हो रहा है। वहीं, जलवायु परिवर्तन भी ओलावृष्टि का एक अहम कारण है। तापमान में बदलाव के कारण नमी की मात्रा बढ़ रही है, जिसके कारण उन क्षेत्रों में ओलावृष्टि हो रही है, जहां पहले कम या बिल्कुल नहीं होती थी। ओलों का आकार भी बढ़ रहा है।












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