हिमाचल में टिकट के तलबगार पैदा कर रहे हैं नई सिरदर्दी
ऐसे में दोनों दलों में स्थिति एक अनार कई बीमार वाली बनती नजर आ रही है। पार्टी नेताओं ने मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रों से ही अपनी दावेदारी जताना शुरू कर दी है।
शिमला। विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटे प्रदेश के राजनीतिक दलों के लिए टिकट की तलबगार नई सिरदर्दी पैदा करने लगे हैं। कांग्रेस और भाजपा में टिकट के चाहने वालों की लाइनें लंबी होती जा रही हैं। खासकर भाजपा में मामला बेहद पेंचीदा होने लगा है। दरअसल हिमाचल में भाजपा वीरभद्र विरोधी लहर और नरेंद्र मोदी की हवा से जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त है। इसी कारण से एक-एक विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के टिकट के लिए दावेदारों की तादाद बढ़ती जा रही है। जिससे पार्टी को बगावत का खतरा नजर आने लगा है।

प्रदेश की सत्ता में वापसी की तैयारी में जुटी भाजपा में इस बार नेतृत्व की जंग के साथ टिकटों के लिए लंबी कतार है। प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के कई-कई प्रत्याशी यहां भी समीकरण बिगाड़ सकते हैं। यही वजह है कि वरिष्ठ भाजपा नेता शांता कुमार कह चुके हैं कि स्वघोषित प्रत्याशी पार्टी को बर्बाद कर देंगे। वहीं पार्टी प्रधान सतपाल सत्ती का कहना है कि टिकट आवंटन को लेकर फर्जी प्रचार करने वालों की भी आईटी टीम पहचान करे। भाजपा में टिकट के चाहने वालों पर नजर दौड़ाएं तो चौपाल विधानसभा का उदाहरण सामने है। जहां पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राधा रमण शास्त्री के साथ विधायक बलवीर वर्मा शामिल हैं।
इसी तरह जहां पर मौजूदा विधायक हैं, वहां भी टिकटों के लिए कई नेता अपना दावा ठोंक रहे हैं। शिमला में सुरेश भारद्वाज के अलावा प्रदेश उपाध्यक्ष गणेश दत्त सहित कई अन्य नेता कतार में हैं। सोलन में एचएन कश्यप और तरसेम भारती के अलावा 2 अन्य नेता दावेदार हैं। देहरा विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा विधायक रविंद्र सिंह रवि पर बाहरी ठप्पा लगाते हुए वहां के कुछ स्थानीय नेता भी टिकट की दौड़ में शामिल हो गए हैं। धर्मशाला में भाजपा के ही एक पदाधिकारी ने इस बार किशन कपूर के स्थान पर किसी अन्य को प्रत्याशी बनाने की बात कही थी। वहीं पालमपुर में भी इस बार टिकट के तलबगारों की सूची लंबी हो चुकी है।

वहीं दूसरी ओर विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में नेतृत्व की जंग के साथ ही टिकट के लिए भी जुगाड़बाजी शुरू हो गई है। आलम ये है कि कुछ कांग्रेस नेता तो मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्र से ही चुनावी रण में उतरने का ऐलान करने लगे हैं। ऐसे में दोनों दलों में स्थिति एक अनार कई बीमार वाली बनती नजर आ रही है। बात सत्तारूढ़ कांग्रेस की करें तो कुछ पार्टी नेताओं ने मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रों से ही अपनी दावेदारी जताना शुरू कर दी है। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह के विधानसभा क्षेत्र दरंग से प्रदेश कांग्रेस के सचिव एवं मंडी जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष पूर्ण चंद ठाकुर ने विधानसभा टिकट के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। इसके साथ ही सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स के विधानसभा क्षेत्र ठियोग से कई नेता टिकट की दौड़ में शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आईडी बाली का नाम शुमार है।
सोलन में मंत्री धनीराम शांडिल के हलके से कांग्रेस जिला प्रभारी केहर सिंह खाची भी टिकट आवेदन की तैयारी में हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के चुनाव लड़ने से इंकार करने के बाद आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी द्वारा भी चुनाव न लड़ने का ऐलान करते ही पूर्व मंत्री एवं पार्टी प्रदेशाध्यक्ष रहे पीरु राम चौधरी की पौत्रवधू सुमन चौधरी ने बल्ह विधानसभा क्षेत्र से अपनी दावेदारी पेश कर दी है। इसके साथ ही सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के युवा नेता यदुपति ठाकुर भी चुनाव लड़ने की तैयारियों में हैं।
बताया जा रहा है कि टिकट आवंटन से पहले कांग्रेस ने जिलाध्यक्षों से सशक्त उम्मीदवारों की जो सूचियां मांगी हैं, उनमें कुछ विधानसभा क्षेत्र तो ऐसे हैं। जहां से 30 से 40 दावेदार सामने आए हैं। ऐसे में टिकट आवंटन से पहले कांग्रेस में घमासान होता नजर आ रहा है। कांग्रेस ने बागियों की वापसी के लिए साढ़े 4 साल भी संगठन के दरवाजे नहीं खोले हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के इन तेवरों ने सभी को चौंकाकर रख दिया है। उन्होंने कहा कि पहले जो विधानसभा चुनाव में बागी हो जाता था। उसकी वापसी लोकसभा चुनाव में हो जाती थी और जो लोकसभा चुनाव में बागी हो जाते थे, वे विधानसभा चुनाव में वापसी कर लेते थे लेकिन अब ये खेल कांग्रेस में नहीं चलेगा। संगठन के मुखिया कहते हैं कि अब ऐसा नहीं चलेगा ताकि भविष्य में ऐसा कदम उठाने वाले 10 बार सोचें।

बता दें कि वर्तमान में हिमाचल कांग्रेस के करीब 33 नेता और पदाधिकारी संगठन से निलंबित चल रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस में वापसी की राह देख रहे कई नेताओं की चिंताएं बढ़ सकती हैं। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने कहा है कि बागियों को पार्टी में शामिल करने का फैसला गुण व दोष के आधार पर होता है। इस संबंध में संगठन फैसला लेता है। किसी भी बागी नेता एवं पदाधिकारी को पार्टी में शामिल करने बारे विचार के बाद ही निर्णय किए जाते हैं। कई नेताओं ने पार्टी में शामिल होने को लेकर अपनी इच्छा जाहिर की थी। इसके लिए उन्होंने पार्टी प्रक्रिया का पालन भी किया। इसी के आधार पर पार्टी की सदस्यता उन्हें दी गई है।
भाजपा में विश्वास जताने वालों को पार्टी में शामिल किया जाता रहा है। भविष्य में भी गुण व दोष के आधार पर फैसले किए जाएंगे। हालांकि उन्होंने कहा कि पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों में हर कार्यकर्ता और पदाधिकारी को विश्वास प्रकट करना चाहिए और हमेशा पार्टी के साथ जुड़े रहना चाहिए। पार्टी से बाहर जाकर कभी किसी को मान-सम्मान प्राप्त नहीं हुआ है। हालांकि टिकट न मिलने की स्थिति में अपने ही नेताओं के बागी होने से बचने को कांग्रेस सभी जिला और ब्लाक कमेटियों को विश्वास में लेकर ही इस बार टिकट आवंटित करने की राह पर चल रही है। इसके तहत पार्टी ने सभी जिलाध्यक्षों से सशक्त उम्मीदवारों की रिपोर्ट भी मांग ली है ताकि बाद में कोई बखेड़ा न हो। पार्टी की मानें तो टिकट उन्हीं चेहरों को मिलेगा जिनके नाम जिला और ब्लाक कमेटियों के माध्यम से आएंगे।
बताया जा रहा है कि भाजपा हाईकमान टिकट आवंटन से पहले सर्वे करवा रहा है, जिसमें नेताओं की लोकप्रियता के साथ समाज में उनके प्रभाव का भी आंकलन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ये है कि पार्टी उसी नेता को चुनाव मैदान में उतारना चाहती है जो जीतने की क्षमता रखता हो। ऐसे में मौजूदा विधायकों के साथ दिग्गजों के टिकट कटने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पार्टी प्रधान कहते हैं कि सोशल मीडिया पर भी निजी स्तर पर दावेदारियां न जताई जाएं।












Click it and Unblock the Notifications